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श्रीदेवी की मौत की खबरों का पोस्टमार्टम

06-03-2018 19:34:08 पब्लिश - एडमिन


 नई दिल्ली। मशहूर अदाकारा श्रीदेवी की दुबई में हुई संदिग्ध मौत के कवरेज में भारतीय मीडिया की भूमिका को लेकर तल्ख प्रतिक्रियाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह ने डीडी न्यूज के चर्चित शो ‘दो टूक’ में बीईए (ब्राडकास्टर्स एडिटर्स एसोसिएशन) के पूर्व महासचिव एनके सिंह ने श्रीदेवी की मौत पर मीडिया रिपोर्टिंग विषय पर बोलते हुए कहा कि श्रीदेवी प्रकरण में कवरेज का स्तर बौद्धिक दीवालियेपन को प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दुबई से मौत के स्वाभाविक होने की पुष्टि का पत्र आने के बावजूद सनसनीखेज कवरेज करना मानसिक दीवालियेपन के सिवा कुछ नहीं है। इस सवाल पर कि जनता देखना चाहती है, के जवाब में एनके सिंह ने दो टूक कहा कि जनता अगर फूहड या घटिया प्रोग्राम देखना चाहे तो क्या हम वहीं दिखायेंगे! उन्होंने कहा कि अगर जनता की मांग पर कार्यक्रम दिखाने लगे तो मीडिया संविधान के अनुच्छेद 19 ए (जी) के तहत मिला स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार खत्म हो जायेगा। सिंह के अनुसार अगर ऐसा किया जाये तो फिर मीडिया भांड बन जायेगा  मीडिया नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि न्यूज की गरिमा बरकार रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यूज और एंटरनेमेंट अलग अलग चीजे हैं। उन्होंने कहा कि श्रीदेवी के मामले में पत्रकारिता के सिद्धान्तों को ताक पर रख दिया गया। उन्होंने सोशल मीडिया को फार्मल मीडिया की तुलना में बेहतर बताया।
मीडिया विश्लेषक और सीनियर जर्नलिस्ट एनके सिंह ने साफ कहा कि अगर मीडिया को न्यूज के नाम पर भांडगिरी करनी है तो उसे खुद को एंटरटेनमेंट कहना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यूज की आड में घटिया रिर्पोटिंग नहीं करनी चाहिए। अगर ऐसा किया गया तो हम एडिटर के रूप् में जो सम्मान अर्जित करते हैं वह समाप्त हो जायेगा। प्रोग्राम में हाल ही में हुए तीन राज्यों के चुनाव का मुददा भी उठा। कहा गया कि श्रीदेवी के कवरेज के चलते चुनाव के दौरान मीडिया ने इसे नजर अन्दाज किया।  अभिषेक मेहरोत्रा ने श्रीदेवी प्रकरण पर कहा कि गैर जिम्मेदाराना रिर्पोर्टिग की गयी। उन्होंने एक चैनल के शीर्षक ‘सबसे बड़ी श्रद्धाजलिं’’ पर कटाक्ष करते हुए कहा कि श्रद्धाजंलि छोटी या बड़ी नहीं होती। उन्होंने इस तरह की रिर्पोर्टिग से परहेज करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी अखबार भी पीछे नहीं रहे। दो अंग्रेजी चैनलों का जिक्र करते हुए मेहरोत्रा ने कहा कि इन्होंने श्रीदेवी पर सर्वाधिक कवरेज की। उन्होंने बताया कि खाडी के नामचीन अखबार ‘‘गल्फ न्यूज’’ के अनुसार उनके पास जो रिपोर्ट आई वह बंद थी लेकिन इससे पूर्व ही अंग्रेजी के एक दैनिक के एक रिपोर्टर ने उस रिपोर्टर को खोलकर बता दिया कि उसमें क्या क्या था। जबकि उसे तीन रिपोर्ट को आधिकारिक तौर पर तीन घंटे बाद खोली गयी थी।  