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दैनिक जागरण का बिहार संवादी कार्यक्रम खतरे में

21-04-2018 19:15:37 पब्लिश - एडमिन


पटना। दैनिक जागरण के साहित्यक मंच ‘‘बिहार संवादी’’ का आयोजन खतरे में पड़ता नजर आ रहा है। हिन्दी के संवेदनशील लेखकों ने संवादी कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने वाले लेखकों से कार्यक्रम में शिरकत न करने की अपील की है। इस दिशा में शुक्रवार को चलाये गये अभियान का व्यापक प्रभाव हुआ। नामचीन लेखकों कर्मेदु शिशिर, कदन कश्यप, निवेदिता, शकील, राकेश रंजन, आलोक धन्वा, तारानंद वियोगी और ध्रुव गुप्त ने बिहार संवादी कार्यक्रम से किनारा करने का ऐलान किया है। कार्यक्रम 21-22 अप्रैल को होना है। कुछ और लेखकों द्वारा जागरण के कार्यक्रम के बहिष्कार की संभावना व्यक्त की जा रही है। लेखकों की नाराजगी दैनिक जागरण के जम्मू कश्मीर संस्करण में छपी उस खबर को लेकर है जिसमें जागरण ने कठुआ रेप कांड को लेकर फर्जी खबर छापी थी। प्रकाशित खबर को हटाने के लिए अपील हुई जिसके चलते खबर को कभी हटाया गया तो कभी लगाया गया। कभी कहा जाता कि खबर हटा दी गई है तो कभी खबर नजर आती।
जन संस्कृति मंच ने साहित्यकारों, साहित्यप्रेमियों से जागरण के प्रोग्राम के बहिष्कार की अपील की है। कठुआ रेप कांड की देश दुनिया में हो रही चर्चाओं के बीच जागरण ने राजनीतिक पक्षकार बनते हुए समाचार प्रकाशित किया। खबर का शीर्षक था ‘‘कठुआ में बच्ची के साथ नहीं हुआ दुष्कर्म‘। संवदेनशील लेखकों ने इस खबर को पत्रकारिता के नाम पर कलंक करार दिया है। मंच का कहना है कि दैनिक जागरण पूर्व में पत्रकारिता में नैतिकता को ताक पर रखकर सांप्रदायिक उन्माद भड़काने वाले समाचार प्रकाशित करता रहा है। इस वक्त जबकि कुछ दक्षिणपंथी संगठन मानसिक रूप् से तिके लोगों को छोड़कर जब पूरा देश कठुआ रेप की शिकार आसिफा के लिए इंसाफ की गुहार लगा रहा है तो जागरण आरोपियों को बचाने के लिए काम कर रहा है। मंच के अनुसार पत्रकारिता के इतिहास में ऐसी कोई घटना नही होगी जब किसी अखबार ने दृष्कर्म न होने की खबर प्रकाशित करना पत्रकारिता पर कलंक है। मंच का कहना है कि जागरण भी उन्हीं लोगों के साथ खड़ा हो गया है जो दुष्कर्मियों को बचाने की राजनीति कर रहे है। ऐसे अखबार के किसी आयोजन में शामिल होना ठीक नहीं है। साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों सहित समस्त नागरिकों का कर्तव्य है कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता विरोधियों के साझीदार के कार्यक्रम का बहिष्कार करे।  ऐसा करना भविष्य के लिए नितान्त आवश्यक है। मंच के संयोजक राजेश कमल ने कहा कि जागरण ने खानाबदोश समुदाय के विरूद्ध घृणा के चलते कठुआ रेप केस की चार्जशीट को नजर अन्दाज कर कई संस्करणों में कठुआ रेप की खबर को झूठा बताते हुए खबर प्रकाशित की। कमल का कहना है कि जागरण ने समुदाय विशेष की भावनाओं को भड़काने वाला काम किया। मंच संयोजक राजेश ने कहा कि खबर का मकसद लोगों की भावनाएं भड़काकर आरोपियों के पक्ष में माहौल बनाना है। 
वीरू सोनकर ने लिखा है कि भाड में जाये तुम्हारी संवादी। उन्होंने लिखा कि ऐसे भी लेखक हुए है जिन्होंने कभी समझौता नहीं किया भले ही उन्हें रिक्शा चलाना पड़ा हो। अनैतिक कृत्य के पक्ष मे खड़े नहीं हुए और न गंदे हाथों से चेक हासिल किया। न फाइव स्टार होटलों की सुविधा ली और न एयरकंडीशन यात्राएं की। उन्होंने चने चबाकर कविता पाठ किया। वह लोग सत्ता से भिड़े। गरीबी में जीये और तबाह हो गये। अगर आज वह लोग जीवित होते तो देखते कि साहित्य की जिस गंगा को उन्होंने कर्म और तप से शुद्ध किया था उसे चंद लेखक कितना गंदा कर चुके हैं। उन्होंने गहरी नाराजगी का इजहार करते हुए कि कुछ लेखक इतना गिर चुके हैं कि उन्होंने रेपिस्टों के पक्ष में समाचार प्रकाशित करने वालों का आतिथ्य स्वीकार कर लिया। वरिष्ठ भाषाज्ञानी राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने भी जागरण के ‘‘बिहार संवादी’ कार्यक्रम के बहिष्कार की घोषणा की है। उन्होंने अपील की एक दिन का सांकेतिक विरोध प्रदर्शित करने के लिए एक दिन जागरण न खरीदना चाहिए और न पढ़ना चाहिए। उन्होंने अपील की 24 अप्रैल को जागरण का बहिष्कार करे। मीडिया को होश में लाने के लिए यह एक बेहतरीन क्रांन्ति होगी।



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