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अध्यक्ष की मनमानी आधा दर्जन से अधिक पत्रकारो ने दिया संगठन से सामूहिक इस्तीफा

अध्यक्ष की मनमानी से क्षुब्ध होकर आधा दर्जन से अधिक पत्रकारो ने दिया संगठन से सामूहिक इस्तीफा, व्यथित हुये समर्पित पत्रकारो का सच अन्तरमन की पीड़ा

*पडरौना, कुशीनगर। जनपद के ग्रामीण पत्रकार एसोसियेशन उ0प्र0 जनपद इकाई कुशीनगर के अध्यक्ष ओमप्रकाश द्विवेदी के मनमानी रवैये एवं पत्रकार विरोधी कार्यो मे लिप्त होने के कारण 28 अगस्त को बद्री नारायण महाविद्यालय गायघाट मे आयोजित रही जिला कार्यकारणी, ब्लाक, तहसील पदाधिकारियो की बैठक के बाद लगभग आठ पत्रकारो ने घनश्याम प्रसाद ‘‘सागर’’ जिला सूचना प्रसारण मंत्री के नेतृत्व मे सामूहिक रूप से लिखित रूप मे अपने पद से त्याग पत्र दे दिया।

बताते चले कि जिला, तहसील, ब्लाक पदाधिकारियो के चुनाव के बाद से ही कुछ समर्पित संगठन के पदाधिकारी संगठन एवं पत्रकार हित मे दिन रात काम कर रहे थे संगठन को मजबूत बना रहे थे जिससे कुपित होकर जिलाध्यक्ष द्वारा बार-बार हर कार्यो मे भारी असहयोग करते हुये कार्य करने वाले पदाधिकारियो को  बेइज्जत करना, दबाव मे लाना, हतोत्साहित करना, उनके खिलाफ लोगो मे भ्रम फैलाना, उत्पीड़न करना इत्यादि कार्य शामिल रहे। हद तो तब हो गयी जब 30 जून को ग्रामीण अंचल के छोटी गंडक नदी के तट पर स्थित रगड़गंज गांव मे भव्य सम्मान समारोह एवं वर्तमान हिन्दी पत्रकारिता का महत्व ‘‘गोष्ठी’’ के कार्यक्रम मे भारी असहयोग किया गया और बार-बार कहा जाता था कि कार्यक्रम छोटा करो इतना बड़ा करने की क्या जरूरत है यह कार्यक्रम गांव मे क्यो करवा रहे हो। हाटा व कप्तानगंज तहसील इकाई के लोगो को कार्यक्रम मे सहयोग करने से मना कर दिया गया। जबकि कार्यक्रम ऐतिहासिक रहा, 70 लोगो को सम्मानित किया गया, 30 लोगो मे प्रमाण पत्र बांटा गया, दो विधायक के साथ तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहे कार्यक्रम का काफी प्रचार प्रसार हुआ, आठ टीवी चैनलो पर चला, चहुओर कार्यक्रम की काफी प्रशंसा हुयी। प्रमाण के रूप मे सीडी व पेन्ड्राईव मे कार्यक्रम की फिल्म सुरक्षित है जिनको आवश्यकता है चाहे तो लेकर देख सकते है। पिछले साल किसान इंन्टर कालेज मथौली बाजार मे बृहद रूप से 30 मई 2016 को हिन्दी पत्रकारिता दिवस का भव्य आयोजन किया गया जिसमे 45 लोगो को सम्मानित किया गया और लगभग एक दर्जना लोगोे को प्रमाण पत्र दिया गया। कार्यक्रम मे गोरखपुर महानगर मेयर, क्षेत्रीय विधायक, एसपी, जाने माने हिन्दी के विद्वान डा0 अरूणेश निरन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। 

