आखिर ? कब तक पत्रकारों के खून से भारतीय लोकतंत्र रक्त स्नान करता रहेगा?

22-10-2017 23:28:37 पब्लिश - एडमिन


साल तक गहन शोध के बाद अखिल भारतीय सर्वहितकारी पत्रकार महासंघ की स्थापना की गई।* मित्रों पुरे भारत वर्ष मे हर रोज लोकतंत्र की आत्मा कहे जाने वाले पत्रकारों की सरेआम हत्याये होने का क्रम जारी है,चाहे केन्द्र की सरकार हो या प्रान्तीय सरकारें हों पत्रकारों की हत्या होने के बाद उनका मौन हो जाना और संसद और विधान सभाओं मे इस पर बहस नही करना पत्रकारों को बचाने के लिये कोई कठोर कानून नही बनाना,साफ इसारा करता है कि सरकारें पत्रकारों के हितो व सुरक्षा को लेकर तनिक भी गम्भीर नही है पत्रकारों को गाजर और मूली की तरह डान,माफिया,गुंडे,पेशेवर अपराधी काट रहें हैं इन हत्यारों को शासन व सत्ता के पिछले दरवाजों से संरक्षण प्राप्त होने की बू आ रही है तभी तो गौरी लंकेश को उनके ही घरों मे गोली मारकर निर्मम हत्या हत्यारों ने कर दी वे जान बचाने के लिए भाग रही थी मगर हत्यारों ने उनकी जान ले ली। अभी कल ही उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के एक प्रमुख समाचारपत्र के पत्रकार राजेश मिश्र की सरेआम गोलियों से भून कर अपराधी चलता बने। किसी भी राजनेता,शासक व वरिष्ठ अधिकारी का इन हत्याओं पर तनिक भी आपने निंदा का बयान नही सुना होगा। आखिर क्यों नेता इन जघन्य वारदातों पर चुप्पी साध लेते हैं आप तनिक विचार करे। यह भी सोचिये दिवंगत पत्रकार राजेश मिश्र की वेवा पत्नी व निरीह मासुम बच्चों का अब क्या होगा क्या वे भटकेंगे नही जरुर भटकेंगे क्योंकि सरकारों के पास पत्रकारों को देने के लिए कोई कोष नही,कोई संवैधानिक सुरक्षा कानून नही, कोई वजट नही,पत्रकारों का संसद व विधान सभाओं मे उनका कोई प्रतिनिधि नही मतलब देश के लोकतांत्रिक ब्यवस्था मे आत्मा कहलाने वाला पत्रकारो को कोई पुछने वाला नही । हम पत्रकारों के बीच तमाम वरिष्ठ योग्य व अनुभवी पत्रकार जो पत्रकारिता करते हुये अब अस्ताचल की ओर बढ रहे हैं उनसे पुछिए देश की आजादी के बाद सरकारे बदली अलग अलग विचार धाराओ की सरकारें सत्ता मे आयीं लेकिन उन्होंने पत्रकारों के लिए कुछ भी नही किया। पत्रकारों का हर रोज उत्पीड़न किया जाता रहा,हत्या होती रही,पत्रकारों के परिवारो मे मातम छाते रहे सरकार और कार्यपालिका मे बैठा नौकरशाह सर्प की तरह कुंडली मारकर बैठा रहा उल्टे जब भी पत्रकार उससे न्याय मांगने गया नौकरशाह रुपी जहरीले नाग ने उसे ही डंस लिया। पत्रकारों को जिंदा जला दिया जाता है,उनके उपर बुल्डोजर व सङक बनाने वाली रोलर मशीनों से कुचल कर मार दिया जाता है पत्रकारों पर फर्जी मुकदमों मे फंसाकर जेल भेज दिया जाता है पत्रकारों को दिन दहाडे दौडा कर गोलियों से छलनी कर मौत के घाट उतार दिया जाता है क्या यही एक लोकतंत्र की परिभाषा है जहाँ सत्य,न्याय और समग्र नागरिक हितों की रक्षा करने वाले वुद्धिजीवी वर्ग कहलाने वाला पत्रकार का सरेआम उत्पीड़न किया जाता हो क्या वह राष्ट्र उज्जवल भविष्य की परिकल्पना कर सकता है,शायद नही। पत्रकारों का वर्ग कयी धडो मे विभक्त होकर अपनी शक्तियां खो चुका है इसीलिए लगातार चार साल तक गहन शोध किया गया हर विन्दुओ पर मंथन किया गया कयी छोटे पत्रकार संगठनो मे जाकर उनका भी शोध किया गया तब जाकर राष्ट्रीय स्तर का शक्तिशाली विशाल संगठन"अखिल भारतीय सर्वहितकारी पत्रकार महासंघ" की स्थापना किया गया संगठन का औपचारिक विस्तार युद्ध स्तर पर जारी है जो ३० नवम्बर २०१७ तक पुर्ण कर लेने के बाद नवीन वर्ष २०१८ से संगठन विधिक रुप से पत्रकारों की सुरक्षा,सभी संवैधानिक अधिकारो को संविधान मे लिपिवद्ध कराने का कार्य संगठन करवा कर ही दम लेगा सभी छोटे संगठनो वरिष्ठ पत्रकारो,समाचारपत्र संस्थानो,सम्पादको,और मुर्धन्य समाज सेवियो को अखिल भारतीय सर्वहितकारी पत्रकार महासंघ आवाहन करता है कि आप सभी केवल एक मंच "अखिल भारतीय सर्वहितकारी पत्रकार महासंघ" के विशाल संगठन मे शामिल होकर असीम दुर्गा शक्ति का स्वरुप दे ताकि संगठन महिसासुर रुपी अपराधियो को जब पत्रकारों के हितों का नुकसान कर उनकी हत्याये करते हैं उनका समूल नाश कर सके ताकि हमारी आने वाली पत्रकार पीढी एक सुखद सुरक्षित वातावरण का आनंद लेकर गर्व कर सके। शुभकामनाओं सहित घनश्याम प्रसाद सागर अखिल भारतीय सर्वहितकारी पत्रकार महासंघ,भारत