* *** आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें *** *

विश्व में सबसे अधिक आधुनिक गुलाम वाले भारत की आजादी का जश्न

21-08-2019 16:02:34 पब्लिश - एडमिन


विश्व में सबसे अधिक आधुनिक गुलाम वाले भारत की आजादी का जश्न

नई दिल्ली। १५ अगस्त 1947 से हम हर साल बड़ी धूमधाम से स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री का सरकार की उपलब्धियों पर आधारित भाषण सुनते हैं और फिर अपने काम में लग जाते हैं। चाहे सरकारी स्तर पर हो या फिर निजी स्तर पर लगभग हर जगह स्वतंत्रता दिवस इसी तरह से मनाया जाता है। हर कार्यक्रम से इस बात पर जोर दिया जाता है कि हम लोग इस दिन आजाद हो गये थे।  लोग देश को आजाद मानते हैं और आजादी का जश्न मनाकर खुश हो जाते हैं। न कोई यह जानने की कोशिश करता है कि यह आजादी किस कीमत पर मिली है या फिर आजाद भारत में क्या लोग आजाद होकर रह रह रहे हैं। समाजवाद के प्रणेता इस आजादी को आजादी नहीं मानते थे। उनको आजादी से पहले से ही कांग्रेस नेताओं में सत्ता के प्रति लालसा दिखाई देनी लगी थी। यही वजह रही कि वे आजाद भारत में भी कितने बार जेल गये। भगत सिंह का आंकलन आजादी का किसान के जीवन स्तर से था। उनका कहना था कि जिस दिन किसान की थाली में सबसे अच्छा भोजन होगा, देश उस दिन आजाद माना जाएगा। क्या आज की तारीख में किसान की थाली में सबसे अच्छा भोजन है। सबसे अच्छा भोजन तो उन पूंजीपतियों की थाली में है, जिनका दूर-दूर तक अन्न से कोई वास्ता नहीं है। किसान तो बदहाली की जिंदगी जाने को अभिशप्त है। आजाद भारत में क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों की भावनाओं और उनके सिद्धातों की अनदेखी का ही नतीजा है कि आजाद भारत में भी गुलामों की भरमार है। हां गुलामी का तरीका बदल गया है। आज गुलाम की जगह आधुनिक गुलामों ने ले ली है। यदि आंकड़ों पर जाएं तो दुनियाभर में करोड़ों लोग आधुनिक गुलामी के शिकार हैं और इनमें सबसे ज्यादा हमारे देश में ही हैं। सरकारी स्तर पर कितने भी बड़े-बड़े दावे किये जाते रहे हों पर देश में आज भी दास प्रथा बदस्तूर जारी है। घरों और फैक्टिरों में चौबीस घंटे रखे जाने वाले नौकरों को भी  आधुनिक गुलाम कहा जाता है। दुनिया के अलग अलग देशों में लोगों के अधिकारों का कितना सम्मान होता है, उसी के आधार पर आंकड़ों का यह इंडेक्स तैयार किया जाता है। बंधुआ मजदूरी, जबरन वेश्यावृत्ति, जबरन भीख मांगना, जबरन सशस्त्र संस्थाओं में झोंक दिया जाना, जबरन शादी भी आधुनिक गुलामी के दायरे में आती है। भले ही देश में बड़े-बड़े दावे किये जा रहे हों पर इसी आधार पर तैयार किए गए ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स में भारत सबसे ऊपर है। आस्ट्रेलिया के मानवाधिकर समूह 'वाक फ्री फाउंडेशनÓ की तरफ से जारी ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स के अनुसार   दुनिया भर में महिलाओं और बच्चों समेत 4 करोड़ 58 लाख लोग आधुनिक गुलामी के गिरफ्त में है। सभी 167 देशों में आधुनिक गुलाम पाए जाते हैं। इसमें शीर्ष पांच देश एशिया के हैं। यानि कि दुनिया भर के आधुनिक गुलामों में से 58फीसद सिर्फ एशिया में रहते हैं और हमारा देश इसमें सबसे ऊपर है। भारत की करीब डेढ़ अरब करोड़ की आबादी में, दो करोड़ आधुनिक गुलाम हैं। भारत के बाद चीन लगभग (34 लाख  पाकिस्तान (21 लाख ), बांग्लादेश (15 लाख ) और उज्बेकिस्तान (12 लाख ) आते हैं है। भारत में आधुनिक गुलामों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सर्वे के अनुसार दुनिया के 167 देशों में आधुनिक गुलामी पाई गई है। - जनसंख्या के अनुपात में लग्जेम्बर्ग, आयरलैंड, नॉरवे, डेनमार्क, स्विटजर्लैंड, ऑस्ट्रिया, स्वीडन और बैल्जियम में सबसे कम लोग गुलाम हैं।