पत्रकारो के हित की लड़ाई के लिए केवल व्हाटसाप पर बड़ी बड़ी बाते लिखी जाती रही पीड़ित पत्रकारो के लिए संघर्ष को कोई आगे नही आ रहा था जिससे समर्पित पत्रकारो ने मन बनाया कि अब अपनी लड़ाई अपने तरीके से लड़ी जायेगी जिसका जीता जागता उदाहरण 18 अगस्त 2017 को समय दिन के 11 बजे से कप्तानगंज तहसील परिसर मे 11 सुत्रीय मांगो सहित घेरा डालो डेरा डालो आन्दोलन के नाम से लड़ाई शुरू की गयी जो लड़ाई 58 घंटे तक अनवरत जारी रही और दम के साथ लड़ी गयी प्रशासन के दांत खट्टे हो गये। एसडीएम के लिखित आश्वासन व क्षेत्रीय विधायक के पहल पर समाप्त की गयी। तमाम बिन्दुअबो पर त्वरित कार्यवाही की गयी, जांच रिपोर्ट मंगवायी गयी, कुछ की गिरफ्तारी की गयी यह रहा लड़ाई का प्रतिफल परन्तु दुख वहां हुआ जब जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश द्विवेदी पडरौना से चलकर 20 तारीख को दिन के तकरीबन 11 बजे कप्तानगंज डाक बंगले मे पहुचे जिसकी सूचना आन्दोलकारी पत्रकारो को नही थी न ही अध्यक्ष जी द्वारा कोई सूचना दी गयी 01 बजे के तकरीबन तहसीलदार से कहे मै सेतू का काम करने आया हूं, अपना नारा लगवाकर, फोटो खिंचवाकर चलता बने। इनके द्वारा आन्दोलनकारी पत्रकारो के आन्दोलन, व्यथा आदि से कोई सरोकार नही रहा जिसको लेकर आन्दोलनकारी पत्रकारो मे उबाल आ गया। इनके द्वारा फोन पर कुछ गलत शब्दो का इस्तेमाल किया गया इनको ग्रामीण अंचल के पत्रकारो की समस्याओ से कोई लेना देना नही है यह कुल मिलाकर ग्रामीण पत्रकारो की बात केवल कथनी के द्वारा की जाती है उसी दिन तमाम पत्रकारो ने दुखी और व्यथित होकर सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि उक्त संगठन से हम इस्तिफा देंगे जिसको अध्यक्ष जी द्वारा 21 अगस्त को व्हाटसाप पर चलाया गया पुनः सामूहिक रूप से इस्तिफा देने के बाद भी अनुशासनहिनता का बनावटी आरोप लगाकर निस्कासन की बात व्हाटसप पर चलायी गयी जो काफी दुखद, भ्रामक, तथ्यहिन, प्रतिष्ठा को धुमिल करने का कुचक्र रचकर हिटलर की भूमिका अदा की गयी है जबकि अध्यक्ष जी द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण लेना चाहिए जो संगठन के संविधान के अनुरूप है। गुण दोष के आधार पर संगठन के पदाधिकारियो के निष्कासन प्रकरण पर कार्यवाही होने चाहिए ऐसा न होना संगठन के लिए काफी दुर्भाग्यपुर्ण है। उक्त संगठन को ग्रामीण पत्रकारो के हितो से कुछ लेना देना नही है उक्त संगठन मे हिप्पी संस्कृति हाबी है किसी के भी प्रतिष्ठा को धुमिल करने का हक किसी को नही है जबकि लिखित रूप से  सामूहिक इस्तीफा दे दिया गया तो उस प्रकरण को व्हाटसाप पर जिलाध्यक्ष द्वारा चलाया जाना क्या सिद्व करता है उक्त संगठन नेताओ का संगठन नही है, पत्रकारो का संगठन है जो बुद्वजीवी कहे जाते है। सौभाग्य यह भी है कि जिलाध्यक्ष महोदय इंटर कालेज के प्रवक्ता भी रहे जो कि विद्वान की श्रेणी मे आते है ऐसे मे इनके द्वारा इस तरह का कार्य क्या दर्शाता है सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। संगठन कुछ गिने चुने लोगो का जागिर बन गया है जो संगठनहित मे कोई कार्य नही करते और संगठन मे रहकर सकुनी की भूमिका अदा करते हुये मठाधीश बने हुये है और आये दिन जिलाध्यक्ष के खिलाफ भी सार्वजनिक जगहो पर अनाप सनाप बयानबाजी करते रहते है जो अध्यक्ष जी के काफी करीबी और खास है। 

*हमे डर नही दुर्जनो की दुर्जन्ता से।*

*हमे तो डर है यहां सज्जनो की सज्जन्ता से।*

*सच कहना अगर बगावत है, तो समझो हम भी बागी है।*

*टहनियो पर टिके हुये लोग, सुविधा शुल्क पर बिके हुये लोग।*

*गमले मे रहकर, बरगद की बात करते है।।*

*जय हिन्द,, जय पत्रकार,, जय पत्रकारिता।।*