बहुचर्चित शो बेटियां की एंकर ऋचा कीे आपबीती

06-01-2018 11:53:18 पब्लिश - एडमिन


बहुचर्चित शो ‘‘बेटियां’’ की एंकर ऋचा कीे आपबीती

देश के अग्रणीय न्यूज चैनलों में शुमार इंडिया न्यूज को छोड़ने वाली ़ऋचा अनिरूद्ध सिंह ने तीन माह बाद चैनल छोड़ने की उस असीम पीड़ा को मार्मिक शब्दों में अभिव्यक्त कर ीिदया जो खबरिया चैनलों की दुनिया के उस अन्दरूनी काले सच को बयान करती है जिसे कमोबेश हर मीडियाकर्मी को रूबरू होना पड़ता है।

इंडिया न्यूज के बेहद लोकप्रिय शो में शामिल ‘‘बेटियां’’ शो की एंकर ़ऋचा अनिरूद्ध सिंह के अनुसार तीन अक्टूबर 2017 को एचआर डिपार्टमेंट के ऐसे अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें फोन पर बेटिया शो की एंकरिगं करने के कान्टेªक्ट टर्मिनेट किये जाने की सूचना दी। ़ऋचा के मुताबिक उन्हें शो का कान्टेªक्ट खत्म होने का कोई दुख नहीं था क्योंकि यह उस दुख की अपेक्षा कहीं कम था जो वह हर दिन झेलती थी। ़ऋचा अनिरूद्ध सिंह के अनुसार अक्सर उनके सामने यह दुखदायी सच्चाई सामने आती थी कि कभी कैमरे में चिप नहीं तो कभी चिप करप्ट होने की बात कही जाती थी। ़ऋचा अनिरूद्ध सिंह ने अपनी पीडाओं को अभिव्यक्ति प्रदान करते हुए एक मेल चैनल एडिटर को भेजी थी। अफसोस इस बात का था कि इन पीरियड के बावजूद कान्टेªक्ट समाप्त करना ही था तो चैनल के सम्पादक ही उनसे बात कर लेते।़ऋचा अनिरूद्ध सिंह दर्द बयान करती है कि उन्हें इतना सम्मान तो मिलना ही चाहिए था कि चैनल सम्पादक खुद बात करते, न की एचआर के किसी व्यक्ति से फोन करवाते। ़ऋचा अनिरूद्ध सिंह ने कहा कि अगर चैनल एडिटर स्वयं बात करके करार खत्म करने की जानकारी देते तो वह बिना विवाद किये और मुआवजा लिये बगैर ही चैनल को अलविदा कह देती। लेकिन मुझे बाद में पता चला कि यह तो चैनल की रीति नीति का हिस्सा है। यहां ऐसा ही होता है। ़ऋचा अनिरूद्ध सिंह ने कहा कि उन्हें कान्टेªक्ट खत्म होने सम्बन्धी मेल मंगाने और सितम्बर माह का वेतन लेने के लिए काफी जददोजहद करनी पड़ी। मेल में उन पर जो आरोप लगाये गये थे उसे पढ़ने के बाद समझ में नहीं आया कि हंसू या रोउं? ़ऋचा अनिरूद्ध सिंह के अधिवक्ता ने नोटिस का जवाब भेज दिया और साथ ही स्पष्ट कर दिया कि उनके पास हर आरोप के पुख्ता जवाब है और वह चाहे तो अदालत जा सकती है।

़ऋचा अनिरूद्ध सिंह के अनुसार उन्होेंने तीन माह के लम्बे इन्तजार के बाद इसलिए अपनी पीड़ा को उजागर किया क्यूकी कहते हैं कि गुस्से या पीड़ा की अधिकता में कभी अपने विचार व्यक्त नहीं करने चाहिए। ़ऋचा अनिरूद्ध सिंह ने कहा कि उन्हें बहुत से शुभचिन्तकों के फोन आये। हर किसी ने अपने अपने नजरिये सामने रखकर उन्हें अलग अलग सलाह दी। कुछ मित्रों ने सहयोग का वादा करते हुए केस दायर करने की सलाह दी। चैनल में कार्यकर्ता, कई भुक्तभोगियों ने साथ देने का आश्वासन दिया। विधि विशेषज्ञों ने कहा कि सब कुछ उनके पक्ष में है उन्हें अवश्य मुकदमा लड़ना चाहिए। इनके अलावा कुछ साथियों ने अपनत्व भरे लहजे में भविष्य में नौकरी न मिलने की बात कहते हुए चुप्पी साधने की नसीहत दी। कुछ साथी अपनी नौकरी छिन जाने के डर से चुप्पी साध कर बैठ गये। बाहर के पत्रकार मित्र भी यह सोचकर खामोश रहे कि भविष्य में उन्हें इंडिया न्यूज में नौकरी के लिए न जाना पड़ जाये। ़ऋचा अनिरूद्ध सिंह ने कहा कि जब उन्होंने पूरी दास्तान लिखने के लिए लैपटाप उठाया तो बहुत दुख हुआ कि चैनलों में कैसे कैसे लोग अहम पदों पर आसीन है। ़ऋचा अनिरूद्ध सिंह के अनुसार लिखते हुए कई जख्म दोबारा हरे हो गये और कटु स्मृतियां ताजा हो गई। ़ऋचा अनिरूद्ध सिंह ने कहानी बयान करते हुए लिखा कि चाहे मीठा झूठ बोलने वाले सम्पादक हो या धोखा करने वाले एचआर हेड अथवा तथाकथित टीवी रेटिंग विशेषज्ञ या सीईओ जिनके सम्मान समारोह में भीड़ नहीं जुटी तो यह इलज़ाम मेरे सिर रख दिया गया। ़ऋचा अनिरूद्ध सिंह के अनुसार ये वह लोग है जो कई एंकरों की नौकरियां खाकर अपनी नौकरी बचाये हुए हैं। ऐसे लोगों की कारगुजारियां पहले से ही दुनिया के सामने है और निकट भविष्य में भी सामने आयेंगी।

़ऋचा अनिरूद्ध सिंह  लिखती है कि जो यह ‘‘बेटिया’’ एक बेहतरीन सरोकारी शो था वह रेटिंग की मारामारी और सम्पादक की विफलता और मैनेजमेंट के लोगों की साजिश की भेंट चढ़ गया। अपने पत्र के अन्त में ़ऋचा अनिरूद्ध ने वक्त को बलवान बताते हुए लिखा है कि सब कुछ वक्त पर छोड़ देना चाहिए।

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