उन्होंने इसे मीडिया का मेलोड्रामा करार दिया। उन्होंने कहा कि चैनलों का यह कहना कि लोग देखते हैं तो हम दिखाते हैं, सरासर गलत है। उन्होने बताया कि उन्होंने कई लोगों से बातचीत की तो पता चला कि वही दर्शक मजाक उड़ा रहे है। डा. शुभि चतुर्वेदी का कहना था कि बेशक श्रीदेवी बड़ी स्टार थी लेकिन उनकी मौत की खबर को जिस तरह पेश किया गया वह बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि न्यूज कोइ्र डांस नहंी जो लोगों की मांग के अनुरूप दिखायी जाये। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोनिक और प्रिंट मीडिया ने जिस तरह श्रीदेवी के मामले में रिर्पोटिंग की उसे पत्रकारिता नहीं कहा जा सकता।
डा. शुभि ने साफ तौर पर कहा कि वर्तमान मीडिया जगत में अच्छे सम्पादक और एंकर का अभाव सा नजर आ रहा है जो मुददे को समझकर उसका विश्लेषण कर सके और उसे खबर के तौर पर पेश करे। उन्होंने मीडिया को आत्म मंथन की नसीहत दी। कार्यक्रम में शामिल हुए अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि उस दिन दो हादसे हुए थे। शंकराचार्य का निधन और बिहार में भाजपा नेता के वाहन से नौ बच्चे कुचले गये थे लेकिन मीडिया ने दोनों अहम समाचारों को नजर अन्दाज किया। जबकि कतिपय चैनल दुबई के होटल के बाथटब को मौत का बाथ टब कहते हुए दिखा रहे थे। अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि शहीद मेजर की पत्नी अपने छोटे बेटे के साथ मुखाग्नि दे रही थी लेकिन यह खबर मीडिया के बजाय सोशल मीडिया पर नजर आई। किसी अखबार ने भी उस खबर को जगह नही दी। शुभि ने कहा कि हमे ध्यान रखना होगा कि पत्रकारिता की मर्यादा मीडिया के हाथों में है। एनके सिंह ने मीडिया पर सरकार के नियंत्रण पर कहा कि इस बारे में कोई सोच भी नहीं सकता।
गौरतलब है कि जी न्यूज के एडिटर सुधीर चैधरी ने अपने लोकप्रिय शो ‘‘डीएनए’’ में भारतीय मीडिया को आईना दिखाया था। चैधरी ने कहा था कि बड़े व्यक्ति की मौत पर मीडिया मौतों पर खुश होने वाले गिद्ध सरीखा बन जाता है। मीडिया भी किसी बड़े व्यक्ति की मौत पर टीआपी वाला जश्न मनाने में मसरूफ हो जाता है। सुधीर चैधरी के अनुसार किसी बड़े आदमी की मौत या किसी दुर्घटना में ज्यादा मौतों पर मीडिया सम्पादकों की चेहरों की चमक बढ़ जाती है। श्रीदेवी की आत्मा यकीनन दुखी हो रही होगी। उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या मीडिया की नैतिकता वापस आयेगी! यह सवाल पूरे देश को कचोट रहा है। उन्होंने कहा कि श्रीदेवी की मौत का प्रमाण पत्र आने से पहले ही अलग अलग तरह की थ्योरी परोसी जाने लगी थी। सोशल मीडिया पर अफवाहों को सच मान लिया गया था। 
खलीज टाइम्स ने भी भारतीय मीडिया को संयम बरतते हुए प्रतीक्षा करने की सलाह दी थी। विदेशी मीडिया का भारतीय मीडिया पर ऐसी टिप्पणी करना दुर्भाग्यपूर्ण है। सुधीर चैधरी का सवाल था कि क्या मीडिया इससे सबक लेगा और उसमें परिपक्वता नजर आयेगी।

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Mahesh sharma made a post.
24-03-2018 6:06:50

आज का मीडिया सरकारी भोम्पू बन गया है विज्ञापनों के यह खबर छुपा भी सकता है और उसके गुणगान में खबर बना भी सकता है