दिल्‍ली में पत्रकार रोहित सरदाना के समर्थन में निकली पदयात्रा

01-12-2017 16:44:14 पब्लिश - एडमिन


अभी अपने एक परिचित मास्‍टर की दीवार से पता चला कि कल रोहित सरदाना के समर्थन में दिल्‍ली में 400 मीटर की एक पदयात्रा निकली थी। न कोई न्‍योता, न कोई सूचना। पता होता तो अपन भी चलते। बाद के लिए ठीक रहता। पूछिए क्‍यों? मेरे पास बनारस से एक सूचना आई थी कि सरदाना के खिलाफ़ कुछ हिंदू संगठन मुकदमा करवाने जा रहे हैं। अकेले बनारस में ही नहीं, दो-चार और जगहों पर। चौंक गए? दरअसल, सरदाना ने जो विवादित ट्वीट किया था उसमें एक तकनीकी लोचा था जिससे करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। थोड़ा देर से सही। समझने में टाइम जो लगता है। समझाता हूं।

असल में सरदाना ने जिस फिल्‍म का नाम लेकर ट्वीट किया है, सीबीएफसी यानी फिल्‍म प्रमाणन बोर्ड के आदेश के बाद उसका नाम बदलकर 'एस दुर्गा' कर दिया गया था। आधिकारिक नाम 'एस दुर्गा' ही है। अब कानूनन आप 'एस दुर्गा' के नाम से ही कोई बात करेंगे। सरदाना अतिउत्‍साह में चूक गए। उन्‍होंने मुसलमानों और ईसाइयों को उकसाने के लिए ट्वीट में फिल्‍म का प्रतिबंधित मूल नाम लिख दिया। यह बात सौ करोड़ हिंदुओं को देरी से समझ आई। जब तक समझ आती, तब तक कुछ दर्जन मुसलमान सरदाना के खिलाफ़ और कुछ दर्जन हिंदू सरदाना के साथ खड़े हो चुके थे। लेकिन सौ करोड़ के आगे एकाध दर्जन की क्‍या बिसात? तो खबर है कि सरदाना के खिलाफ़ कुछ हिंदू संगठन सौ करोड़ हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का मुकदमा करवाने जा रहे हैं कि उन्‍होंने देवी दुर्गा के नाम के पहले अश्‍लील व सीबीएफसी द्वारा 'प्रतिबंधित' शब्‍द क्‍यों जोड़ा।

मैं इस मुकदमे की निंदा करता हूं। यह अभिव्‍यक्ति की आज़ादी पर हमला है। लिहाजा इस मामले में मैं सरदाना के साथ खड़ा हूं। इसीलिए मुझे कल जाना चाहिए था। बहरहाल, सवाल उठता है कि कल जो दो-चार दर्जन राष्‍ट्रवादी प्रेस क्‍लब तक पदयात्रा किए थे, वे क्‍या इन हिंदू संगठनों के मुकदमे के बाद सरदाना के साथ खड़े रहेंगे? अपने मास्‍टर साहब ने तो बाकायदे सरदाना के ट्वीट को अपना कवर फोटो ही बना लिया है। जिन्‍होंने भी ऐसा किया है, उसका केस हिंदू संगठनों के लिए बोनस है। मुझे शंका है कि सरदाना जैसा एक प्रखर हिंदू पत्रकार और उनके कट्टर समर्थक इस प्रकरण में शिया-गति को प्राप्‍त न हो जाएं।

(पत्रकार अभिषेक श्री वास्तव जी की एफबी वॉल से)