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फजीहत के बाद जिला प्रेस क्लब की गोद में बैठे मनोज सैनी

04-05-2018 18:54:45 पब्लिश - एडमिन


हरिद्वार। कल तक एक दूसरे को ब्लैकमेलर और दलाल करार देने वाले दो पत्रकारों ने एकजुट होकर पत्रकारिता की गरिमा और मर्यादा को कायम रखने का संकल्प लेकर पत्रकारिता जगत में चुटकुलों का दौर शुरू कर दिया है। मनमाने तौर तरीकों के चलते विवादों में फंसने वाले पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष की फजीहत का सिलसिला थमा नहीं है। अब उन्होंने कद और रूतबे को कायम रखने के लिए उस जिला प्रेस क्लब में पनाह ली है जिसे कल तक वह ब्लैकमेलर्स और दलालों का जमावड़ा कहते नहीं थकते थे। 
दरअसल पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष ने पहले मनमाने तरीकों से संस्था से जुड़े छह वरिष्ठ सदस्यों की सदस्यता निष्कासित की जिसे लेकर काफी हो हल्ला हुआ और डेढ़ दर्जन पत्रकारों ने प्रेस क्लब पर ताला जड़कर धरना दिया। मामला प्रशासन के संज्ञान में लाया गया तो सिटी मजिस्टेªट और जिला सूचना अधिकारी की मौजूदगी में छह सदस्यों की सदस्यता के निष्कासन का मुददा प्रेस क्लब के संस्थापक सदस्यों को सौंप दिया गया। दोनों पक्षों में वरिष्ठ सदस्यों के फैसले का मानने पर सहमति कायम हुई लेकिन मामला उस वक्त तूल पकड़ गया जब वरिष्ठ साथियों ने निष्कासन की कार्रवाई का गलत ठहराते हुए सदस्यों की बहाली मुहर लगा दी। तत्कालीन प्रेस क्लब अध्यक्ष को वरिष्ठों का यह फैसला अपनी प्रतिष्ठा पर कुठाराघात नजर आया। उन्होंने प्रेस क्लब के संस्थापक सदस्यों के निर्णय को सार्वजनिक किये बिना चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी। प्रेस क्लब अध्यक्ष की इस हठधर्मी से प्रेस क्लब में नाराजगी बढ़ने लगी। कई वरिष्ठ सदस्य खुलकर तत्कालीन प्रेस क्लब के फैसले को चुनौती देने को उठ खड़े हुए। मामले को संभालने के लिए प्रेस क्लब के तत्कालीन अध्यक्ष ने पूर्व की तरह उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन और एनयूजे (आई) की बैठक बुलाकर पुराने ढर्रे पर चुनाव कराने की कवायद आरम्भ की लेकिन उनका यह प्रयास विफल हो गया। गौरतलब है कि बरसों से दोनों यूनियनों के बीच एक यूनियन का अध्यक्ष और दूसरी का महामंत्री के फार्मूले पर चुनाव होते रहे है लेकिन इस बार उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने इस फैसले को ठुकरा दिया। यूनियन के सर्वाधिक वरिष्ठ और सम्मानित सदस्य प्रो. एसएस जायसवाल को तत्कालीन प्रेस क्लब अध्यक्ष का रवैया इस कदर नागवार गुजरा कि उन्होंने संयुक्त बैठक का बहिष्कार कर दिया। यूनियन के वरिष्ठ और सम्मानीय सदस्य के निर्णय को यूनियन के अधिकांश सदस्यों का समर्थन प्राप्त हुआ। बदले हुए हालात में उत्तरखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन और नव गठित श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने संयुक्त बैठक आहूत की जिसमें प्रेस क्लब अध्यक्ष पद के लिए संस्था के संस्थापक सदस्यों में शामिल पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर शिव शंकर जायसवाल के नाम पर सहमति कायम हुई जबकि महामंत्री के लिए उन ललितेन्द्र नाथ का नाम फाइनल हुआ जो श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की ओर से अध्यक्ष पद के दावेदार थे। सोने पर सुहागा यह हुआ कि प्रदेश के नामचीन पत्रकार और लेखक त्रिलोक चन्द्र भटट के नेतृत्व वाली एनयूजे भी श्रमजीवी की दोनों यूनिटों के साथ आ गई।
