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भारत के पत्रकारों के लिए संजीवनी का काम करेगा सरकार का यह कदम

19-07-2019 17:37:29 पब्लिश - एडमिन



जैसे ही सरकार ने पत्रकारों को शैक्षणिक योग्यता निर्धारण करेगी,और प्रेस पास जारी सरकार का जिला सूचना विभाग जारी करेगा। फौरन पत्रकार श्रम और नियोजन विभाग के उपर मुकदमा दर्ज कराकर सरकारी वेतनमान,भत्ता और आजीवन पेंशन की मांग भी उठायेंगे सरकार का यह कदम भारत के पत्रकारों के लिए संजीवनी का काम करेगा।

दिल्ली। सरकार द्वारा हाल ही इस बात के संकेत मिले है कि अब पत्रकारों को शैक्षणिक योग्यता और बीजे और और डिप्लोमा अनिवार्य होगा यहाँ तक सम्पादकों और मालिकों को भी इस अहर्ताओं का पालन अनिवार्य होगा अब पत्रकार बनाने के लिए सम्पादक जिला मजिस्ट्रेट और जिला सूचना अधिकारी को प्रार्थना पत्र देंगे कि मुझे यहाँ यहाँ प्रतिनिधि पत्रकारों की जरुरत है फिर सूचना अधिकारी जाँच कर उसकी रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट को देगा फिर जिला मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद सम्पादक पत्रकार नियुक्ति कर सकेंगे इसके जिला सूचना विभाग द्वारा उक्त पत्रकार को प्रेस परिचय पत्र और स्टीकर दिये जायेंगे इसका मतलब यह हुआ अब पत्रकार किसी समाचार संस्थान का ब्यक्ति न होकर सीधे तौर पर सरकार द्वारा नियुक्त माना जायेगा और इस तरह वह सरकार से सरकारी वेतनमान, भत्ता और पेंशन का हकदार हो जायेगा अगर सरकार ने पत्रकारों से बिना श्रमिक दिये पत्रकारिता करवाया तो उसके उपर श्रम एवं नियोजन विभाग मे मुकदमा भी दर्ज होगा और पत्रकारों के मानदेय देने के लफडे से समाचार पत्र संस्थान मुक्त हो जायेंगे सरकार का यह कदम भारत के पत्रकारों के लिए संजीवनी बन जायेगा जो कि एक सुखद संयोग होगा।

दिलचस्प यह भी है कि अगर कोई पत्रकार पढ लिख कर ,डिप्लोमा लेकर पत्रकारिता मे उतरेगा तो उसे नियमानुसार वेतना भत्ता पेंशन जरुर चाहिए वह मुफ्त मे काम क्यों करेगा उसके पास भी परिवार व परिजन हैं इसलिए मुफ्त पत्रकारिता का जोखिम पढा लिखा योग्य पत्रकार कदापि नही लेगा भारत के पत्रकारों को सरकार के इस कदम का जल्दी से जल्दी लागू होने का इंतजार करना चाहिए और समय मिलते ही पुरी सरकारी मशीनरी को कोर्ट मे घसीट लेना चाहिए आजाद के बाद पत्रकारों को केवल मौखिक चौथा स्तम्भ बनाकर बिना को ई सुरक्षा सुविधा दिये मुफ्त मे पत्रकारिता करवाने की गंदी प्रवृत्ति पर विराम लग जायेगा देश मे सरकार और पत्रकारों मे एक नये जंग की शुरुआत भी हो जायेगी हालांकि इस जंग मे समाचार संस्थाओं को मुश्किलों के दौर से गुजरना पडेगा और संघर्ष बढने पर देश का सूचना तंत्र भी बुरी तरह प्रभावित होगा अब तक पत्रकार हाई स्कूल, इंटरमीडिएट शिक्षा की योग्यता पर भी सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से समाचारों का संकलन करते सूचना का आदान प्रदान सरकार और आम जनता तक बिना कुछ श्रमिक फल पाये करते रहे हैं आर्थिक रुप से खस्ताहाल समाचार संस्थाओं के लिए विज्ञापन संग्रह कर महज कुछ कमीशन पर समाचार संस्थाओं को जीवित रखे हुए थे योग्य डिप्लोमा धारी पत्रकार किसी कीमत समाचार संस्थाओं के लिए विज्ञापन संग्रह नही करेगा वह साईकिल से मोटरसाइकिल से सुदूर गाँवो से समाचार संकलन भी नही करना चाहेगा क्योंकि उसकी योग्यता इतनी है कि वह अन्य किसी भी विभाग क्लास टू की सरकारी नौकरी कर शानदार जीवन जी सकता है तो वह भटकना क्यों चाहेगा कुल मिलाकर देश मे सरकार के इस कदम से विस्मय मे डालने वाले घटनाएं घटेंगी और पत्रकार और सरकार के साथ मालिकान भी आमने सामने होंगें।

