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दिवंगत महादेवी वर्मा को हाजिर होने के साथ गृहकर जमा कराने का नोटिस

08-02-2018 17:55:41 पब्लिश - एडमिन


इलाहाबाद। ‘‘निजाम का चेहरा भले ही बदल जाये लेकिन मिजाज कभी नहीं बदलता।’ यह बात उस समय सच साबित हुई जब इलाहाबाद नगर निमग प्रशासन ने तीन दशक पहले स्वर्ग सिधार चुकी प्रख्यात लेखिका पदमश्री विजेता महादेवी वर्मा को गृहकर का नोटिस भेजते हुए बाकायदा पेश होने के लिए कहा है। प्रख्यात लेखिका स्व. महादेवी वर्मा के नाम नोटिस जारी होने से जाहिर हो गया है कि वर्तमान निगम प्रशासन को महादेवी वर्मा के बारे में जानकारी ही नहीं है वह महान लेखिका और पदश्री पुरुस्कार विजेता है। यहां यह बात खासतौर पर काबिले जिक्र है कि व्यक्ति के जन्म-मृत्यु का लेखा-जोखा निगम के पास ही रहता है।
मीडिया खबरों के मुताबिक इलाहाबाद नगर निगम ने प्रसिद्ध लेखिका महादेवी वर्मा के नाम 44 हजार 816 रूप्ये गृहकर का नोटिस भेजते हुएउन्हें बाकायदा हाजिर होने की हिदायत दी। गौरतलब है कि महान हिन्दी कवियत्री महादेवी वर्मा का 1987 में निधन हो चुका है। रोचक बात यह है कि स्व. महादेवी वर्मा अपना घर पहले ही साहित्य सहकार न्यास ट्रस्ट को दान कर चुकी थी। उन्होंने स्वयं इस ट्रस्ट को अपनी मृत्यु से दो वर्ष पूर्व गठित किया था। इलाहाबाद नगर निगम प्रशासन की ओर से महादेवी वर्मा के नवादा और अशोक नगर स्थित आवास के गृहकर चुकाने का नोटिस भेजा है।
नोटिस के सन्दर्भ में न्यास की केयर-टेकर रानी पाण्डेय ने कहा कि उन्हें हैरत है कि निगम बोर्ड ने नोटिस जारी किया जबकि उनके पति वर्ष 1998 में ही तमाम कानूनी प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। वह नोटिस मिलने से बहुत हैरान है। रानी पांडेय के बडे पुत्र ब्रिजेश ने निगम की कार्यवाही से हैरानी जताते हुए कहा कि निगम ऐसा कैसे कर सकता हैं। महादेवी जी का निधन 30 साल पहले हो चुका है। उनके पिता ने समस्त कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली थी। उन्होंने बाकायदा निगम में प्रार्थना पत्र दिया था। उन्हें लगता था कि कानूनी अहर्ताएं पूरी करने के बाद उन्हें गृहकर देने की आवश्यकता नहीं है। ब्रिजेश ने बताया कि उनके पिता ने निगम में जारी प्रार्थना पत्र में जानकारी देते हुए बता दिया था कि अब यह घर न्यास की सम्पत्ति है। उन्होंने निगम से मालिकाना हक हेतु कार्रवाई करने का अनुरोध भी किया था।
उधर नगर निगम के अधिकारी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने से इन्कार करते हैं। मुख्य चीफ टैक्स असेसमेंट आफीसर पीके मिश्रा ने बताया कि निगम के रिकार्ड के अनुसार महादेवी वर्मा अभी भी मकान की मालिक है, इसी वजह से उन्हें नोटिस जारी किया गया है। जो लोग वर्तमान में उनके आवास में रह रहे हैं उन्होंने निगम में कोई एप्लीकेशन नहीं दी है। अगर वह आवेदन करते हैं वह उसे असेम्बली में रखेंगे। असेम्बली ही उन लोगों को कर से मुक्ति दिला सकती है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 

 
 
 
 

 
 
 
 
 
 
 
 

 

 

 

 

 

 

 

 

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