हरिद्धार प्रेस क्लब अध्यक्ष की ताना शाही से केंटीन संचालन को लाखो का नुक्सान

27-12-2017 11:20:29 पब्लिश - एडमिन


हरिद्वार, 24 दिसम्बर। प्रेस क्लब हरिद्वार कार्यकारिणी के निर्वाचित सदस्य तथा ‘गंगा का संदेश’ हिन्दी साप्ताहिक के संपादक रामनरेश यादव ने जिलाधिकारी को पत्र देकर प्रेस क्लब कैन्टीन की प्रेस क्लब पर शेष अपनी धनराशि दिलाने की मांग की है, उन्हांेने पत्र में जिलाधिकारी को यह भी बताया कि उन्हें कैन्टीन संचालन की जिम्मेदारी 31 मार्च 2019 तक के लिए सौंपी गयी थी लेकिन प्रेस क्लब अध्यक्ष मनोज सैनी एवं महामंत्री अमित गुप्ता ने उनसे चार माह में ही कैन्टीन खाली करवा ली तथा कैन्टीन निर्माण से लेकर खाना, नाश्ता आदि पर हुए उनके व्यय का भी भुगतान नहीं किया।
प्रेस क्लब अध्यक्ष की कार्यशैली से असंतुष्ट पत्रकार रामनरेश यादव ने बताया कि सितम्बर तथा अक्टूबर 17 में पहले उनका पुत्र स्वाइन फ्लू से पीड़ित हुआ तथा बाद में वे स्वयं एक माह तक बीमार रहे। प्रेस क्लब द्वारा अपने सदस्यों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता भी प्रेस क्लब अध्यक्ष ने उन्हें नहीं दी जबकि अपने पास से बतौर कर्ज रु. 25000/- पांच प्रतिशत ब्याज पर यह कहकर दिए कि हम दूसरों को दस प्रतिशत मासिक पर कर्ज देते हैं लेकिन आप पत्रकार साथी हैं तो आपको पांच प्रतिशत पर ही दे रहे हैं। यह धनराशि मैंने एक माह के लिए यह कहकर ली थी कि प्रेस क्लब से मेरा भुगतान होते ही मैं यह रकम मय ब्याज के वापस कर दूंगा लेकिन मनोज सैनी ने मेरा भुगतान इसलिए नहीं किया कि उनका ब्याज बढ़ रहा है। 
प्रेस क्लब अध्यक्ष मनोज सैनी प्रेस क्लब की कैन्टीन अपने कार्यकाल में ही किसी अन्य व्यक्ति से प्रीमियम लेकर किराये पर देना चाहते हैं इसीलिए जिलाधिकारी के नाम की धमकी देकर कैन्टीन का गेट तुड़वाया और जबरन मेरी कैन्टीन बन्द करवा दी। प्रेस क्लब अध्यक्ष मनोज सैनी ने चार-पांच पत्रकारों का एक संयोजक मण्डल बना रखा है जिसने दीपावली मिलन समारोह में जिलाधिकारी के सम्मिलित होने के नाम पर लगभग बीस लाख की चन्दा वसूली की और लगभग चार-पांच लाख के गिफ्ट पत्रकारों को बांटकर उन्हें खुश कर दिया, शेष रकम का बन्दरबांट हुआ और विदेश की यात्रा का मजा लिया गया। जिलाधिकारी दीपावली के कार्यक्रमों मंे सम्मिलित भी हुए लेकिन जब उन्हंे प्रेस क्लब अध्यक्ष मनोज सैनी के चरित्र तथा कार्यप्रणाली के विषय में पता चला तो 23 दिसम्बर 2017 को प्रेस क्लब में होने वाले कार्यक्रम में वे सम्मिलित नहीं हुए। 
प्रेस क्लब गठन के बाद यह पहला कार्यकाल है जिसमें किसी सदस्य का आर्थिक शोषण हुआ और पूरा सदन उस 09-12-17 की आम सभा में चुप बैठा रहा जिसमें रामनरेश यादव को अपना पत्र प्रेस क्लब अध्यक्ष और उनके दीपावली मिलन कार्यक्रम के संयोजक धर्मेन्द्र चैधरी ने नहीं पढ़ने दिया। इतना ही नहीं प्रेस क्लब के अध्यक्ष एवं महामंत्री ने कैन्टीन संचालक से बिजली बिल का भुगतान भी रु. 6.50 प्रति यूनिट की दर से व्यवसायिक दर बताकर लिया लेकिन रसीद यह कहकर नहीं दी कि प्रेस क्लब स्वयं नगर निगम का किरायेदार है और किरायेदार किसी दूसरे को किराये पर नहीं दे सकता इसीलिए रुपये पांच हजार के चेक की दी गयी रसीद सं.-899 दिनांक 30-7-17 में केवल ‘कैन्टीन मद में’ लिखा गया है। प्रेस क्लब अध्यक्ष ने मुझे जो रु. पच्चीस हजार की धनराशि दी है वह केयर टेकर राजू से अपने घर से मंगवाकर दी लेकिन उन्हांेने वाट्सएप मैसेस में लिखा कि प्रवीन झा के सामने दिए जो झूठ है, उस समय प्रवीन झा नाम का कोई आदमी वहां उपस्थित नहीं था। यही लोग इससे पूर्व भी मेरे खिलाफ हरिजन एक्ट की एक झूठी रिपोर्ट थाना कोतवाली में दर्ज करने के लिए तहरीर दे चुके हैं जिसके गवाह गोपाल रावत एवं आदेश त्यगाी थे, जांच फर्जी पाये जाने पर यह रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी। प्रेस क्लब निर्माण के नाम पर सांसद निधि लेकर उसका बन्दरबांट करना तथा कार्यक्रम आयोजन के नाम पर चंदा वसूलने वालों को प्रेस क्लब जैसी पवित्र संस्था के संचालन का अधिकार नहीं होना चाहिए। किसी भी संस्था का गठन अपने सदस्यों के हितों की रक्षा करना होता है लेकिन प्रेस क्लब में तानाशाही चल रही है इस पर रोक लगनी चाहिए। 

Ram Naresh Yadav,
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