घनश्याम प्रसाद सागर, राष्ट्रीय अध्यक्ष,सर्वहितकारी पत्रकार महासंगठन ।। भारत।। दिल्ली

 


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19-07-2019 22:08:38

काश ऐसा ही हो ! पत्रकारीता आज के दौर में मज़ाक़ बन कर रह गयी है , कम से कम शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण तो होना ही चाहिये। बहुतों की दुकानदारी भी ख़त्म हो जायेगी ।

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Karan Singh Chauhan made a post.
19-07-2019 22:57:04

1 - किसी के पास डिग्री न हो तो... 2- उसको 10 वर्षो से अनुभव हो तो.... 3- उसका नाम जिला सूचना विभाग में दर्ज हो तो... कृपया राय दें धन्यवाद

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Karan Singh Chauhan made a post.
19-07-2019 22:57:06

1 - किसी के पास डिग्री न हो तो... 2- उसको 10 वर्षो से अनुभव हो तो.... 3- उसका नाम जिला सूचना विभाग में दर्ज हो तो... कृपया राय दें धन्यवाद

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Karan Singh Chauhan made a post.
19-07-2019 22:57:06

1 - किसी के पास डिग्री न हो तो... 2- उसको 10 वर्षो से अनुभव हो तो.... 3- उसका नाम जिला सूचना विभाग में दर्ज हो तो... कृपया राय दें धन्यवाद

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20-07-2019 5:54:34

नमस्कार महोदय जी आप ने सही विषय उठाया है क्योंकि एक डिप्लोमा कर के पत्रकार क़भी दूर गांव , गरीब जनता की आवाज़ को नहीं सुन सकता क्योंकि उन्हें तो AC रूम में बैठकर AC गाड़ी में ही चलना है जबकि जबसे डिजिटल इंडिया की घोषणा हुई तब से पोर्टल पर पत्रकारों की बाद सी आ गई औऱ क्योंकि हाई स्कूल या 12th पास घर बैठे ही बिना किसी वेतनमान क़े अपना फ़र्ज निभा लेता है क्योंकि एक तो उस क्षेत्र की जनता की समस्याओं को हुक्मरानों तक पहुंचा ने अपनी जिम्मवारी निभा रहा होता है अगर ग्रामीण क्षेत्रों कोई बडी घटना घटित हो जाये तो, एक बड़ा पत्रकार वहां तक पहुंचने में दो दिन लगा देगा औऱ वह जब तक वह घटना दब चुकी होती , औऱ पोर्टल पत्रकार घटना स्थल पर कुछ ही मिनटों में पहुंच कर अपनी जिम्मवारी निभा रहे हैं , लेक़िन इन्हें न तो सरकार कुछ समझ रही न ही लोकल लोग इन्हें कुछ समझते , इन्हें भी कुछ न कुछ भत्ता की ज़रूरत है।

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अगर ऐसा होता है तो पत्रकारिता का स्तर ऊंचा उठेगा। अपना रोजगार सुरक्षित होने पर पत्रकार देश और समाज के बारे में भी सोचेंगे।