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सोशल मीडिया

गौरी लंकेश निश्चित रूप से निर्भीक ओर बेबाक पत्रकार थी - संजय आर्ये

हमारे देश मे वामपंथ ओर दक्षिणपंथ के नाम पर असल मुद्दों से भटकने की प्रवर्ति घातक होती जा रही है। मामला चाहे कोई भी हो। हाल ही में हुए गौरी लंकेश की हत्या को पत्रकारों और पत्रकारिता पर हमले के रूप में देखा जान चाहिए, मगर समाज के कुछ चंद ठेकेदार एक खालिस पत्रकार की हत्या में भी अपने लिए राजनीतिक फायदे का तड़का खोज रहे है। लंकेश की हत्या की जितनी निंदा की जाए कम है, मगर आश्चर्य ये है कि हत्या के तुरंत बाद ही समाज के इन ठेकेदारों ने खुद ही फैसला सुनाते हुए भाजपा, संघ को दोषी ठहराते हुए निंदा करने का अनवरत अभियान ही छेड़ दिया। अरे नामुरादों कानून को तो पहले अपना काम करने दो, उसे तो पहले हत्या पर कोई राय बनाने दो, कानून को पहले हत्या की वजह तो तलाशने दो, फिर हत्यारों का भी तभी तो पता चलेगा। अगर जांच के बाद भाजपा या कोई संघी इसके पीछे पाया जाता है तभी कर लेना ये विलाप,। मगर नही लंकेश चूंकि हिंदुत्व विरोधी विचारधारा की पोषक ओर समर्थक थी इसलिए उसकी हत्या संघ या भाजपा के इशारे पर हुई, ये कहकर आप्पा पीटना भी बेहद निंदनीय है। हर बात में संघ, भाजपा को दोषी ठहरा देना 70 के दशक के बाद से ही( पहले जनसंघ) एक परिपाटी सी बन गया है। 
गौरी लंकेश निश्चित रूप से निर्भीक ओर बेबाक पत्रकार थी, ओर उनकी हत्या से पूरा पत्रकार जगत स्तब्ध है। आज देश मे पत्रकार सबसे ज्यादा असुरक्षित है। सबसे आसान टारगेट पत्रकार ही होने लगा है चाहे वो माफिया, अपराध जगत के निशाने पर हो, या नेताओ, के ओर पुलिस प्रशासन के, सबका निशाना केवल ओर केवल पत्रकार ही बनने लगे है। पत्रकारों के लिए ऐसे में काम करना जान जोखिम में डालने वाला पेशा बनता जा रहा है मगर इसके बाद भी अधिसंख्य पत्रकार पूरी जीवटता के साथ अपने फर्ज को अंजाम दे रहे है ये हमारे लोकतंत्र की परिपक्वता ओर मजबूती दर्शाता है। गौरी लंकेश को श्रद्धांजलि इस उम्मीद के साथ कि जल्द ही उनके हत्यारे पकड़े जाएंगे।

( इस पोस्ट पर कमेंट इस प्रकार है )

Naveen Chauhan बहुत सुन्दर लेखन.ये सच है कि गौरी लंकेश की हत्या हुई. जब तक हत्यारे गिरफ़्तार नहीं होते किसी पार्टी पर आरोप नहीं लगाया जाना चाहिए.

Avtar Bhushan Bhartiya सुन्दर लेख
वह निर्भीक और बेबाक थी
और इतने दिन तक जीवित रह पाई क्योंकि हिन्दू विरोधी थी

और इसीलिए इतना हो हल्ला हो रहा है, राजनीति हो रही है
इस देश में स्वयं को निर्भीक साबित रोकने के लिये हिन्दू धर्म या विचारधारा को लक्षित करना सबसे आसान काम है
हत्या एक अक्षम्य अपराध है

Manoj Gahtori गौरी लंकेस की मौत पर विधवा विलाप करने वालों को उत्तर प्रदेश ,बिहार में हुई निर्दोष पत्रकारों की हत्याएं नही दिखाई दीं, चूंकि लंकेस ईसाई प्रचारक थी, लंकेस हिदू धर्म के खिलाफ जहर फैलाए हुए थी, वामपंथी विचारों को खूब खाद पानी दे रही थी,इसलिए उसकी मौत को तूल देकर राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही हैं। संघ और बीजेपी को बदनाम करने की घृणित चालें अब कामयाब होने वाली नही हैं।

Rishe Goyal बहुत अच्छे सर जी

आजतक न्यूज़ चैनल में अपने 17 साल सेवा दे चुके हरिद्वार के वरिष्ठ पत्रकार संजय आर्ये जी की एफबी वॉल से 

