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मजीठियाः श्री अम्बिका प्रिंटर्स को उप सम्पादक भूपेश को देने होंगे 37 लाख 

03-02-2018 19:06:14 पब्लिश - एडमिन



मजीठियाः श्री अम्बिका प्रिंटर्स को उप सम्पादक भूपेश को देने होंगे 37 लाख 
अखबार के प्रबन्धन के उत्पीड़न के खिलाफ मुखर विरोध करने वाले मीडियाकर्मी भूपेश देवप्पा कुंभार का अनवरत संघर्ष आखिरकार रंग लाया। कोल्हापुर स्थानीय कामगार आयुक्त अनिल द.गुरव ने ‘श्री अम्बिका प्रिंटर्स’ कोे नोटिस भेजकर कुंभार को 37,53, 417 रुपये अविलम्ब देने के आदेश दिये हैं। 
स्थानीय सहायक कामगार आयुक्त के नोटिस से श्री अम्बिका प्रिंटर्स में खलबली मचने की खबर है। गौरतलब है कि श्री अम्बिका पिटंर्स न केवल मराठी अखबारों का प्रकाशन करती है बल्कि हिन्दी और कर्नाटक भाषा के भी अखबारों का प्रकाशन भी करती है। मराठी समाचार पत्र ‘पुण्यनगरी’ में बतौर उप सम्पादक कार्यरत भूपेश देवप्पा कुंभार (50) का अखबार प्रबन्धन ने एक दिन अचानक कोल्हापुर से बेलगांव में तबादला कर दिया जिसे भूपेश ने कोल्हापुर स्थित इंडस्ट्रियल कोर्ट में चुनौती दी। केस अभी विचाराधीन है। इसी बीच भूपेश ने कम्पनी  से मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुरूप अपने वेतन एवं अन्य बकाये की मांग कर दी। भूपेश के इस रवैये से अखबार प्रबन्धन सख्त नाराज हुआ और पहले तो भूपेश का वेतन रोक दिया, उसके बाद कार्यालय में प्रवेश प्रतिबन्धित कर दिया। बरसों तक पत्रकारिता करने वाले भूपेश की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गयी। बच्चों की पढ़ाई पूरी कराने के लिए उन्हें अपना मकान बेचना पड़ा। रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए उन्होंने मिटटी के दीपक तक बेचने पड़े। कानूनी लड़ाई जीतने वाले भूपेश ने कहा  िकवह बेहद भाग्यशाली है जो उन्हें मंजुला जैसी जीवनसंगिनी मिली जिसने कदम कदम पर उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य देखते हुए विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मनोबल बरकरार रखा। भूपेश को बड़ा पुत्र दिवाकार एमएससी के साथ बीएड कर चुका है जबकि छोटा बेटा श्रीमय बीए सेकंड ईयर का छात्र है।
भूपेश मीडियाजगत में संघर्ष से घबराकर घुटने टेकने वालों के लिए एक आदर्श और प्रेरणास्त्रोत बनकर उभरे हैं। भूपेश की किस्मत अच्छी रही कि मुम्बई के उन तमाम मीडियाकर्मियों ने उनका साथ दिया जो मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुरूप वेतन और बकाया भुगतान की लड़ाई लड़ रहे है। एनयूजे (महाराष्ट्र) की महासचिव शीतल करदेकर ने खुलकर भूपेश का सहयोग किया। उधर सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता उमेश शर्मा ने भी भूपेश का मनोबल बढ़ाया और सही सलाह देते हुए लड़ाई को जारी रखा। अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले मित्रों/शुभचिन्तकों के साथ निभाने, एनयूजे की शीतल की हौंसला अफजाई और अधिवक्ता उमेश शर्मा के निर्देशन का सुखद परिणाम यह सामने आया कि भूपेश अपनी जंग जीत गये। स्थानीय सहायक कामगार आयुक्त के आदेश ने प्रबन्धन के उत्पीड़न के आगे असहाय होकर बैठे मीडियाकर्मियों के मन में आस की अलख जगा दी है। 
इस बीच अखबार प्रबन्धन के संभावित कदमों के मददेनजर भूपेश ने अधिवक्ता की मदद से मुम्बई उच्च न्यायालय में कैविएट दाखिल कर दी है।  

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