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दुनिया के दुख टीवी पर दिखाने वाले हो गए षडयंत्र के शिकार। आखिर कौन है वह साजिश कर्ता, जो नम्बर वन चैनल की लगा रहा है वाट।

21-01-2018 22:36:25 पब्लिश - एडमिन



80 के दशक का ये मशहूर गीत तो आपने सुना होगा। (यह अंधा कानून है।) लेकिन आज बात यहा अदालत के कानून की नही बल्कि मीडिया के कायदे-कानून की हो रही है। हमारे भारत मे एक ऐसा नेशनल टी वी न्यूज  चैनल भी है जहां का कानून सिर्फ़ अंधा नहीं बल्कि गूंगा और बेहरा भी है हम बात कर रहे की कैसे उत्तराखंड में आजतक के मेहनती सिंट्ररगरो को लेकर आजतक के एक मीडिया मठाधीश द्वारा की गई साजिशो का शिकार हुए पत्रकारों के खुलासे की वो भी क्रमवार जानकारिया, मे जिसकी आजतक प्रबंधन ने जांच करनी भी उचित नहीं समझी, के आखिरी क्यूँ आजतक संस्थान के प्रति समर्पित उत्तराखंड में ही एक के बाद एक सिंट्रगर कैसे और क्यों हटाए जा रहे थे।  

1- लखनऊ से नियुक्त हुए      2016 मे रुड़की से आजतक के मेहनती सिंट्रगर रहे हरिओम को हटाया गया। बिना किसी जांच व बिना किसी कारण । कुछ दिनों बाद रूडकी मे। ही एक ऊची अप्रोच से रखी गई पत्रकार की भी खबरे अप्रूव होनी बदं होने लग गई है कारण उक्त पत्रकार ने मठाधीश की शिकायत करने की हिम्मत दिखाई थी। 

2- 2016 मे लखनऊ आफिस से रखे गये हरिद्वार मे आजतक के सिंट्रगर डॉ. रूपेश शर्मा (आईबीएन आदि प्रतिष्ठित चैनल मे कार्यरत)को हटाया गया। बिना किसी जांच व बिना किसी कारण। 

3- लखनऊ से नियुक्त हुए    उधमसिंह नगर से तेज तर्रार अनुज कुमार को तो पता ही नही चल पाया कि उन्हें हटा दिया गया, जब उन्होंने सम्पर्क करने की कोशिशें की तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। 

4- 2013 उत्तराखंड में आई भीषण आपदा की कवरेज करके लखनऊ से नियुक्त की गई ऋषिकेश महिला सिंट्रगर को (अनूप श्रीवास्तव जी के हटने के तुरंत बाद) 2017 मार्च में जांच के बिना ही एक फर्जी आरोप में   हटाया गया, आखिर क्यों? कुछ दिनों बाद ही ऋषिकेश की उभरती पत्रकार ने उक्त व्यक्ति के आश्वासन पर कुछ स्टोरिया भेजी लेकिन मठाधीश द्वारा अपना मतलब सिद्ध ना होने पर उक्त पत्रकार को भी हटा दिया गया 

5- कुमाऊ आजतक के वरिष्ठ पत्रकार गीतेश त्रिपाठी जी आजतक के एक्टिव पत्रकार होने के बावजूद भी आज हाशिए पर है,क्यो?

6- नैनीताल के लीला सिंह जी, जो आजतक मे खबरो को भेजने के एवज में कोई पैसा प्रबंधन से नहीं लेते है, भी उक्त व्यक्ति से कई बार प्रताड़ित हो चुके है, जिसका प्रमाण स्क्रीन शाट है। 

इन पत्रकारों मे से डॉ. रूपेश शर्मा ने तो एक नेशनल चैनल से हरिद्वार जिले में मजबूत तरीके के साथ अपनी वापसी कर चुके बाकि पत्रकार भी मेहनत के साथ संघर्ष कर रहे है, लेकिन उत्तराखंड आजतक के मठाधीश के सताये बाकी के कुछ पत्रकार मात्र लखनऊ से हुई नियुक्ति की  सजा भुगत रहे है। तो वहीं दूसरी तरफ बाकी के बचे पत्रकार मान्यवर को उगाही ना करने की सजा के हकदार बन बैठे है। (fvo) अब सवाल यह उठता है की क्या आज तक मे दिन रात हर मौसम का सामना करते हुए पत्रकारिता करने वाले इन पत्रकारों के आकारण हटाये जाने का आज तक प्रबन्ध संपादक श्री सुप्रीया प्रसाद, श्री राहुल कवल, या समूह संपादक श्री अरूण पुरी जी को संज्ञान नहीं लेना चाहिए था, क्या आजतक प्रबंधन की जिम्मेदारी नही बनती की, कि उत्तराखंड में ही क्यो एक के बाद एक सिंट्रगर को हटाने का सिलसिला शुरू हुआ। हरिद्वार के संजय आर्य से शुरू हुआ यह सिलसिला ऋषिकेश महिला सिंट्रगर तक लगभग आठ पत्रकारों के पत्रकारिता जीवन को सिर्फ इसलिए लील गया कि मेहनत के साथ संस्थान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे।

no1 चैनल में काम कर रहे धर्म नगरी के एक पत्रकार की सुचना पर ये रिपोर्ट 

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सोनू पाल made a post.
21-01-2018 22:51:09

ये तो वो ही बात हुई कि घर का भेदी लंका ढाये ऐसे पत्रकार जो अपने चैनल को ही बदनाम करवा रहा है

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सोनू पाल made a post.
21-01-2018 22:54:05

ऐसे पत्रकार को कोई हक नही काम करने का बाहर निकालो ऐसे पत्रकार को चैनल से