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वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड की अमेरिका ने की आलोचना

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की बेंगलुरु में कल हुई नृशंस हत्या की अमेरिका ने आलोचना की है। नयी दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास की ओर से आज जारी बयान में प्रेस की आजादी का हवाला देते हुये इस वारदात को निंदनीय बताया गया है।
अमेरिकी दूतावास के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ‘‘सम्मानित पत्रकार गौरी लंकेश की बेंगलुरु में हुई हत्या के संदर्भ में भारत सहित दुनिया भर में प्रेस की आजादी के हवाले से हो रही आलोचना में अमेरिकी दूतावास अपना स्वर मिलाता है।’’ दूतावास ने लंकेश हत्याकांड पर दुख व्यक्त करते हुये पीड़ित परिजनों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की।
एक स्थानीय पत्रिका की संपादक 55 वर्षीय पत्रकार लंकेश की कर्नाटक में बेंगलुरु स्थित उनके आवास पर अज्ञात लोगों ने कल गोली मारकर हत्या कर दी थी। कर्नाटक सरकार ने इस सनसनीखेज हत्याकांड की जांच के लिये आज विशेष जांच दल का गठन करने का फैसला किया है। वरिष्ठ पत्रकार की हत्या के बाद सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में व्यापक तौर पर हो रही आलोचनात्मक प्रतिक्रियाओं के बीच भारत सरकार ने भी राज्य सरकार से इस वारदात में शामिल अपराधियों को पकड़ने के लिये की गयी कार्रवायी पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।


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पत्रकार गौरी लंकेश सजा याफ्ता थी

गौरी लंकेश सजा याफ्ता थी, पत्रकारिता नहीं बल्कि कम्युनिस्ट सोच की जेहादी थी
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हत्या किसी की भी हो वह निदंनीय होनी चाहिए पर कुछ हत्याएं ऐसी होती हैं जो स्वयं परिस्थितियां निर्मित करती है। गौरी लंकेश की हत्या भी निदंनीय है पर देखना यह चाहिए कि उसकी हत्या पर हायतौबा मचाने वाली कम्युनिस्ट जमात क्या सही में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आकंाक्षी रहे हैं? सही तो यह है कि ये तो हिंसक और तानाशाही प्रवृति के वाहक है। कम्युनिस्टों ने तानाशाही प्रवृति के कारण दुनिया भर में करोडो लोकतांत्रिक वादियों को मार डाला है। अभी-अभी चीन ने उस लोकतांत्रिक सेनानी को जेलों में सडा कर मार डाला जिसे शांति और सदभाव के लिए नोबल पुरस्कार मिला था?
--------- कौन थी गौरी लंकेश............. गौरी लंकेश कर्नाटक में एक तथाकथित पत्रकार थी, लंकेश मीडिया घराने की मालकिन थी और कम्युनिस्ट विचारों की प्रवक्ता थी। अपनी मैगजीन में वह कम्युनिस्ट विचारों के लिए सक्रिय रहती थी। हिन्दू धर्म के खिलाफ वह जेहाद करती थी पर मुस्लिम और ईसाई प्रसंग वाले प्रश्नों पर उसकी कोई सक्रियता नहीं होती थी।
-------सजायाफ्ता थी वह ............... गौरी लंकेश सजा याफ्ता थी। उसने भाजपा के सांसद प्रहलाद जोशी के खिलाफ अस्वीकार और वैचारिक रक्तरंजित खबरें प्रकाशित की थी। इसके खिलाफ प्रहलाद जोशी कोर्ट गये थे। कोर्ट ने झूठी और छवि खराब करने वाली खबर छापने के लिए सजा सुनायी थी। अभी वह जमानत पर थी। सजा होने का अर्थ है कि वह आपराधिन भी थी।
------  कम्युनिस्टों का हायतौबा.......... कम्युनिस्ट जमात ने न केवल दिल्ली में बल्कि पूरे देश में हायतौबा मचा रखा है। गौरी लंकेश की हत्या को हिन्दू फास्टिवाद से जोडा जा रहा है। कम्युनिस्टों का शोर यह बता रहा है कि गौरी लंकेश कम्युनिस्ट सोच की थी और उसकी सक्रियता कम्युनिस्ट विचारों के प्रति थी।
------गौरी लंकेश के अन्य कार्य......... कहा जाता है कि गौरी लंकेश पत्रकारिता की आड में कई प्रकार के जंजाल से उलझी हुई थी। कर्नाटक की कांग्रेसी सरकार से उसके रिश्ते भी अच्छे थे। जब किसी सरकार से रिश्ते अच्छे होते हैं तो उसके भुनाने में पत्रकार के खेाल में बैठा व्यक्ति कई प्रकार के अस्वीकार्य कार्य भी करता है। इसलिए दुश्मन भी हजार होते हैं।
------सबक क्या है........... गौरी लंकेश की हत्या का सबक यह है कि एक पत्रकार को पत्रकार ही रहना चाहिए। एक पत्रकार को किसी भी राजनीतिक दल के सदस्य या प्रवक्ता के तौर पर काम नहीं करना चाहिए। जब आप किसी राजनीतिक दल के सदस्य के तौर पर कार्य करते हैं तब आपकी पत्रकारिता अविश्वनीय हो जाती है। उसका परियणाम भी घातक होता है, जैसा कि गौरी लंकेश के साथ हुआ है।

