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"प्रभात खबर" के सम्पादक पर एक पाठक ने उठाये सवाल

29-01-2018 19:20:11 पब्लिश - एडमिन


देवधर में फिल्म पदमावत के विरोध में निकाले गये मशाल जुलूस के दौरान कवरेज को गये अपने प्रेस फोटोग्राफर की भाजपा के पूर्व विधायक को पीटे जाने की खबर तक को न छापने वाले ‘प्रभात खबर’ को एक सुधि पाठक ने चिठठी लिख कर ‘प्रभात खबर’ की पत्रकारिता की विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस अखबार के पाठक ने सम्पादक से ऐसे ऐसे सवाल पूछे हैं कि अखबार की विश्वसनीयता कटघरे में खड़ी नजर आ रही है। उक्त पाठक ने प्रभात खबर पर सच्ची पत्रकारिता का रास्ता त्याग कर चाटुकारिता के मार्ग पर चलने का आरोप लगा दिया है।

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इस पाठक ने प्रभात खबर के एडिटर से झारखंड के कृषिमंत्री रंधीर सिंह पर उन्हीं की विधानसभा क्षेत्र के मुखिया ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर गालियां देने के खिलाफ पुलिस को तहरीर देने का समाचार प्रभात खबर में नहीं छपा जबकि संवाददाता ने भेजा  था। मंत्री देर रात प्रभात खबर के कार्यालय पहुंचे जिसके बाद खबर को रददी की टोकरी में डाल दिया गया। पाठक पूछता हैं कि मंत्री से मिलने के बाद ऐसा क्या हुआ कि खबर को रोक दिया गया। इस पाठक ने अपने पत्र में दुरंतो एक्सप्रेस के जसीडीह से चलने को लेकर भ्रामक खबर प्रकाशित करने पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया है। पाठक के अनुसार किसी भी टेªन के चलने न चलने की जानकारी रेलवे द्वारा दी जाती है लेकिन प्रभात खबर एक बड़बोले जनप्रतिनिधि को खुश करने के लिए लगातार दुरंतों के जसीडीह से होकर चलने की खबर छापता रहा। पाठक ने पूछा है किक झारखंड के एक मंत्री के निजी सेना बनाने के आरोप का समाचार भी प्रभात खबर में नहीं छपा। पाठक महोदय व्यंग्य करते हुए लिखते हैं कि दैनिक प्रभात खबर पर बड़बोले नेता को खुश करने का ऐसा नशा सवार है कि अखबार ने सूखी जमीन पर नहर बनाते हुए किसानों के चेहरों पर मुस्कान लाने की खबर छाप दी। इस फर्जी खबर से नाराज होकर गांव के लोगों ने अखबार की कापियां फूंकते हुए सम्पादक के खिलाफ नारेबाजी की लेकिन नेता की अंधभक्ति में अखबार के सम्पादक महोदय ने गांववासियों को हिकारत की नजर से देखा। इसी पाठक ने प्रभात अखबार के सम्पादक से यह सवाल किया है कि जब एक जाने माने भजन सिंगर ने प्रभात खबर के कार्यालय से आने का आग्रह अस्वीकार कर दिया तो उससे सम्बन्धित खबर को नजर अन्दाज 
कर दिया गया। पाठक ने खुले तौर पर लिखा है कि प्रभात खबर वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश के आदर्शों पर चलने वाला प्रतिष्ठित समाचार पत्र रहा है। किसी नेता की चाकरी करना सरल मार्ग है किन्तु कठिन होता है पत्रकारिता धर्म की रक्षा। 
 

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