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भारत मे अब तक कोई भी पत्रकार संगठन पत्रकार हितों की रक्षा करने मे तनिक भी समर्थ नही हैं

31-07-2019 12:46:28 पब्लिश - एडमिन



क्योंकि अनेक संगठनों मे शक्तियां बँटी हुयीं हैं

दिल्ली। भारत वर्ष मे आजादी के बाद से ही पत्रकारों का हाल बुरा है आजादी के पुर्व से पत्रकारों का समूह अनेक बहु विचारवादी मानसिकता से ग्रसित हो गया कुछ उत्तरपंथी,कुछ दक्षिण पंथी तो कुछ वामपंथी विचारधारा के साथ पत्रकारिता करने लगे आजादी की लडाई मे पत्रकारों का अंग्रेजी हुकूमत ने ब्यापक नरसंहार भी किया क्योंकि देश मे क्रांतिकारी और देशभक्त आंदोलन करते उसकी खबरों को पत्रकार जंगलों मे अंग्रेजी हुकूमत से छिपकर अखबार निकालते फिर उसे भारतीय जनता मे प्रसार करते जिससे जनजागरण फैलता था अंग्रेजों ने इसे भाँप लिया और सुनियोजित तरीकों से जंगलों मे ही देश के आजादी के लिए काम कर रहे पत्रकारों जिसमे मालिकान, सम्पादक और पत्रकार शामिल थे उनकी नृसंसता पुर्ण हत्या कर गुमनामी की चादरों मे समेट दिया देश आजाद हुआ संविधान सभा बनी लेकिन संविधान सभा ने इस तथ्य को जानते हुए भी पत्रकारों को गुमनाम ही रहने दिया पत्रकारों को कोई भी सुरक्षा,सुविधा नही दिया बेवकूफ बनाने के लिये तत्कालीन संविधान सभा ने मालिकान, सम्पादक और पत्रकार मतलब यह तीनो पत्रकार की श्रेणी मे ही आते हैं इन्हे मौखिक चौथा स्तम्भ कह कर ब्याख्या कर दी इन्हे संविधान मे विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की तरह विधिक लिपिबद्ध स्तम्भ नही बनाया और यह भी कहा अगर पत्रकारों को सभी सुरक्षा, सुविधा और विधिक चौथा स्तंभ घोषित किया गया तो पत्रकार मजबूत हो जायेंगे और राजनेताओं को हर बार हर गलती पर सत्ता से उखाड़ फेकेंगे बेवकूफ बनाने के क्रम मे पत्रकार मे वर्णित मालिकान या सम्पादक को अखबारी कागज और स्याही को सरकारी ब्यवस्था से मुफ्त देने की ब्यवस्था कर दी और समाचार संस्थान अपने अन्य खर्चे के सरकारी विज्ञापन के जरिये पुरा करेंगे लेकिन उसका भी मुल्य निर्धारण अपने अधीन रखा तब से लेकर आज 72 सालों से भारत की पत्रकारिता जुझ रही है जबकि पत्रकार बिना पारिश्रमिक पाये पत्रकारिता करते हैं उनके आश्रित परिजन शिक्षा,स्वास्थ्य एवं अन्य सुविधाओं के अभाव मे दम तोड देते है उससे भी जी नही भरा तो सरकार ने पत्रकारों को तीन श्रेणियों मे उस तरह बाँट दिया जिस तरह राशनकार्ड बनाये जाते हैं अंत्योदय, वीपीएल और साधारण कार्ड मतलब एक सेलेब्रिटीज़ पत्रकार, दुसरा मान्यता प्राप्त और तीसरा बिना पैसे का काम करने वाला जिला व ग्रामीण स्तर पर पत्रकार। आजादी के महज 10 साल बाद ही पत्रकारों को अपनी गलती और अपने हितों की चिंता तब हुयी जब वे सत्य समाचार परोसने के बदले हत्या और उत्पीड़न के शिकार होने लगे सरकारी तंत्र उनकी कोई मदद नही करता किसी भी पत्रकार की नृसंस हत्या पर सरकार, मंत्री या राजनेता संवेदना ब्यक्त नही करता पत्रकारों के वेवा पत्नी व बच्चे निराश्रित होकर