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राजस्थान

आनंद पाल सिंह एनकाउंटर मामले में पत्रकार के पीछे पड़ी राजस्थान की पुलिस

देश के जाने माने दैनिक भास्कर को कौन नहीं जानता  नई दिल्ली भास्कर में कार्यरत राजस्थान ब्यूरो चीफ श्रवणसिंह राठौर  इन दिनों बड़े ही बुरे दौर से गुजर रहे है आपने हाल ही में हुए आनंद पाल सिंह एनकाउंटर का नाम तो सूना ही होगा श्रवणसिंह राठौर इस आनंद पाल सिंह एनकाउंटर की जांच पड़ताल करने राजस्थान क्या चले गये उनके पीछे राजस्थान की पुलिस ही पीछे पड़ गई ब्यूरो चीफ श्रवणसिंह राठौर की चप्पे चप्पे पर नजर रखी जा रही है यहाँ तक की ब्यूरो चीफ श्रवणसिंह राठौर का मोबाईल भी राजस्थान पुलिस ने सर्विलांस पर लगा रखा है राजस्थान पुलिस को डर है की ये पत्रकार आनंद पाल सिंह एनकाउंटर का पूरा का पूरा सच न निकाल पाए और पूरा का पूरा मामला अखवार की सुर्खिया न बनकर जनता तक न पहुँच जाए ये पहला मामला नहीं हे की पुलिस ने ऐसे एनकाउंटर किये हो आपको बता दे की उत्तराखंड का चर्चित रणबीर एनकाउंटर पूरा फर्जी था जिसमे एसओ समेत 16 पुलिस वाले जेल जा चुके है हाल ही में मुरादनगर की कोर्ट ने भी 4 फर्जी एनकाउंटर मामले में डी एसपी सहित 4 पुलिस वालो को जुर्माने के साथ साथ उम्रकैद की सजा सुनाई थी आनंद पाल सिंह एनकाउंटर अगर फर्जी नहीं हे तो आखिर क्यों राजस्थान पुलिस सामने नहीं आ रही कही ऐसा तो नहीं की सच्चाई सामने आते ही राजस्थान के कई बड़े सफेदपोश नेता व् मंत्री नप सकते है आनंद पाल सिंह एनकाउंटर मामला तूल पकड़ता जा रहा है इस मामले में राजस्थान के कई शहरो में आंदोलन चल रहा है यहाँ तक की इस आंदोलन में एक युवा पुलिस की गोली का शिकार भी हो गया है और दुसरा अपनी जिंदगी और मौत की जंग जयपुर के अस्पताल एसएम्एस में लड़ रहा है 

आनंद पाल सिंह एनकाउंटर के पुरे प्रकरण पर ब्यूरो चीफ श्रवणसिंह राठौर ने फेसबुक पर जो लिखा हे उसे आप भी पढ़े 

मालासर। चूरू। आनंद पाल सिंह एनकाउंटर केस की जांच करना चाहता हूं। लेकिन शाम को मेरे आते ही पुलिस लोकेशन ट्रेस करके वहां पहुंच ग ई। मैंने अपना पीआईबी कार्ड दिखाकर पूरा परिचय दिया। आने का उद्देश्य बताया। पुलिस के एडीजी पीके सिंह जी को फोन किया। सूचना दी। मेरे आफिस में बताया। उसके बाद लगातार लोकेशन ट्रेस करके पुलिस मेरा पीछा कर रही हैं। परेशान कर रही हैं। मैं वहीं हूं। एस आई रविन्द्र जी पूरी टीम के साथ मेरे को घेरकर बैठे थे। मुझे जांच करने नहीं दे रहे हैं। सबको ध्यान रहे। 

 (दैनिक भास्कर के ब्यूरो चीफ श्रवणसिंह राठौर जी की एफबी वॉल से)

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: उसे ही मिलेगा मजीठिया वेजबोर्ड, जो लेबर कोर्ट में लड़ेगा

जयपुर। मजीठिया वेजबोर्ड लागू नहीं करने पर दायर अवमानना याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने आज सोमवार को फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश रंजन गोगोई व जस्टिस नवीन सिन्हा की खंडपीठ ने दोपहर तीन बजे यह फैसला सुनाते हुए कहा कि वेजबोर्ड से संबंधित मैटर संबंधित लेबर कोर्टों में सुने जाएंगे।