(विष्णु गुप्त जी की एफबी वॉल से) 

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सरकार ने दिखाया सकारात्मक रुख मगर फिल्म और टीवी flash news -कामगारों की हड़ताल रहेगी जारी आमरण अनशन खत्म, फिल्म कामगारोें को पीएफ सुविधा

सरकार ने दिखाया सकारात्मक रुख मगर फिल्म और टीवी कामगारों की हड़ताल रहेगी जारी आमरण अनशन खत्म, फिल्म कामगारोें को पीएफ सुविधा मुंबई, मुंबई के फिल्मसिटी स्टुडियो के बाहर पिछले ८ दिन से हड़ताल कर रहे सिनेमा और टेलीविजन इंडस्ट्रीज की २२ यूनियनों के कामगारों की हड़ताल सरकार के सकारात्मक रुख के बावजूद जारी रहेगी। मंगलवार को इन युनियनों का नेतृत्व करने वाली फेडरेशन आॅफ वेस्टर्न इंडिया सिने इम्प्लाईज के प्रतिनिधियों को महाराष्ट सरकार ने बैठक के लिये बुलाया। यह बैठक राज्य केश्रम मंत्री संभाजी पाटिल निलांगेकर के साथ सरकारी गेस्ट हाउस सहयाद्री में हुयी। इस बैठक में प्रोडयुसरों की संस्था को नहीं आमंत्रित किया गया था। बैठक में भाजपा के मुंबई अध्यक्ष और विधायक आशीष शेलार, भाजपा प्रवक्ता और विधायक अतुल शाह के साथ साथ श्रम मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान महाराष्टÑ सरकार का काफी सकारात्मक रुख रहा। सरकार ने साफ कहा कि फेडरेरशन की मांग जायज है। इस दौैरान फिल्म और टीवी कामगारों को पीएफ सहित कई सुविधायें देने पर भी विचार विर्मश हुआ। श्रम मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि फिल्म और टीवी कामगारों के लाभ के लिये एक पालिशी बनायी जाये और निर्माताओं को अगली बैठक में बुलाकर उनको आवश्यक निर्देश दिये जायें। साथ ही श्रम मंत्री ने आग्रह किया कि फेडरेशन सरकार पर भरोसा करे। कामगारों के हितों की अनदेखी नहीं की जायेगी और फिल्म और टीवी कामगारों द्वारा किये जारहे आमरण अनशन को खत्म करायें। जिसके बाद फेडरेशन के प्रेसिडेंट बी. एन. तिवारी और जनरल सेक्रेटरी दिलीप पिठवा ने सरकार को भरोसा दिया कि वह आमरण अनशन खत्म करा देंगे। मगर जबतक हमारा एग्रीमेंट प्रोडयुसरों के साथ नहीं होता वे अपनी हड़ताल जारी रखेंगे। फिल्मसिटी गेट के पास पिछले चार दिन से कुछ कामगार आमरण अनशन पर हैं। इन कामगारों में आर्ट डायरेक्टर दुर्गा मंटु गुप्ता, आर्ट डायरेक्टर किशन आर गुप्ता, स्टील फोटोेग्राफर कुंदन गोस्वामी, पोस्ट प्रोडक्शन विभाग के अमित कुमार सिंह, डांसर रंजीत सिंह करालसा, मिस्त्री दुरईराजा पोंडियार और कारपेंटर अशोक कुमार उपाध्याय प्रमुख है। इन आमरण अनशन करने वालों में कुछ कामगारों की तबियत सोमवार की रात ज्यादा बिगड़ गयी जिसके बाद उन्हे पास के अस्पताल में भी भर्ती कराया गया। मंगलवार को हुयी बैठक में सभी क्राफ्ट के प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुये। श्रम मंत्री के साथ हुयी बैठक में बी.एन, तिवारी, दिलीप पिठवा के अलावा म्युजिक डायरेक्टर एशोसिएशन के आशीष रेगो, फाईटर एशोशिएशन के एजाज गुलाब और प्रोडक्शन यूनियन के सुरेन्द्र श्रीवास्तव आदि प्रमुख थे। फेडरेशन लंबे समय से मांग करता रहा है कि आठ घंटे की शिफ्ट होे और हर अतिरिक्त घंटे के लिये डबल पेमेंट हो। हर क्राफ्ट के सभी कामगारों , टैक्निशियनों और कलाकारों आदि की चाहे वह मंथली हो या डेलीपैड, पारिश्रमिक में तत्काल वाजिब बढ़ेत्तरी, बिना एग्रीमेंट के काम पर रोक, मिनीमम रेट से कम पर एग्रीमेंट नहीं माना जायेगा। साथ ही जॉब सुरक्षा , उत्तम खानपान और सरकार द्वारा अनुमोदित सारी सुविधायें और ट्रेड यूनियन के प्रावधान हमारी प्रमुख मांग है। मगर निर्माता हमारी मांग को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। बॉलीवुड में काम कर रहे ये कामगार अपना नया एमओयू साइन करवाना चाहते हैं, जिसकी मियाद पिछली फरवरी में खत्म हो चुकी है। ये एमओयू हर ५ साल में साइन होता है। इस बार नए एग्रीमेंट में कामगारों की मांगों में उनका मेहनताना, सुरक्षा, समय पर भुगतान, काम करने की समय सीमा और बीमा शामिल हैं। इनके मुताबिक, इनका मेहनताना ३ से ६ महीने बाद मिलता है। १८-१८ घंटे काम करवाया जाता है। इस हड़ताल को भाजपा की चित्रपट सेना का भी समर्थन मिला है।