भटकने लगे तब उन्हे जरुरत हुयी संगठित होने की लेकिन तब तक देर हो चुकी देश की राजनैतिक दिशा बदल चुकी थी देश मे उत्तरपंथ सत्ता पर हावी था वामपंथ भारत के पूर्वोत्तर मे सत्ता पर हावी था जबकि दक्षिणपंथी सत्ता के लिए संघर्ष कर रहे थे इसलिए पत्रकारों के जो संगठन अस्तित्व मे आये उसमे वामपंथी व उत्तरपंथी पत्रकार संगठनों का उदय हुआ और इस तरह भारत मे अनेक पत्रकार संगठन बने लेकिन सभी अलग अलग विचारधारा के साथ काम करने लगे संगठनों के बनने के बाद भी सरकारी व्यवस्था का कोई भी लाभ इन्हे नही मिल सका सरकारी मशीनरी ने इनका कोई भी सहयोग नही किया सरकार ने कभी भी पत्रकारों का संज्ञान नही लिया और ना ही संविधान मे इन्हे लिपिबद्ध कर विधिक चौथा स्तम्भ बनाकर संविधान के तीनो अंगों के समान सुरक्षा एवं सुविधाओं से लैश ही किया आज भारत मे पत्रकार हत्या व उत्पीड़न के शिकार हैं और नही तो पहले से जुझ रहे पत्रकारों और समाचार संस्थाओं पर सरकारी कैंची चलाकर केवल इन्हे नियंत्रण करने के कानून पास किये जाते हैं विज्ञापन का रेट सरकार तय करेगी,विज्ञापन सभी समाचारपत्र मे अलग अलग मुल्य मे निर्धारित करेगी समाचारपत्र व समाचार एजेंसियों की अलग अलग रेटिंग करेगी पत्रकारों को सरकारी सुविधाएं नही देगी कोई मानदेय या भत्ता नही देगी बडे समाचार समूहों को लालीपाप देकर तोड डालेगी जबकि छोटे मझोले समाचारपत्र व समाचार एजेंसियों को बंद करने पर मजबूर कर देगी कुल मिलाकर आजादी के बाद से ही भारत की पत्रकारिता मृत्युशैया की तरह तेजी से पहुँच रही है जिसको रोकने के सारे उपाय व्यर्थ साबित हो रहे हैं भारत मे लगभग हजारों  के करीब पत्रकार संगठन बने हैं लेकिन सभी अलग अलग विचारधारा व गुट से ग्रसित हैं इसलिए सभी पत्रकार संगठन पत्रकारिता जगत से जुडे अपने हितों को सुरक्षित करने मे अपंग और असमर्थ हैं सर्वहितकारी पत्रकार महासंगठन का राष्ट्रीय स्तर पर संगठन बनाने के पूर्व इन सभी तथ्यों पर शोध किया गया जिनमे यह पाया गया कि जब तक भारत के सभी पत्रकार संगठन एक जगह एकत्र नही होंगें भारत के पत्रकारों, मालिकानो और सम्पादकों की हितों की रक्षा नही हो सकती पत्रकार भटकते रहेंगे हत्या उत्पीडन के साथ सरकार की घोर उदाशीनता के शिकार होते रहेंगे इन्हे एक नेतृत्व, एक महासंगठन और एक आवाज पर एक होकर केवल 24 घंटे के लिए कलम बंद करनी पडेगी,24 घंटे के लिए सभी समाचारपत्र संस्थान,सभी इलेक्ट्रॉनिक और पोर्टल न्यूज को बंद करना पडेगा तब जाकर सरकार की कुम्भकर्णी नीद टूटेगी और तब पत्रकारों को संविधान मे विधिक लिपिवद्धता के साथ चौथा स्तम्भ घोषित कर विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की तरह सभी सरकारी सुविधाएं और सुरक्षा मिल सकेगी अन्यथा पत्रकार व समाचार संस्थान टूटते रहेंगे, विखरते रहेंगे और हत्या व उत्पीडन के शिकार होते रहेंगे।

घनश्याम प्रसाद सागर राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वहितकारी पत्रकार महासंगठन


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