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उत्तराखंड के सीएम आफिस में 23 हजार रुपये रोजाना का चाय-नाश्ता

12-02-2018 17:58:32 पब्लिश - एडमिन



देहरादून। सूबे के चंहुमुखी और समग्र विकास के दावे के साथ पदारूढ़ हुई डबल इंजिन सरकार विकास कार्यो के नाम पर भले ही पैसेंजर टेªन की गति स ेचल रही हो लेकिन खर्च के नाम पर मैट्रो ट्रेन जैसी स्पीड है। चाय-स्नैक्स पर लाखों का खर्च दर्शाता है कि फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने के दावे हवा-हवाई है।
सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी में चैंकाने वाला सच सामने आया है। दस महीने पुरानी सरकार के मुखिया के कार्यालय चाय-स्नैक्स का प्रतिमाह का खर्च तकरीबन 6.80 लाख है यानि 23 हजार रूपये रोजाना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राज्य की जनता से केन्द्र में भाजपा की सरकार होने के तर्क के साथ राज्य में भाजपा की सरकार बनाने की अपील की गयी थी ताकि केन्द्र व राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने से सरकार डबल इंजिन गाड़ी की गति से दौड़े। दस माह का आंकलन पर विकास की पटरी पर डबल इंजिन सरकार पैसेंजर टेªन की गति से चलती दिख रही है जबकि जीरो टालरेंस की नीति भी दम तोड़ती दिखायी दे रही है लेकिन दावे बदस्तूर जारी है। न फिजूलखर्ची पर अंकुश लगा है न अधिकारियों पर जीरो टालरेंस की नीति का असर नजर आ रहा है।
ताजा मामला नैनीताल निवासी एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा सीएम आफिस के बारे में मांगी गई सूचना से सम्बन्धित है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से खुलासा हुआ कि शपथ ग्रहण के बाद से गत 22 जनवरी 2018 तक यानि लगभग 10 महीनों में सीएम के कार्यालय में 68 लाख 59 हजार 865 /रुपये चाय और स्नैक्स पर खर्च हो चुके हैं अर्थात मुख्यमंत्री कार्यालय का चाय-स्नैक्स का प्रतिमाह खर्च करीब 6 लाख 80 हजार यानि तकरीबन 23 हजार रुपये प्रतिदिन है। एक ओर जहां बजट न होने की बात कहकर नई भर्तियों से कतराया जा रहा है, कुछ विभाग के कर्मचारी वेतन से तरस रहे हैं वहीं अकेले सीएम आफिस का चाय नाश्ते का खर्च ही सरकार की फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने के दावे पर प्रश्नचिन्ह लगाता प्रतीत हो रहा है। सहज ही कल्पना की जा सकती है कि जब मुखिया के कार्यालय में चाय नाश्ते पर 6.80 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च हो रहे हैं तो कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्रियों के आफिस में चाय स्नैक्स आदि पर कितना खर्च हो रहा होगा।
युवाओं, महिलाओं और किसानों के हित पूरे करने के वादे पर प्रचंड बहुमत प्राप्त करने वाली भाजपा सरकार के सादगी पसंद मुख्यमंत्री के कार्यालय का खर्च ही बेरोजगारों का मंुह चिढ़ा रहा है। कमाल की बात यह है कि आरटीआई से प्राप्त जानकारी को कैबिनेट मंत्री और दिग्गज भाजपा नेता प्रकाश पंत गलत करार दे रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय का यह खर्च अतिथि देवो भवः परम्परा का अनुसरण कर रहा है या फिजूलखर्ची का संदेश दे रहा है यह राज्य की जनता को तय करना है। प्रदेशवासियों को भरोसा था कि ‘‘सबका साथ सबका विकास’’ नारा देने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में राज्य की बेरोजगारी और पलायन की समस्या दूर होगी लेकिन दस महीनों में ऐसा कुछ होता नहीं दिखाई दे रहा जिससे पलायन को मजबूर युवाओं को कोई उम्मीद बंधती हो।
उत्तराखंड की सरकार ने जहां 10 महीनों में चाय नाश्ते पर में 68 लाख 59 हजार 865 रुपये खर्च किये वहीं यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पदारूढ़ होने के बाद प्रचार-प्रसार में लगभग 10 करोड़ रूपये खर्च किये हैं। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में खुलासा हुआ कि पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल के आखिरी साल में प्रचार पर 85 करोड़ रुपये यानि लगभग 07 करोड रुपये प्रतिमाह खर्च किये थे वहीं मौजूदा सरकार महज 10 महीनों मेें 10 करोड़ यानि प्रतिमाह एक करोड़ रूपये खर्च कर चुकी है।
 
 

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