शशिकांत सिंह

सुप्रिय प्रसाद Broadcast Editors' Association के अध्यक्ष

आज तक और इंडिया टुडे के मैनेजिंग एडीटर सुप्रिय प्रसाद को ब्रॉडकास्ट एडीटर्स असोसिएशन (BEA) यानी न्यूज चैनलों के संपादकों की संस्था का नया अध्य़क्ष चुन लिया गया है। वहीं वरिष्ठ संपादक अजीत अंजुम नये महासचिव चुने गये। दिबांग (ABP NEWS) और अरनब गोस्वामी (Republic TV) उपाध्यक्ष और अजय कुमार (News Nation) कोषाध्यक्ष बने। इन सभी का चुनाव सर्वसम्मति से बीईए की आम सभा में हुआ।

आज सम्पन्न हुए चुनाव में 15 सदस्यीय नयी एक्जीक्यूटिव कमेटी का भी गठन किया गया। इसमें वरिष्ठ संपादक क़मर वहीद नक़वी, शाज़ी ज़मां, एन के सिंह, मिलिंद खांडेकर (ABP NEWS), राहुल कंवल ( India Today  & Aajtak), संजय बरागटा ( ZEE NEWS), सोनिया सिंह (Ndtv), दीपक चौरसिया ( India News), संजीव पालीवाल (Aajtak), अभिषेक कपूर (Republic TV), रवि प्रकाश (TV9), सुकेश रंजन (News 24), नविका कुमार (Times Now), भूपेंद्र चौबे (CNN News18) और राजेश रैना ( ETV) शामिल हैं।

संस्था के नवनिर्नाचित अध्यक्ष सुप्रिय प्रसाद ने अपने स्वागत भाषण में पिछली कमेटी के योगदान और उनके द्वारा किये गये कार्यों की सराहना की। उन्होंने नये सदस्य बनाने, सदस्यों के बीच संवाद और जनता के बीच मीडिया की छवि को सुधारने के उपाय अपनाने पर जोर दिया। महासचिव अजीत अंजुम ने बताया कि बीईए के विस्तार के लिए क्षेत्रीय न्यूज चैनलों के संपादकों को जोड़ने की मुहिम चलायी जायेगी।

इसी को ध्यान में रखते हुए सदस्यता बढ़ाने के लिये एक नयी कमेटी का गठन किया गया जिसमें संजीव पालीवाल, राहुल कंवल और संजय बरागटा होंगे

                                                                                                                                                                                                             साभार- अजीत अंजुम के फेसबुक वॉल से

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व्हाटसप ग्रुप पर डाली अश्लील वीडियो पुलिस ने किया मुकदमा दर्ज

