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आकर्षक है डांस बारों से अवैध कमाई

27-07-2019 15:28:48 पब्लिश - एडमिन



आज सुबह एक समाचार पत्र पर नज़र पड़ी उक्त समाचार पत्र के पहले पेज पर एक डांस बार की अवैध और गैर कानूनी गतिविधियों की खबर थी। यह समाचार हमने कई बार गौर से पढ़ा इस पूरे समाचार में कम से कम हमे तो कही नही लगा कि इस समाचार में लेखक ने समाचारों को लिखने का जो सिद्धान्त होता है उसका कुछ पालन किया हो। हालांकि यह भी हो सकता है कि उस समाचार के लेखक का स्तर इतना ऊपर हो जहां तक हमारी कल्पना नही पहुंच पा रही हो। क्योंकि हम पत्रकारिता के विद्यार्थियों को बार बार यह पाठ पढ़ाया गया है कि समाचारों के संकलन और लेखन में कभी भी कोई व्यक्तिगत आक्षेप नही होना चाहिए इसके ठीक विपरीत उपरोक्त समाचार पूरी तरह से व्यक्तिगत हित साधने का प्रयास मालूम होता है। न ही कोई तर्क और नही पाठकों को जागरूक करने की कोई सामग्री फिर आखिर ऐसे समाचारों का मकसद क्या होता है?? यह ठीक है कि मुम्बई में चलने वाले डांस बारों में अवैध अनैतिक और गैर कानूनी गतिविधियां चलती हैं। इससे भी इंकार नही किया जा सकता कि इन्हें स्थानीय पुलिस की मूक सहमति भी प्राप्त रहती है पर यह भी सच है कि यहां चलने वाली गैर कानूनी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए जब तब पुलिस कार्रवाई भी होती रहती है। अभी पिछले सप्ताह ही मुम्बई पुलिस की अलग अलग टीमों ने पूरे महानगर में अभियान चलाते हुए अनेक बारों पर कार्रवाई की जिससे डांस बार संचालकों में दहशत भी व्याप्त है। अनैतिक और अवैध गतिविधियां भी पकड़ी गई। लेकिन हमारा सवाल है कि क्या इन समाचार पत्रों में तथ्यहीन समाचारों के प्रकाशन से यह अवैध और गैर कानूनी कामों पर कुछ प्रभाव पड़ता है?? शायद नही क्योंकि इन समाचारों के प्रकाशन का मकसद गैर कानूनी गतिविधियों की रोकथाम होती ही नही बल्कि इन समाचारों को रोकने के नाम पर इन समाचार पत्रों के मालिकों की होने वाली आकर्षक अवैध कमाई महत्वपूर्ण है। हम यहां पर किसी पर कोई आरोप नही लगा रहे बल्कि यह बात हम तथ्यों के आधार पर बोल रहे है। हमने जिस समाचार पत्र के आज के समाचार का हवाला दिया उसी समाचार पत्र में अब से लगभग दो साल पहले डांस बारों के बारे में पूरी एक शृंखला चली थी उस श्रृंखला में अंधेरी पूर्व, मालाड और बोरीवली के कुछ बारों की अनैतिक गतिविधियों को उजागर किया गया था तो क्या वह सारे बार आज वजूद में नही हैं?? ऐसा नही है आज भी वह सारे बार वैसे ही शान से चल रहे है पर अब उपरोक्त समाचार पत्र में उनकी अनैतिक गतिविधियों के समाचार प्रकाशित नही होते क्योंकि उन बारों के संचालकों ने उपरोक्त समाचार पत्र के मालिक को मैनेज किया हुआ है। अब लगभग दो साल के बाद यह समाचार पत्र एक बार फिर डांस बारों की अनैतिक गतिविधियों को उजागर कर रहा है। उनका मकसद कुछ भी हो पर पहली नज़र में तो ऐसे समाचारों का मकसद अवैध उगाही ही नज़र आती है एक प्रश्न उठता है कि आखिर ऐसे समाचारों के सामने बार मालिक घुटने क्यों टेकते हैं?? तो इसके बारे में यह कड़वी सच्चाई है कि यदि डांस बार मलिक सब कुछ कानून के अनुरूप चलाएं तो इन्हें अपना धंधा चला पाना नामुमकिन ही होगा इसी लिए यह ऐसे समाचार पत्रों के मालिकों से बनाकर रखते है। पर महानगर में चलने वाले ऐसे अनेक समाचार पत्र है जो अनैतिक गतिविधियों को रोकने के नाम पर अपनी दुकान चला रहे है। हालांकि इनकी पूरी दुकान ही अवैध और अनैतिक होती है बात बात पर पुलिस के आला अधिकारियों पर उंगली उठाने वाले पुलिस अधिकारी इन समाचार पत्र मालिकों की कमाई का स्त्रोत क्या है यह पता करने के लिए क्या इन तथाकथित पत्रकारों की भी खबर लेंगे?? यहां ध्यान देने वाली एक बात यह भी है कि डांस बार मालिक भले ही गैर कानूनी गतिविधियों का संचालन अपने यहां करते है पर सरकार को हर साल एक मोटी रकम विभिन्न टैक्स के रूप में देते है। पर इन बारों की अनैतिकता रोकने के नाम पर मोटी कमाई करने वाले सरकार को कितना टैक्स देते है यह एक बड़ा जांच का विषय है यदि इस दृष्टिकोण से ईमानदारी से कोई ज़िम्मेदार विभाग जांच करे तो अनेक तथाकथित पत्रकारों और समाचार पत्र, यूट्यूब चैनल संचालकों के चेहरे से नकाब उतर जाएंगे।

                                                                                                                                                                                                                                                                                     फ़ैज़ शेख

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