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बदला ‘‘अमर उजाला’’ का मूड, ‘‘गोदी मीडिया’’ बनने की राह पर

10-02-2018 16:01:07 पब्लिश - एडमिन




बरसों से पाठकों की नजरों में विश्वसनीय पत्रकारिता का पर्याय बने अमर उजाला के बारे मेें धारणा बदलने लगी है। पत्रकारिता के मूल्यों में विश्वास रखने वाले मीडियाकर्मी अमर उजाला को भी ‘‘गोदी मीडिया’’ की संज्ञा देने लगे हैं। लोगों की माने तो जिस अमर उजाला को अतुल माहेश्वरी की दूरदर्शी सोच और सम्पादकीय मूल्यों के प्रति समर्पण ने लोकप्रियता के शिखर तक पहुंचाया था वह अमर उजाला अतुल माहेश्वरी के जाने के बाद चाटुकारों और चापलूसों का केन्द्र बन चुका है। संस्थान से जुडे लोग अब अमर उजाला को महज भीड़ का हिस्सा बनाने पर तुले हैं। चर्चा है कि अब यह लोकप्रिय समाचार पत्र अपनी सम्पादकीय शैली में बदलाव करने जा रहा है बल्कि यह कहना ज्यादा मुनासिब होगा कि सम्पादकीय मूल्यों से समझौता करने का मूड बना चुका है। लोगों का मानना है कि अगर अमर उजाला इस राह पर चलता है तो उसे भविष्य में भारी खामियाजा भुगतना होगा।
देश में एनडीए की सरकार बनने के बाद कई प्रतिष्ठित चैनलों के साथ साथ लोकप्रिय समाचार पत्रों के बारे में भी सत्ता प्रतिष्ठान का प्रवक्ता बनने के आरोप लगने लगे हैं। कुछ न्यूज चैनल और अखबार तो इस निष्पक्षता की कसौटी पर संदिग्ध नजर आने लगे हैं। सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर कुछ न्यूज चैनलों को लेकर पाठकों की प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। अनेक मीडिया संस्थानों को ‘‘गोदी मीडिया’’ कहकर पुकारा जाने लगा है। लोकप्रिय दैनिक अमर उजाला अब तक इससे अछूता था लेकिन हाल ही में कुछ खबरों को लेकर अमर उजाला के भी गोदी मीडिया बनने के पथ पर अग्रसर होने के संकेत मिले हैं। अमर उजाला.डाट.काम तो इस होड़ में बहुत आगे तक जा पहुंचा है। इस अखबार में छप ीवह खबर हटा दी गयी जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दावोस में हुए सम्मेलन में अपने भाषण में छह सौ करोड़ मतदाता बोल गये। उन्होंने यह गलती एक दो बार नहीं बल्कि बार बार की। इस न्यूज को करोड़ो लोगों ने न केवल लाइव देखा बल्कि पढ़ा भी।ह खबर अमर उजाला में भी प्रकाशित हुई। अगले दिन अखबार ने इसे 15 वे पेज पर जगह पर दी। बाद में इस खबर को हटा दिया गया।
निष्पक्ष पत्रकारिता में भरोसा रखने वाले लोगों का कहना है कि लगता है कि अब अमर उजाला को भी शायद पीएम से डर लगने लगा है।

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