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अब भारत के पत्रकार संगठित हो चलें हैं अब इनकी संगठित ताकत अपना इतिहास बदल कर रख देगीः घनश्याम प्रसाद सागर

14-12-2017 21:22:50 पब्लिश - एडमिन



साथियों ! इस तरह की कोई भी समिति पत्रकारों का कभी भला नही कर सकती बार बार मेरे पत्रकार साथी इस पोस्ट को ऐसे पोस्ट कर रहें हैं जैसे उन्हे यह धन मिल गया 2013 से यह योजना लागू जरा यह कोई बताये किस पत्रकार को इस योजना का लाभ मिला क्या 2013 से 2017 तक कोई पत्रकार लाभ पाया नही इसलिये लाभ नही मिल सकता क्योंकि ऐसे समितियों निःशुल्क पत्रकारिता करने वाले पीडित पत्रकारो का कोई भी प्रतिनिधि शामिल नही होता जैसा कि इस समिति मे भी नही है भारत के पत्रकार पिछले 70 सालों मे भी सरकार की नीति समझ नही पाया है और तब तक भला नही होगा और कोई लाभ नही मिल सकेगा जब तक पत्रकार और पत्रकारिता को संविधान मे चौथे स्तम्भ के रुप मे संसद मे चर्चा कर कानून के जरिये लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रुप मे लिपिवद्ध करते हुये विधिक अंग न मान लिया जाये। अखिल भारतीय सर्वहितकारी पत्रकार महासंघ की स्थापना करने से पुर्व वर्ष 2009 से लगातार 2012 तक सभी विनंदूओ पर गहन अध्ययन किया गया और फिर लगातार 4 साल तक पत्रकार हितों के लिये गहन शोध किये गये इतने वर्षो की लगातार तप साधना रुपी श्रम और मेहनत से राष्ट्रीय स्वरुप मे अति शक्तिशाली महासंगठन के रुप मे 5 सितम्बर 2017 को अखिल भारतीय सर्वहितकारी पत्रकार महासंघ की स्थापना की गयी और विधिक तौर पर संगठन 1 जनवरी 2018 से अपने सूपर विजन के साथ संगठन भारत सरकार सहित सभी प्रान्तीय सरकारों के समक्ष अपनी मांग पत्र प्रस्तुत करते हुये लोकतांत्रिक मर्यादाओ के साथ संघर्षो का ऐलान कर देगा। और यह संघर्ष तब तक चलेगा जब भारत के माननीय पत्रकारों को विधिक रुप से संसद के माध्यम से चौथे स्तम्भ के रुप मे मान्यता न दे दे। संगठन पिछले तीन महिने से बडी सुक्ष्म और बारीकी के साथ जुझारु, कर्मठशील लोगो का चयन कर रहा है जिसमे साहस, धैर्य,संगठन मजबूत बनाने का रण कौशल, और कठीनतम् शक्ति भरे सोच का अध्ययन औपचारिक रुप से पदस्थापित प्रदेशाध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष और तहसील अध्यक्षो का कर रहा है जो लोग इन कठीन मापदंडो को पुरा कर खरा उतरेंगे निश्चित तौर वे हमारे इस महान संघर्षमय मिशन के अद्वतीय शुरमा साबित होंगे क्योंकि संगठन मे किसी कीमत पर वे लोग कारगर साबित नही होंगे जो पद पाने के बाद भी अपने दायित्वो को पुरा करने मे शिथिल होकर शुन्य रहे ऐसे लोग संगठन का वेशकीमती समय जाया कर गहरा नुकसान पहुचा सकते हैं। हमारी लडाई उस तरह कि है जिस तरह भगवान राम ने समुन्द्र पर सेतू बनाने चले थे क्योंकि जो सरकारे पिछले 70 सालों मे पत्रकारों का कोई भला नही कर सकी वे क्या आपके लोकतांत्रिक मांगो को सहजता से स्वीकार कर लेगी सरकार मानेगी जब हम बलिदान देंगे, जब हम पत्रकार हितों के लिये लाठियां और गोलिया खायेंगे जब हमे जेलो मे बंद अमानवीय यातनाये झेलना पडेगा यह सब करना पडेगा इसलिये हमारे संगठन को हर कीमत पर जुझारु व अपने को बलिदान कर देने वाले समर्पित साथियों की आवश्यकता जिसका संगठन बडी बारीकी अपने योग्य समर्पित सिपाहियों को हीरे की भांति सहेज रहा है। और समय ही बतायेगा कि हमारे संगठन मे कितना दम है "सर फरोसी की तमन्ना अब हमारे दिल मे है, देखना है जोर कितना बाजुऐ कातिल मे है।

जयहिन्द ! जय पत्रकार !! जय अखिल भारतीय सर्वहितकारी पत्रकार महासंघ, भारत !!!

घनश्याम प्रसाद सागर

राष्ट्रीय अध्यक्ष

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22-09-2018 13:41:49

सहमत