क्रांतिकारियों के बल पर देश को अंग्रेजों से तो आजाद करा लिया गया पर आजाद भारत के प्रभावशाली लोगों ने जो आधुनिक गुलाम बना रखे हैं, इन्हें कौन आजादी दिलाएगा ? यह प्रश्न अपने आप में देश की आजादी पर सवाल पैदा करता है।  इन लोगों की मजबूरी का फायदा रहे लोगों को आजादी का अहसास कौन दिलाएगा ? अक्सर देखने में आता है ये वे लोग होते हैं जो सत्ता में बैठे होते हैं या फिर उनके करीबी होते हैं। आधुनिक गुलाम बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं। पेट भरने की मजबूरी के चलते अपने बच्चों को बचपन से ही काम पर लगा देना इनकी विवशता है। आधुनिक गुलामों की दायरे में आने वाली बाल मजदूरी, सेक्स स्लेव और बच्चों से भीख मंगवाना, ये सब चोरी-छुपे बिंदास अंदाज में चल रहा है। देश में सपना भारत के विश्व गुरु बनने का देखा जा रहा है विश्व में सबसे अधिक गुलाम हमारे ही देश में हैं। इन आंकड़ों से भारत की जो तस्वीर सामने आई है वह बहुत भयावह है। अब भले ही हमारा देश गुलाम न रहा हो पर देश में रहने वाले  लोग गुलाम हैं। चिंता की बात यह है कि इन आधुनिक गुलामों की संख्या देश में लगातार बढ़ रही है। देश तब आजाद माना जाएगा जिस दिन देश में इन आधुनिक गुलामों को सम्मानजनक ढंग पुनर्वासित किया जाएगा। यह तो वह गुलामी है जो सामने दिखाई देती है। देश में घरों में, कार्यालयों, राजनीतिक संगठनों, सरकारों में भी इसी तरह की गुलामी है जो अनुशासन के नाम पर दी गई गई है। विभिन्न तंत्रों और विभागों में उच्च पदों पर बैठे लोगों ने ऐसा माहौल बना रखा है कि कनिष्ठों से गुलामों की तरह व्यवहार किया जाता है। हम आजादी की बात तो करते हैं पर किसी के आजाद होने पर हमें दिक्कतें होने लगती हैं। किसी के मान-सम्मान और -अधिकार की चिंता किये बिना उस पर अपना हुक्म थोपना भी एक तरहस े गुलामी के दायरे में ही आती है। आज के हालात में मोदी सरकार जिस तरह से लोकतंत्र की रक्षा के लिए बनाए गये तंत्रों का इस्तेमाल मनमानी तरीके से कर रही है यह भी एक तरह से गुलामी के दायरे में ही आता है। कोई भी कीमत चुकाकर सत्ता और पावर के पीछे भागना भी एक तरह से गुलामी ही है। घरों में भी बच्चों से अनुशासन के नाम पर आजादी छीनी जाती है। घरों में बच्चों से अपनों द्वारा यौन शोषण होना भी बच्चों को अनुशासन के नाम पर चुप कराने की प्रवृत्ति रही है। घरों, कार्यालयों और प्रशासन औेर शासन स्तर पर इतने दबाव बना दिये जाते हैं कि आजाद महसूस करना लोगों को लिए बड़ा मुश्किल लगता है। ऐसे में हम कितना भी स्वतंत्रता दिवस मना लें कितना भी बड़े बड़े कार्यक्रमों पर खर्च कर लें पर जब तक ये आधुनिक गुलाम हमारे देश में रहेंगे तब देश को पूरी तरह से आजाद नहीं कहा जा सकता है ।


आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें

अपनी राय नीचे दिये हुए कमेंट बॉक्स में लिखें !