बिजनौर के (नहटौर) दिगम्बर जैन समाज नहटौर ग्रुप पर तीन अश्लील वीडियो डालने वाले कपड़ा व्यापारी संजीव जैन पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज, कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है दो दिन पूर्व कपड़ा व्यापारी संजीव जैन ने व्हाट्सप्प ग्रुप पर एक अश्लील वीडियो डाली थी इस अश्लील वीडियो की जैन समाज ने कड़ी निंदा करते हुए आरोपी पर सख्त कार्येवाही करने की मांग की थी वही पुलिस कार्यवाही से बचने के लिए आरोपी ने पुलिस को मोबाइल खो जाने की 1 दिन बाद दी थी झूठी तहरीर दी थी जब पुलिस ने पुरे मामले की जांच की तो पता चला की आरोपी झूठ बोल रहा है जब पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया तो आरोपी फरार हो गया फिलहाल पुलिस आरोपी की तलाश में जुट गई है आपको बता दे की नहटौर के मोहल्ला पंचायती मंदिर निवासी एक ग्रुप मेंबर ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था

बिजनौर से मीडिया कर्मी अजय पाण्डे की रिपोर्ट 

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टाइम्स आफ इंडिया, डीएनए और आउटलुक हिंदी की वेबसाइट पर छपी अमित शाह की संपत्ति की खबर हटाई गई

अमित शाह की संपत्ति पिछले पाँच सालों में ३००% बढ़ गई । ये ख़बर टाइम्स आफ इंडिया, डीएनए और आउटलुक हिंदी की वेबसाइट पर छपी । संपत्ति बढ़ सकती है किसी की भी, इसमें हैरानी कैसी ? कोई भी आदमी जो मेहनत कर रहा है, ईमानदारी से धंधा या नौकरी कर रहा है तो उसकी संपत्ति में कई गुना इज़ाफ़ा हो सकता है । इसको छिपाने का कोई कारण नही । आदमी अगर ईमानदारी से आयकर देता है, उसके पास संपत्ति कैसे बढ़ी इसका पारदर्शी तरीक़े से ब्यौरा है तो वो फिर डर कैसा ? ऐसे में जब अमित शाह की संपत्ति का ब्यौरा अख़बारों की वेबसाइट पर छपा और उसके कुछ समय बाद रहस्यमय तरह से पूरी ख़बर ही ग़ायब हो जाये तो सवाल ये है कि क्या कुछ छिपाया जा रहा है ? क्या ग़लत तरह से संपत्ति अर्जित की गई है ? क्या इसके पीछे कुछ गोलमाल है ? फिर सवाल ये है कि भारत में कहा जाता है कि प्रेस स्वतंत्र है ऐसे में तीन प्रतिष्ठित अख़बार ख़बर क्यों वेबसाइट से उतार लेते हैं ? क्या ये ख़बर ग़लत थी ? अगर ग़लत थी तो फिर चुप्पी कैसी ? खंडन करे ? पाठकों से माफ़ी माँगे ? अगर ग़लत नहीं थी तो फिर हटाई क्यों इसका जवाब पाठकों को दे ? अख़बार अपने पाठकों के प्रति जवाबदेह होता है । उसकी जवाबदेही बनती है । वो बताये उसने ख़बर क्यों हटाई और अब रहस्यमय चुप्पी क्यों ? क्या ये खुसपुस सच है कि सरकार के दबाव में ख़बर हटाई गई ? अगर ऐसा है तो फिर दो बातें हो सकती है । एक, अमित शाह की संपत्ति बढ़ोत्तरी में गड़बड़ी है ? अगर गड़बड़ी है तो उसकी जाँच वैसे ही होनी चाहिये जैसे लालू यादव परिवार की हो रही है ? और अगर गड़बड़ नहीं है तो अमित शाह जनता में आ कर सफ़ाई दें । इस देश में दो क़ानून नहीं हो सकते ? लालू यादव मायावती के लिये अलग और अमित शाह के लिये अलग । दो, ये बात भी लगती है कि अमित शाह ताक़तवर है और कोई मीडिया उनसे पंगा नहीं ले सकता तो फिर अख़बार ये कह दे कि वो डरपोक हैं और सरकार के दबाव में हैं और भारत में प्रेस की स्वतंत्रता एक सफ़ेद झूठ हैं । डरपोक मीडिया लोकतंत्र के लिये घातक है ।

(पूर्व वरिष्ठ पत्रकार व् ibn7 के संपादक रह चुके आशुतोष शर्मा जी की एफबी वॉल से) 

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