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अंशकालिक संवाददाताओं को भी मिलेगा मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ

11-01-2019 15:44:17 पब्लिश - एडमिन


देश भर के समाचार पत्रों में कार्यरत उन अंशकालिक संवाददाताओं के लियेजो समाचार पत्रोंमें समाचार भेजने के बदले नाम मात्र भुगतान पाते थ के लिये एक अच्छी खबर आयी है। अब  अंशकालिक संवादताताओं को भी समाचार पत्र कर्मचारी मानते हुये जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने का आदेश मेरठ की एक श्रम न्यायालय ने दिया है। इस श्रम न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को संज्ञान में लेते हुयेयह आदेश सुनाया है। श्रम न्यायालय ने हिन्दुस्तान के अंशकालिक संवाददाता राजदीप नागर द्वारा दायर एक याचिका पर यह निर्णय सुनाया है। हालांकि यह भी स्पष्ट कर दूं कि यह जरुरी नहीं है कि एक श्रम न्यायालय दुसरेश्रम न्यायालय के दिये गये फैसले को अपने यहां लागू करे ही। लेकिन इससे एक रास्ता जरुर अंशकालिक संवाददाताओंके लिये खुल गया है। बताते हैं कि मेरठ के रहने वाले राजदीप नागर हिन्दुस्तान समाचार पत्र में अंशकालिक संवाददाता थे। उन्होने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार अपना बकाया पाने के लिये श्रम विभाग में आवेदन किया था। इस पर हिन्दुस्तान प्रबंधन ने यह दावा किया कि राजदीप नागर पेशे से एक अध्यापक है और वह श्रमिक की परिभाषा में नहीं आता है।  श्रम विभाग ने इस  मामले को श्रम न्यायालय में भेज दिया। इसी बीच कंपनी इलाहाबाद उच्च न्यायालय गयी। और दावा किया कि श्रमायुक्त मेरठ को श्रम न्यायालय में इस मामले को भेजने का अधिकार नहीं है। राजदीप नागर के एडवोकेट ने दावा किया कि शासन द्वारा मेरठ के उपश्रमायुक्त को इसके लिये अधिगृहित किया गया है। और यह कारवाई वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा १७(२) के तहत सही और वैधानिक है। साथ ही यह भी कहा गया कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा पारित निर्णय से यह स्पष्ट है कि श्रम न्यायालय मेरठ को वाद सुनने और निर्धारित करने का पूरा अधिकार प्राप्त है। इस मामले की सुनवाई करते हुये श्रम न्यायालय मेरठ ने पाया कि वादी राजदीप नागर कोमुख्य व्यवसाय टिचिंग का उल्लेख करते हुये भी हिन्दुस्तान प्रबंधन ने दी गयी शर्तो के अनुसार समाचार पत्र प्रेषितकरने और उसके बदले पांच हजार रुपये भुगतान किये जाने का उल्लेख है।श्रम न्यायालय ने माना कि इससे स्पष्ट है कि श्रमिक और सेवायोजक के मध्य एक संबंध था और सेवा योजक द्वारा लिये गये कार्यो का भुगतान भी वादी को किया जाता है। श्रम न्यायालय ने साफ आदेश दिया है कि उक्त विवेचना के आधार पर सेवा योजक द्वारा उठायी गयी सभी  आपत्तियों का निस्तारण उनके विरुद्ध व श्रमिक के पक्ष में लिया जाता है। इस मामले की अगली सुनवाई की तिथि २३ जनवरी को रखी गयी है। यह आदेश पीठासीन अधिकारी श्रीराम सिंह ने दिया है। फिलहाल राजदीप नागर के पक्ष में आये इस निर्णय से देश भर के समाचार पत्रों में कार्यरत अंशकालिक संवाददाताओं के लियेजस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ पाने का एक रास्ता खुला है। 

शशिकांत सिंह , मुंबई 

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