* आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें *

शिवराज सरकार मेहरबानःभाजपा के करीबियों की वेबसाइटस को 14 करोड़ के विज्ञापन

28-03-2018 18:06:06 पब्लिश - एडमिन


भोपाल। जमीन पर काम हो न हो, प्रचार होना चाहिए, खजाना खाली हो मगर छवि चमकाने के लिए विज्ञापनों पर करोड़ो लुटाने में कोई हर्ज नहीं। यह कारनामा उस पार्टी की राज्य सरकार का है जो मित व्यययिता और पारदर्शिता के दावे करती है। बात हो रही मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार की। राज्य सरकार ने 14 करोड़ रूपये ऐसे वेबसाइटस पर लुटा दिये जिनका मीडिया जगत में कोई खास वजूद नहीं। बस नाम को चल रही है। सरकार की मेहरबानी से मालामाला होने वाली वेबसाइटस ज्यादातर भाजपा से जुड़े लोगों/पत्रकारों के रिश्तेदारों के नाम पर चल रही है। भले ही उनका पत्रकारिता और खबर से दूर दूर तक कोई वास्ता न हो। पूर्व में विज्ञापनों पर सरकारी खजाने से करोड़ों रूप्ये लुटा चुकी शिवराज चैहान सरकार की मेहरबानी इस बार वेबसाइटस पर बरसी है। एक पत्रिका में छपी खबर में दावा किया गया कि शिवराज सरकार ने अपने चहेते पत्रकारों के लिए खजाने का मंुह खोल दिया। सूबे में 234 वेबसाइटस पर सरकार की कृपा वर्षा हुई। पत्रिका के अनुसार ऐसी वेबसाइटस को भी विज्ञापन दिये गये जो बंद पड़ी थी। राज्य सरकार के चहेते पत्रकारों ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर वेबसाइटस बनाकर सरकार की मेहरबानी का भरपूर लाभ उठाया।
प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक 26 वेबसाइटस को दस लाख से अधिक का विज्ञापन दिया गया। इनमें डेढ़ दर्जन वेबसाइटस विभिन्न समाचार पत्रों से जुड़े पत्रकारों के सगे सम्बन्धियों के नाम पर संचालित हो रही है। इन्हें पांच से दस लाख रूप्ये के विज्ञापन दिये गये। कुल 33 वेबसाइटस को सरकार की ओर से जो विज्ञापन दिये गये उनमें कई ऐसी वेबसाइटस थी जिनमें समान कंटेट पाया गया। दरअसल यह वेबसाइटस ऐसी है जिनके नाम ही अलग अलग ही है वर्ना कंटेट बिल्कुल एक है। कुछ वेबसाइटस में तो सम्पर्क विवरण तक नही है और न इस बात की जानकारी है कि संचालक कौन है। इंडिया टीवी के अनुराग उपाध्याय की पत्नी की वेबसाइटस को चार साल में तकरीबन 19.07 लाख रूप्ये का विज्ञापन प्राप्त हुआ। इस वेबसाइटस पर डेटलपाइन तक नहीं होती। प्रखर अग्निहोत्री और राजेश अग्निहोत्री की वेबसाइटस पर समान कंटेट हैं। इन्हें 8.75 लाख रूपये के विज्ञापन उपलब्ध कराये गये।
पत्रिका का कहना है कि विज्ञापन उन्हीं लोगों को दिया गया जो भाजपा के करीबी है। ऐसा करने से मीडिया की स्वतंत्रता समाप्त होती है। स्थानीय हिन्दी साप्ताहिक एलएन स्टार के प्रकाश भटनागर की पत्नी पूनम भटनागर की वेबसाइट को 2012-15 के बीच 11.25 लाख रूपये के विज्ञापन दिये गये। सरमन नागले की पत्नी सुनीता नागले तीन वेबसाइटस चलाती है जिन्हें सरकारी नियमों के अनुसार विज्ञापन मिलते हैं। वे पिछले 14 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय है। इन तीनों वेबसाइटस को कुल 17.07 लाख रूपये के विज्ञापन मिल। ‘‘द पायनियर’’ के स्थानीय सम्पादक गिरीश शर्मा की पत्नी स्कूल शिक्षिका मिनी शर्मा के नाम से संचालित हो रही है। इस वेबसाइटस को भी 17 लाख रूपये के विज्ञापन प्रदान किये गये। शिवराज सरकार भाजपा के लिए कार्यरत अश्विनी राय की वेबसाइट को 21.70 लाख रूपये के विज्ञापन दिये गये। अश्विनी को स्पष्टीकरण है कि वह भाजपा के लिए काम करती है, वेबसाइटस को कोई और चलाता है। अंग्रेजी दैनिक डेली प्रेस के एडिटर नीतेन्द्र शर्मा की पत्नी सुमन शर्मा ूूसंचालित करती है जिसे 20.70 लाख रूपये के विज्ञापन चार साल में दिये गये। नीतेन्द्र शर्मा ने स्पष्ट किया कि उनकी पत्नी केेेेे पास वेबसाइटस संचालन के अधिकार है। नया इंडिया हिन्दी अखबार के पत्रकार राघवेन्द्र सिंह की पत्नी साधना सिंह की वेबसाइट जो कि उपलब्ध ही नहीं है, को भी 8.25 लाख रूपये के विज्ञापन जारी हुए। रविन्द्र कैलेशिया की पत्नी की वेबसाइट को 8.05 लाख के विज्ञापन मिले जबकि रविन्द्र का कहना है कि उन्हें सरकार से कोई पैसा नहीं मिला। एक वेबसाइटस पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के नाम पर है जिसके मुख पृष्ठ पर समाचार है।    दैनिक भास्कर के पत्रकार राजेश पांडेय की इस वेबसाइट को 8.5 लाख रूप्ये के विज्ञापन प्राप्त हुए जबकि राजेश का कहना है कि उनकी वेबसाइट पर फिलहाल विज्ञापन ही नहीं है। राज्य सरकार के संगठन माध्यम में कार्यरत आत्माराम शर्मा की पत्नी सुषमा शर्मा की वेबसाइट को 7.20 लाख रुपये के विज्ञापन प्राप्त हुए। आत्माराम का कहना है कि वेबसाइट के संचालक को देखने के बजाय यह देखा जाना चाहिए कि वेबसाइट कैसी है। 
कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने जब विधानसभा में इस मामले को विधानसभा में उठाते हुए सवाल दागा कि विज्ञापन भाजपा से जुडे लोगों को ही क्यों दिया जा रहा है तो सरकार कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। दरअसल वेबसाइटस के बारे में पूर्व में कोई नीति ही नहीं रही लेकिन अब हिटस के आधार पर विज्ञापन दिये जा रहे है। इन्हें चार श्रेणियों में विभाजित कर दिया गया। बंद हो चुकी वेबसाइट को विज्ञापन जारी करने का प्रावधान होने से जन सम्पर्क आयुक्त अनुपम राजन साफ इन्कार करते हैं।


आक्रोश4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोश4मीडिया मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायतअपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें  


 

अपनी राय नीचे दिये हुए कमेंट बॉक्स में लिखें !