छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय में प्रतिदिन राष्ट्रगान प्रारम्भ कराने मुख्य न्यायधिश के नाम सौंपा ज्ञापन !

16-11-2017 17:38:44 पब्लिश - एडमिन


बिलासपुर/छत्तीसगढ़🔴*देश के महान स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी बैरिस्टर आधुनिक भारत के निर्माता भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के जन्मदिवस के अवसर पर आज 14 नवम्बर को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर में गांधीवादी नेता गोपाल सिंह जूदेव,पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता भूपेंद्र किशोर वैष्णव ,श्रीमती आरती वैष्णव,श्रीमती पद्मा सिंह जूदेव,श्रीमती सावित्री नायडू,मनीराम राठिया,भानुप्रताप राठिया के साथ एक प्रतिनिधि मंडल श्रीमान रजिस्ट्रार जनरल छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय को छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दयाराम ठेठवार,वरिष्ठ आदिवासी नेता पूर्व लोकनिर्माण मंत्री मप्र शासन,पूर्व खाद्यमंत्री छग शासन , सामाजिक कार्यकर्ता बालकराम पटेल, राधेश्याम शर्मा , डॉ राजू अग्रवाल,सेवा निर्वित्त प्राचार्य व्ही एन मालवीय सहित छत्तीसगढ़ के शताधिक प्रबुद्ध नागरिको के समर्थन युक्त लिखित ज्ञापन सौंपा गया।
मुख्य न्यायधीस छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय के नाम से सम्बोधित उक्त ज्ञापन में लिखा है कि भारत के प्रबुद्ध नागरिकों के द्वारा एक निवेदन प्रस्तुत करते हुए माननीय छग उच्च न्यायालय को भारतीय संविधान का एक अंग बताते हुए देश एवं प्रदेश के करोड़ो भारतीयों के न्याय एवं आशा का प्रतीक बताते हुए उच्च न्यायालय को भारतीय संस्कृति का ध्वजवाहक मानते हुए प्रत्येक कार्यदिवस में प्रातः 10:30 बजे न्यायलयीन कार्यवाही प्रारम्भ करने से सामूहिक रूप से एक प्राँगण या स्थल में समस्त न्यायधीश ,अधिवक्तागण,कर्मचारी व उपस्थित न्यायधीश,अधिवक्तागण,कर्मचारी व उपस्थित नागरिकों द्वारा स्वतः सम्पूर्ण आस्था के साथ राष्ट्रगान का गायन करने या अन्य व्यवस्था के अनुरूप प्रत्येक न्यायलय कक्ष 
में न्यायलयीन कार्य करने से पूर्व निर्धारित समय मे माननीय न्यायालय में उपस्थित अधिवक्तागण ,कर्मचारीगण द्वारा सस्वर राष्ट्रगान करने आदेश पारित करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में यह तर्क दिया गया है कि राष्ट्रगान जन-गण-मन का गायन विद्यालयों में विद्यालय प्रारम्भ होने के प्रारम्भ होने के पूर्व ,सिनेमाघरों में सिनेमा प्रारम्भ होने के पूर्व ,माननीय महामहिम राष्ट्रपति महोदय व महामहिम राज्यपाल महोदय के कार्यक्रमो कार्यक्रमो में प्रारम्भ एवं समापन के अवसरों सहित विभिन्न अवसरों पर राष्ट्रगान का गायन किया जाता है। 
यह भी उल्लेख किया गया है कि संविधान की धारा 51 क के अंतर्गत राष्ट्रगान का सम्मान गाना प्रत्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य है।इसके निर्वहन का सर्वोत्तम तरीका है। इसका सम्मान आधिकारिक अवसर पर गायन किया जाय । यह संविधान आदर्श पूर्णतः तरीके से न्यायलय में गाया जा सकता है एवं यह केंद्र शासन ,गृह मंत्रालय द्वारा जारी निर्देश भाग -3 के उपभाग-3 के अनुरूप है इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए माननीय उच्च न्यायलय नियम व आदेश 2007 को संशोधित राष्ट्रगान का गायन कराने सम्बंधी आदेश पारित करने का निवेदन किया गया है।
उक्त मांग पत्र की गम्भीरता को देखते हुए रजिस्टार जनरल छग उच्च न्यायालय बिलासपुर ने तत्काल उक्त आवेदन को अग्रिम कार्यवाही हेतु प्रसाशकीय समिति के समक्ष प्रस्तुत करने एवं फुलबेंच में विचार हेतु प्रेषित किये जाने की बात कही।
यदि उक्त ज्ञापन पर कार्यवाही किया जाता है एवं प्रति कार्यदिवस राष्ट्रगान गायन प्रारम्भ कराया जाता तो छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय देश का पहला ऐसा न्यायलय बन जायेगा जहाँ प्रतिदिन न्यायालयीन कार्यों की शुरुवात राष्ट्र गान से होगा।