वेजबोर्ड में बन रहा पत्रकारों व गैर पत्रकारों का एरियर समेत व अन्य वेतन भत्ते संबंधित लेबर कोर्ट या अन्य कोर्ट में ही तय किए जाएं। संबंधित कोर्ट इन पर त्वरित फैसला करें। वेज बोर्ड में सबसे विवादित बिंदू 20-जे के संबंध में कोर्ट ने कहा कि 20-जे को लेकर एक्ट में कोई विशेष प्रावधान नहीं है। इसलिए इसका फैसला भी संबंधित कोर्ट ही तय करेगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि अवार्ड को गलत समझने के चलते मीडिया संस्थानों पर कंटेम्प्ट नहीं बनती। अवमानना याचिकाओं में दायर ट्रांसफर, टर्मिनेशन व अन्य प्रताडऩाओं के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने कोई निर्देश नहीं दिए। सुप्रीम कोर्ट के 36 पेजों में दिए गए फैसले से साफ है कि कोर्ट ने मीडिया संस्थानों के खिलाफ कटेम्प्ट को नहीं माना लेकिन साफ कहा भी है कि कर्मचारियों को वेजबोर्ड दिया और वेजबोर्ड से संबंधित एरियर वेतन भत्ते कर्मचारियों की प्रताडऩा आदि से संबंधित मामलों की जिम्मेदारी लेबर कोर्ट पर डाली है। अब लेबर कोर्ट ही पत्रकारों व गैर पत्रकारों के मामले में फैसला देगा। इससे स्पष्ट है कि जिसे वेजबोर्ड चाहिए उसे लेबर कोर्ट ही जाना ही होगा।

गौरतलब है कि करीब ढाई साल से वेजबोर्ड के लिए देश के हजारों पत्रकार व गैर पत्रकार सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड की सिफ ारिशों को लागू नहीं करने पर देश के नामचीन मीडिया संस्थान राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, जागरण, अमर उजाला, पंजाब केसरी समेत कई मीडिया संस्थानों के खिलाफ पत्रकारों व गैर पत्रकारों ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका लगाई। दो साल सुनवाई के बाद पिछले महीने कोटज़् ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। पत्रकारों की ओर से सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंजालविस, परमानन्द पांडे ने पैरवी की, वहीं मीडिया संस्थानों की तरफ से देश के नामचीन वकील मौजूद रहे।

– यह है मजीठिया वेजबोर्ड प्रकरण

सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में 7 फरवरी, 2014 को मजीठिया वेतन आयोग की सिफ सिफारिशों के अनुरुप पत्रकारों व गैर पत्रकार कमिज़्यों को वेतनमान, एरियर समेत अन्य वेतन परिलाभ देने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुरुप नवम्बर 2011 से एरियर और अन्य वेतन परिलाभ देने के आदेश दिए हैं, लेकिन समानता, अन्याय के खिलाफ लडऩे, सच्चाई और ईमानदारी का दंभ भरने वाले राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, दैनिक नवज्योति, महानगर टाइम्स, राष्ट्रदूत, ईवनिंग पोस्ट, ईवनिंग प्लस, समाचार जगत, सांध्य ज्योति दपज़्ण आदि कई दैनिक समाचार पत्र है, जिन्होने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना नहीं की। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उडाते हुए राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर जैसे बड़े समाचार पत्रों में तो वहां के प्रबंधन ने मानवीय पहलु और कानूनों को ताक में रखकर अपने कर्मचारियों से जबरन हस्ताक्षर करवा लिए, ताकि उन्हें मजीठिया वेजबोर्ड के तहत वेतन परिलाभ नहीं दे पाए। हस्ताक्षर नहीं करने वाले कर्मचारियों को स्थानांतरण करके प्रताडि़त किया गया। सैकड़ों पत्रकारों व गैर पत्रकारों के दूरस्थ क्षेत्रों में तबादले कर दिए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों, श्रम विभाग और सूचना व जन सम्पर्क निदेशालयों को मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने के लिए जिम्मेदारी तय की है, लेकिन इन्होंने कोई पालना नहीं करवाई। जबकि मजीठिया वेजबोर्ड बनने के साथ ही केन्द्र सरकार ने समाचार-पत्रों पर वेतन-भत्तों का बोझ नहीं पड़े, इसके लिए विज्ञापन दरों में बढ़ोतरी समेत कई अन्य रियायतें प्रदान कर दी थी। वषज़् 2008 से देश-प्रदेश के समाचार पत्रों में सरकारी विज्ञापन बढ़ी दरों पर आ रहे हैं और दूसरी रियायतें भीक्यू उठा रहे हैं।

छह साल में विज्ञापनों से समाचार-पत्रों ने करोड़ों-अरबों रुपए कमाए, लेकिन इसके बावजूद समाचार-पत्र प्रबंधन अपने कमज़्चारियों को मजीठिया वेजबोर्ड के तहत वेतन परिलाभ नहीं दे रहे हैं। जब आदेशों की पालना नहीं हुई तो देश भर के पत्रकारों व गैर पत्रकारों ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिकाएं लगाकर मीडिया संस्थानों के खिलाफ मोर्चा खोला। यूपी, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, छत्तीसगढ़, बिहार आदि राज्यों से सवाज़्धिक अवमानना याचिकाएं लगी।

सुप्रीम कोर्ट के आज के आदेशनुसार... 

