जर्नलिस्ट आशुतोष से अपील, ‘‘तुम लौट आओ आशु’’

11-01-2018 0:14:43 पब्लिश - एडमिन


जर्नलिस्ट आशुतोष से अपील, ‘‘तुम लौट आओ आशु’’ पुराने सहयोगी संजीव ने लिखा, मीडिया को तुम्हारी जरूरत है आशुतोष

खबर बनाने और खबर बनने के बीच कितना फर्क होता है इसकी सच्चाई को बारीकी को शायद अतीत के जाने माने जर्नलिस्ट और एंकर आशुतोष से बेहतर कोई नहीं समझ सकता जिन्होंने समाजसेवी अन्ना हजारे के आन्दोलन से प्रभावित होकर पत्रकारिता की दुनिया को छोड़कर राजनीति में कदम रखा था। लोकप्रिय चैनल ‘आज तक’ और आईबीएनः-7 के दर्शकों के दिलो दिमाग पर अपनी वाकपटुता और खास अन्दाजे बयां से छाप छोड़ चुके आशुतोष के चाहने वाले आज भी भारी संख्या में मौजूद है। न केवल दर्शक बल्कि उनके साथ काम कर चुके उनके पुराने साथी ही उनसे पत्रकारिता जगत में वापसी की अपील कर रहे हैं।

कभी आशुतोष के साथ काम कर चुके ‘आज तक’ न्यूज चैनल के एग्जिक्यूटिव एडिटर संजीव पालीवाल ने उनके साथ गुजरे लम्हों को याद करते हुए कि उन्हें लौट आना चाहिए। संजीव हाल की कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि आशुतोष पत्रकार हैं वह कभी राजनीतिज्ञ नहीं बन पायेंगे। संजीव ने अपनी फेसबुक पर पोस्ट किया है कि आशुतोष को न्यूज रूम से रूख्सत हुए चार साल का अरसा हो गया है। संजीव ने आशुतोष के साथ एक दशक के अनुभवों को प्रेरणाप्रद बतातेहुए लिखा है कि आशु के साथ काम करने का अनुभव बेमिसाल रहा। आशु में वह सब कुछ है जो एक पत्रकार में होना चाहिए। खबर को पकड़ने से लेकर चिल्लाना और गुस्सा करना...जोश और जुनून किसी हद तक पागलपन है। लेकिन इसके साथ ही आशुतोष में क्रोध को भूलने की कला भी मौजूद है। किसी बात को कैसे भुलाना आशु से सीखा जा सकता है। आशु की जिन्दगी बडे पद पर रहकर सामान्य जीवन जीने का गुर सिखाती है। संजीव ने लिखा कि हाल में हुई घटनाओं से साबित हो गया कि आशुतोष अगर नेता होते तो वह सब न करते जो उन्होंने किया। संजीव ने मार्मिक शब्दों में लिखा कि ‘‘आशु वापस लौट आओ पत्रकारिता को तुम्हारी जरूरत है।’’

भगवान भोलेनाथ की नगरी कही जाने वाली वाराणसी में 1965 में एक आयकर अधिकारी के यहां जन्मे आशुतोष ने चार वर्ष पूर्व अन्ना के आन्दोलन से प्रेरित होकर 09 जनवरी 2014 को मीडिया को अलविदा कहते हुए दो दिन बाद यानि 11 जनवरी 2014 को राजनीति के पथ पर कदम रखा था। वह अन्ना के बेहद करीबी रहे अरविन्द केजरीवाल की अगुवाई में बनी आम आदमी पार्टी का हिस्सा बने लेकिन उनके राजनीतिक अनुभव ऐसे नहीं रहे जो उनके मीडिया जगत छोड़कर राजनीति क्षेत्र में जाने के फैसले को सही साबित कर सके। आशुतोष पर आईबीएनः-7 के मैनेजिंग एडिटर के पद पर रहते हुए चैनल के माध्यम से आम आदमी पार्टी को लाभान्वित करने के इल्जाम भी आयद किये गये लेकिन आशुतोष ने पूरी गम्भीरता और मजबूती से सभ इल्जामों का सामना करते हुए माकूल जवाब दिया। 52 वर्षीय आशुतोष ने देश को अनेक विद्वान, लेखक और राजनेता देने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जाने माने शिक्षण संस्थान जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पीजी किया। आशुतोष एम.फिल भी है। मातृभाषा हिन्दी के साथ साथ ही अंग्रेजी पर भी आशुतोष की मजबूत पकड़ है। विषय की गहरी समझ के साथ साथ अपनी विशिष्ट भाषाशैली, हाजिरी जवाबी और प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण से वह खबरों की दुनिया में लोगों का विश्वास अर्जित करने मंे खासे कामयाब रहे।

आशुतोष ने हिन्दी के नम्बर वन चैनल आजतक में लम्बे समय तक कार्यरत रहे। एंकरिंग के साथ साथ फील्ड और डेस्क पर खबरों का कुशल प्रबन्धन उनकी अलग ही खासियत रही। अगस्त 2011 में अन्ना आन्दोलन पर पुस्तक लिखने वाले आशुतोष का नाम मेहनत और सूझबूझ से अपना मुकाम हासिल करने का संदेश देते है।

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