प्रेस क्लब के वार्षिक चुनाव में थर्ड फ्रंट की शानदार जीत हुई। न केवल अध्यक्ष और महामंत्री पद पर कब्जा हुआ बल्कि कार्यकारिणी सदस्यों में थर्ड फ्रंट को बहुमत मिला। कार्यकारिणी सदस्यों में नौ सदस्य उत्तराखंड श्रमजीवी यूनियन और पांच सदस्य श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के विजयी हुए जबकि एनयूजे (आई) का मात्र एक सदस्य विजयी हुआ। तमाम हथकंडों के बावजूद वार्षिक चुनाव में मुंह की खाने के बाद निवर्तमान अध्यक्ष ने कद और रूतबा खत्म होने के बाद प्रेस क्लब विरोधी गतिविधियों को हवा देना शुरू किया जिस पर प्रेस क्लब की नव गठित कार्यकारिणी नाराज हुई। कई सदस्यों ने निवर्तमान अध्यक्ष को बाहर का रास्ता दिखाने की मांग कर डाली। सोशल मीडिया पर जंग चली जिसमें निवर्तमान अध्यक्ष की गतिविधियों पर काफी कटाक्ष हुए। नित दिन फजीहत से बचने के लिए खुद को प्रेस क्लब का बेताज बादशाह समझे जाने वाले मनोज सैनी ने आखिरकार उन राकेश वालिया से हाथ मिला लिया जिन्हें वह प्रेस क्लब अध्यक्ष रहते हरिद्वार का सबसे बड़ा ब्लैक मेलर और दलाल कहा करते थे। राकेश वालिया अपना समानान्तर संगठन जिला प्रेस क्लब नामक संगठन चलाते हैं और प्रेस क्लब की गतिविधियों से दूर रहने के साथ साथ कोई टीका टिप्पणी नहीं करते। वालिया अपनी लीक पर चलने वाले पत्रकार है जिनके साथ पत्रकारों की ठीक ठाक संख्या है। जिला प्रेस क्लब की गोद में बैठने के बाद ज्वालापुर आर्यनगर के एक रेस्टोरेंट में बैठक आहूत हुई जिसमें रूड़की, बहादराबाद, मंगलौर, लक्सर, भगवानपुर और कलियर सहित अन्य क्षेत्रों के पत्रकारों को आमंत्रित कर जिला प्रेस क्लब के विस्तार की योजना बनी। सूत्रों की माने तो उस बैठक में अपेक्षानुकूल पत्रकार शामिल नहीं हुए। निवर्तमान अध्यक्ष के अलावा प्रेस क्लब के दो और सदस्यों ने बैठक में शिरकत की। बताया जाता है कि जिला प्रेस क्लब की बैठक में शामिल होने वाले इन दो सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। कुछ सदस्य कारण बताओ नोटिस जारी करने के पक्ष में हैं।
सदस्यों के निष्कासन की कार्रवाई और वार्षिक चुनाव में फजीहत झेलने के बाद निवर्तमान अध्यक्ष की जिला प्रेस क्लब से बढ़ती नजदीकियों को लेकर सोशल मीडिया में काफी तीखी बहस हो रही है। कुछ सदस्य व्यंग्य करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। कहा जाता है कि जिला प्रेस क्लब के कंधे पर बंदूक रखकर निवर्तमान अध्यक्ष प्रेस क्लब पर निशाना लगाने की रणनीति पर चल रहे हैं।उनका मकसद प्रेस क्लब के समानान्तर ऐसा संगठन खड़ा करना है जिसके बैनर तले उनके वह तमाम काम होते रहे जो प्रेस क्लब अध्यक्ष के रहते होते थे। 

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