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पत्रकारिता जुनून है केवल नौकरी नहींःअजय

20-03-2018 14:11:53 पब्लिश - एडमिन


नोएडा। बगैर जज्बे के पत्रकारिता मुमकिन नहीं है। पत्रकार होना केवल नौकरी नहीं बल्कि यह एक ऐसा जुनून है। पत्रकारिता में संतुलन जरूरी है। मीडिया संगठन नैतिकता के चलते विचारधारा को स्पष्ट नहीं कर पाते जिससे लोग भ्रमित होते हैं। जरूरत इस बात की है कि पत्रकार अपने धर्म को समझे और निभायें।
यह बात वरिष्ठ पत्रकार और ‘न्यूज नेशन’ ग्रुप के मैनेजिंग एडिटर अजय कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के नोएडा कैम्पस में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही। वरिष्ट पत्रकार अजय कुमार ने ‘वर्तमान परिवेश में टीवी पत्रकारिता की विश्वसनीयता’ विषय पर बोलते हुए कहा कि पत्रकार जनता और शासन के बीच सेतु है जिसकी जरूरत समाज को भी है और सरकार को भी। इसकी अहमियत कभी खत्म नहीं होगी क्योंकि समाज का विश्वास पत्रकार ही है। अजय कुमार ने मीडिया संस्थानों को अपनी विश्वसनीयता बरकरार रखने की नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अपनी विचारधारा सार्वजनिक कर देनी चाहिए, क्योंकि हम माने न माने लेकिन एक पत्रकार भी आम आदमी की तरह अपनी अलग विचारधारा रखता है जो न चाहते हुए भी उसके काम में उतर जाती है। ऐसे में जब पत्रकार निष्पक्ष होने की कोशिश करता है और अपनी बात सही और दूसरे को गलत ठहराने के लिए खबरे दी जाती हैं तो बहुत जल्द एक्सपोज हो जाता है। फेसबुक, टविटर और ब्लाग का जिक्र करते हुए सीनियर जर्नलिस्ट अजय कुमार ने कहा कि सोशल मीडिया का दौर है जिसमें लोगो की असलियत सामने आ जाती है।लोग आपका पूर्वाग्रह तुरन्त भांप लेते है। इससे बेहतर यही है कि हम अपनी विचारधारा को स्पष्ट कर दे कि हमे कांग्रेस में विश्वास है या वामपंथ विचारधारा मे। हम भाजपाई दृष्टिकोण रखते हैं या फिर झुकाव समाजवाद की तरफ है। इसके बाद जनता स्वयं निर्णय कर लेगी कि उसे कौन सौ न्यूज चैनल देखना हैं। 
उन्होंने कहा कि ऐसा करने से विश्वसनीयता कायम रहेगी। तब न कोई चैनलों को पूर्वाग्रही कहेगा और न  एक्सपोज होने का खतरा होगा। पेड न्यूज को व्यवस्था की देन बताते हुए अजय कुमार ने कहा कि अधिकांश चैनल दूरस्थ इलाकों में स्टिंªगर से खबरे हासिल करते है जिनके लिए वह रात दिन मेहनत करता है लेकिन उसके लिए बहुत कम पैसा दिया जाता है जिससे तेल का खर्च निकलना भी मुश्किल होता है। इन हालतों में वह क्या करेगा। उसे अपने परिवार का भरण पोषण भी करना है। जब स्ंिट्रगर को समुचित पारिश्रामिक नहीं मिलेगा तो न्यूज सोर्स से पैसे लेकर खबरे नहीं देगा तो क्या करेगा। वही पेड न्यूज है।
न्यूज चैनलों के एंकरों की भूमिका पर अजय कुमार ने सीधे सीधे अन्दाज में कहा कि आज जो न्यूज एंकर्स न्यूज चैनल की पहचान बन गये है उसके पीछे प्रतिस्पद्र्धा का दबाव है। हर चैनल की सम्पादकीय टीम पर बाजार की प्रतियोगिता हावी है। वह चाहने के बावजूद अच्छा काम नहीं कर पाते, क्योंकि टीआरपी कायम रहना जरूरी है। उन्होंने माना कि हालांकि कुछ चैनल बदलाव की तरफ बढ़ रहे हैं लेकिन इलेक्ट्रोनिक न्यूज की दुनिया को अपनी आय के स्त्रोत का भी ध्यान रखना है। उन्होंने कहा कि आज जो जर्नलिस्ट दूर से बड़ा ग्लैमराइज्ड नजर आता है वास्तव में वह ईएमआई जर्नलिस्ट है जिसकी हर चीज ईएमआई पर चल रही है।
थ्कसी जमाने में आजक पर मोस्ट वांटेड के जरिये धूम मचाने वाले सीनियर क्राइम जर्नलिस्ट शम्स ताहिर खान ने  ‘‘अपराध पत्रकारिता’ विषय पर कहा कि अपराध पत्रकारिता में पत्रकारिता की वास्तविकता हमेशा मौजूद होती है। डराने धमकाने के बजाय शालीनता से की गयी एंकरिंग की टीवी में जरूरत है। उन्होंने अच्छी समझ और अच्छे लेखन पर जोर देते हुए कहा कि अपराध पत्रकारिता नौकरी भर नहीं बल्कि एक जुनून है जिसमें आने वाले पत्रकारों को हमेशा नित नई चुनौतियां के लिए तैयार रहना चाहिए।


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