एक पत्रकार की मौत पर मातम की पाबंदी

02-01-2018 21:24:28 पब्लिश - एडमिन



जिसकी वफादारी के सब क़ायल थे। निजि जिन्दगी की उलझने पीछे रह जाती थीं, लेकिन अच्छी खबरें निकालने की उलझन बार-बार नजर आती थी। बार-बार अपने बालों को उंगली में घुमाकर सुलझाने की आदत खबरें निकालने की बेचैनी जाहिर करती थी।

काजल की इस कोठरी में भी उस पर कोई दाग़ नही लग पाया। लेकिन अपनी जिन्दगी के आखिरी पड़ाव में उन्हें जेल जाना पड़ा। वो भी खबरों की हेराफेरी के इल्जाम में। शिव भगवान की तरह जहर पी गया ये पत्रकार। मालिकों और मैनेजमेंट को बचाने के लिए खुद जेल चले गये। 
लेकिन इन्हीं मालिकों ने आज इस वफादार के साथ खूब वफादारी निभाई। इनकी मौत के मातम में शरीक होने पर भी पाबंदी लगा दी। सैकड़ों पत्रकार शोक सभा मे इकट्ठा थे। पाबंदी के होते वो पत्रकार यहां नहीं आ सके जो उस अखबार में काम कर रहे हैं जिस अखबार में चंद माह पहले संपादक थे दिवंगत पत्रकार।

भला हो योगी सरकार और सरकार के प्रमुख सचिव सूचना अवनीश अवस्थी जी का, जिन्होंने ऐसे जीवट और ईमानदार पत्रकार के योगदान और यादों को जिन्दा रखने का फैसला किया है। एक वरिष्ठ पत्रकार के प्रस्ताव पर अमल करने का आश्वासन दिया गया है। दिवंगत पत्रकार की स्मृति में निष्ठावान पत्रकारों को पुरस्कृत करने का प्रस्ताव जल्द ही अमल में आयेगा। इसके अलावा भी पत्रकारिता जगत को अपना अविस्मरणीय योगदा देकर दुनिया से रुखसत होने वाले पत्रकारों की स्मृति में पत्रकारों को पुरस्कृत किये जाने के प्रस्तावित आयोजन पर प्रमुख सचिव सूचना ने अपनी सहमति व्यक्त की। साथ ही इस दिवंगत पत्रकार के परिजनों को 20 लाख रुपये का आर्थिक सहयोग देने का आश्वासन भी दिया। 
- नवेद शिकोह (स्वामी नवेदानंद) 
8090180256

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