1. सभी अखबारों के लिए मजीठिया लागू करना जरूरी। 

2. धारा 20-j खारिज

3. जो जो लोग भी मजीठिया लेना चाहते है उन सभी को लेबर कोर्ट में अप्लाई करना होगा। 

4. मजीठिया के लिए स्थाई और ठेके पर रखे गए लोग सभी हकदार है.

5. एरियर की गणना लेबर कोर्ट करेगा। 

6. टर्मिनेशन और ट्रांसफर के केस भी केस टू केस लेबर कोर्ट ही सुनेगा। 

7. मजीठिया वेज बोर्ड को सही तरह से नही समझ पाने के कारण मालिको पर अवमानना नहीं होती है। 

8. लेबर कोर्ट के लिए कोई समय सीमा तय नहीं.

9. सभी राज्य सरकारों और लेबर कोर्ट को मजीठिया लागू करने के  निर्देश। 

10. लेबर कोर्ट से RC कटवानी होगी।

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चार फर्जी पत्रकारों को पुलिस ने दबोचा

चार फर्जी पत्रकारों को पुलिस ने दबोचा, होटल में जाकर मालिक को धमकाकर करते थे ठगी
जयपुर। सिंन्धी कैंप थाना पुलिस ने शुक्रवार को होटलों में जाकर होटल मालिक को धमकाकर रुपए ठगने वाले चार फर्जी पत्रकारों को गिरफ्तार किया है।पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी अबरार अहमद (21) निवासी ब्रह्मपुरी, रहजान (40) निवासी ब्रह्मपुरी , वकील बाबू (24) निवासी भट्टा बस्ती और एक महिला शमशाद (39) निवासी सुभाष चौक है। पुलिस ने बताया कि सभी आरोपी कुछ दिनों पहले थाना इलाके में स्थित ममता होटल के मालिक मुरारी लाल को होटल मेें गलत काम होने की धमकी देकर पैसे वसूल रहे थे। पिछले दिनों इन्होने होटल मैनेजर से करीब तीस हजार रुपए लेकर गए थे। जिसके बाद फिर इन्होंने होटल जाकर धमकाकर रुपए की मांग की । जिसके चलते होटल मालिक ने पुलिस को सूचित कर दिया। जहां पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से कुछ चैनल सहित अखबारों की आईडी बरामद की गई है।
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दैनिक अखबार के फोटो ग्राफर वरिष्ठ पत्रकार गोपाल संगर का निधन

जयपुर के  अखबार के वरिष्ठ पत्रकार गोपाल संगर का निधन हो गया है और वह कई  दिनों से महात्मा गाँधी अस्पताल में भर्ती थे उनके शरीर को उनके निवास पर लाया गया है और उसके बाद उनका अंतिम संस्कार शिप्रा पथ मानसरोवर जयपुर श्मशान घाट पर किया गया और दैनिक अखबार नवज्योति के पत्रकार एल एल शर्मा उनके अंतिम संस्कार में पंहुचे और पत्रकार गोपाल संगर को श्रद्धांजलि दी और कहा की वरिष्ठ पत्रकार को हमेशा याद किया जायेगा 

सांध्य दैनिक साक्षी न्यूज पेपर के कार्यालय को जबरन करवाया ख़ाली

कोटा। सांध्य दैनिक आपका साक्षी न्यूज पेपर के कार्यालय को आज मंगलवार दोपहर पुलिस प्रशासन ने बर्बरता पूर्ण की कायवाही। अदालत की नोटिस थमाकर समस्त ऑफिस को जबरन करवाया ख़ाली, न्युज पेपर पटके सड़कों पर, जिसका तमाशबीन पुरा शहर व आलाअधिकारी बने, भारतीय संविधान के चौथे स्तम्भ पर जिस प्रकार ज्यातती की जा रही है ये निन्दनीय है। नयापुरा स्थित रतन कचौरी भण्डार एवं प्रशासन व भूमाफ़ियाओं की मिलिभगत के चलते न्यूज पेपर कायालयं को जबरन ख़ाली करवाया गया। राजस्थान के समस्त मीडिया संगठनों ने इस कायवाही को पुलिस व कानून का पत्रकारिता की क़लम पर अकूशं लगाने व लापरवाही प्रशासन की निन्दा की है। प्रशासन अपनी हरकतों से बाज़ नही आया तो जल्द मीडियाकमीं आन्दोलन करेगे।

 

 

(कोटा से एक पत्रकार भाई की रिपोर्ट)