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40 से ज्यादा भाषाएं-बोलियां खतरे में

19-02-2018 19:56:51 पब्लिश - एडमिन




नई दिल्ली। भारत की 40 से अधिक भाषाएं या बोलियों के अस्तित्व पर गम्भीर खतरा मंडराता दिख रहा है। इनके इस्तेमाल करने वालों की तादाद दिन प्रतिदिन कम होते जाने की वजह से यह भाषाएं और बोलियां खत्म होने  के कगार पर आ पहुंची है। जनगणना निदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार देश में 22 अनुसूचित और 11 गैर अधिसूचित भाषाएं हैं जो लगभग एक लाख लोग बोलते हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार 42 भाषाएं तो ऐसी है जिनके इस्तेमाल करने वालांे की संख्या 10 हजार से भी कम है। इन्हें लुप्त प्रायः माना जा रहा है और यह खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी है। गृह मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक यूनेस्कों की ओर से तैयार सूची मंे भारत की 42 भाषाएं और बोलियों का जिक्र किया गया है जिनके वजूद पर खतरा मंडरा रहा है। देर सवेर उनके विलुप्त होने की संभावना बरकार है।
रिपोर्ट के अनुसार अंडमान निकोबार द्वीप समूह से 11 (ग्रेट अंडमानीज, जारवा, लामोेंगसे लूरो, मोउट, ओंगे, पू, ओंगे, सानयोने, सेंटिलेज, शोमपेन, और तटकाहनययिलांग) तथा मणिपुर से सात (एमोल, अका, कोइरन, लमगंाग, लांगरोंग, पुरूम और तराओ) और हिमाचल प्रदेश से चार भाषाएं/बोलियां जिनमें बगहाटी, हन्दूरी, पंगवाली और पंगवाली और सिरमौदी शामिल हैं। लुप्तप्रायः अन्य भाषाओं/बोलियों में मंदा, परजी, पेन्गो (ओडिसा), कोरगा और कुरुबा (कर्नाटक), गादाबा तथा नाकी (आन्ध्र प्रदेश), कोटा एवं थोड़ा (तमिलनाडु), मो और ना (अरूणाचल प्रदेश), ताई नोरा और ताई रोंग (असम), बंगानी (उत्तराखंड), बीरहर (झारखंड), निहाली (महाराष्ट्र),  रुगा (मेघालय) और टोटो (पं. बंगाल) शामिल हैं।
मैसूर स्थित केन्द्रीय भाषा संस्थान केन्द्रीय योजना के तीत विलुप्ति के कगार पर पहुंची इन सभी भाषाओं के संरक्षण की दिशा में कार्यरत है। इसके तहत व्याकरण सम्बन्धी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना, मोनोलिंगुअल और द्विभाषिक शब्दकोष तैयार करने के काम किये जा रहे है। इसके अतिरिक्त भाषा के मौलिक नियम, उन भाषाओं की लोक कथाओं का संग्रह, इन तमाम भाषाओं या बोलियों के वैश्विक कोष तैयार किये जा रहे हैं। दस हजार की आबादी से कम जनसंख्या वाले लोगों की बोली जाने वाली भाषाओं की सूची तैयार करने पर फोकस किया गया है।
इसके अलावा 22 अनुसूचित भाषाओं के अलावा 31 अन्य भाषाओं को विभिन्न राज्यों और संघ शासित प्रदेशों द्वारा आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया है। जनगणना के आंकडों के अनुसार देश में 1, 635 तर्कसंगत मातृ भाषाएं, 234 पहचानी जाने वाली मातृभाषाएं तथा 22 प्रमुख भाषाएं हैं।

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