मीडिया पर लगाम के फैसले पर बवाल,राजनीतिक दलों व मीडिया जगत ने जताया एतराज

07-01-2018 11:49:29 पब्लिश - एडमिन



देहरादून। राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया को मैनेज करने के आरोपों से घिरी भाजपा की प्रदेश सरकार ने मीडिया की सक्रियता पर लगाम लगाने के लिए सरकारी विभागों के कार्यालयों और सचिवालय में मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। माना जा रहा है कि मीडिया की सक्रियता से फजीहत से बचने के लिए यह तुगलकी फरमान लागू किया है। 
प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने गत 27 दिसम्बर को तीन पेज का आदेश जारी कर सरकारी कार्यालयों में मीडियाकर्मियों के प्रवेश को प्रतिबन्धित कर दिया है। सरकार के इस तुगलकी फरमान का विरोध शुरू हो गया है। सूत्रों की माने तो सरकार के कामकाज को लेकर मीडिया ने जो सक्रियता दिखायी उससे सरकार की फजीहत से हुई। कैबिनेट के कई फैसले और प्रस्ताव पहले से ही लीक हुए जिस कारण सरकार की फजीहत हुई। बताते हैं कि इसी वजह से मीडिया पर अंकुश लगाने का फैसला लिया गया है।गोपनीय सूचनाएं लीक होने का हवाला देकर सरकार ने अपने कदम का बचाव किया है लेकिन मीडिया ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुठाराघात मानते हुए विरोध शुरू कर दिया है। खबरों की तलाश में सचिवालय के गलियारों को नापकर एक्सक्लूसिव पत्रकारिता करने वाले जुझारू पत्रकार सरकार के इस कदम से बेहद हताश बताये जाते हैं।
सरकारी फरमान के मुाबिक सरकारी विभागों के कार्यालयों व शाखाओं में मीडियाकर्मियों का प्रवेश प्रतिबन्धित रहेगा यहीनहीं किसी काम से सरकारी विभागों के कार्यालयों में आने वाले व्यक्ति को कार्यालय परिसर में अधिकारी या अन्य कर्मचारी से मिलने की इजाजत नहीं होगी। आगन्तुक की फरियादसुनने को जरूरी होने पर अफसर खुद रिसेप्शन पर आकर आगन्तुक या मीडियाकर्मी से बातचीत करेंगे। सरकारी फरमान की काॅपी सभी विभागों के अपर/प्रमुख और अन्य सचिवों को भेज दी गई है। दरअसल सरकार कैबिनेट में लिये जाने फैसलों और पेश किये जाने वाले प्रस्तावों के पहले से ही लीक होने को लेकर काफी परेशानी महसूस कर रही थी। सरकारी सूत्रों के अनुूसार फैसलों और प्रस्तावों के पहले से ही लीक होने की सूरत मंे कई बार फैसले प्रभावित होते थे। मंत्रिमंडल ने इस पर आपत्ति जताते हुए र्दुभाग्यपूर्ण करार दिया। कैबिनेट ने सूचनाएं लीक होने के मामलों की छानबीन के लिए सम्बिधित विभाग के अपर अथवा मुख्य सचिव को अधिकृत किया है। प्रभारी को भी सूचनाएं लीक होने की जांच करने का अधिकार दिया गया है।
प्रदेश के मुख्य सचिव ने सात साल पहले 16 अगस्त 2010 को जारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि आईएएस अधिकारियों को मंत्रिमंडल से जुड़े मुददो अथवा एजेंडे को लेकर गोपनीयता बरतने के निर्देश दिये गये थे। मीडिया जगत और सियासी गलियारों में सरकारी फरमान की आलोचना होने के बाद बैकफुट पर आई सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि सरकार की मंशा मीडिया से तथ्यात्मक सूचनाएं साझा करना है, इसी वजह से यह व्यवस्था बनाई गई है।मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्पष्ट किया कि शासन स्तर से प्रतिदिन एक अधिकारी को ब्र्रीफिंग के लिए नियुक्त किया जायेगा जो शाम चार बजे महत्वपूर्ण सूचनाओं की जानकारी देगा। मुख्य सचिव श्री सिंह ने बताया कि व्यवस्था के तहत सरकारी स्तर पर लिए जाने वाले निर्णयो के बारे में मीडियाकर्मियों को अवगत कराया जायेगा।
इस बीच मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते  हुए आरोप लगाया कि जीरो टालरेंस की बात करने वाली प्रदेश सरकार प्रेस की आजादी पर कुठाराघात कर रही है। पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा करते हुए पूछा है कि आखिर सरकार मीडिया से क्या छुपाना चाहती है। मीडियाजगत ने भी सरकार से इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है।

 

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