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मेवाणी के रवैये पर बंटे टवीटर यूजर !

21-01-2018 22:53:00 पब्लिश - एडमिन


गुजरात से हाल ही में विधायक चुने गये युवा दलित नेता जिग्नेश मेवाणी द्वारा ‘रिपब्लिक टीवी’ के संवाददाता को पत्रकार वार्ता से बाहर चले जाने की बात पर मीडिया जगत में काफी गहमागहमी है। पत्रकारों से लेकर राजनीतिज्ञ तक इस पर अपनी प्रतिक्रिया देने से नहीं चूके रहे। कोई जिग्नेश को सही बता रहा है तो कोई गलत। किसी ने पत्रकारों की एकता की तारीफ की। उल्लेखनीय है कि रिपब्लिक टीवी को पीसी से बाहर चले जाने की बात पर तमाम पत्रकारों ने पीसी का बहिष्कार कर दिया था। बहिष्कार करने वालों में रिपब्लिक टीवी के प्रतिद्वन्द्वी टाइम्स नाउ भी शामिल हुआ।
दो पत्रकारों के टवीट से इस बात का खुलासा हुआ कि इस मुददे पर दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरिवन्द केजरीवाल तथा पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसौदिया का रवैया जुदा जुदा है। टवीट युद्ध की शुरूआत हुई वरिष्ठ पत्रकार और प्रख्यात लेखक राहुल पंडिता की प्रतिक्रिया से। पीसी के बहिष्कार पर राहुल ने टवीट किया-‘ब्रेवो’। राहुल का मानना है कि उन्हें पत्रकारों की ऐसी एकजुटता की आशा नहीं थी। राहुल के इस टवीट पर एक टवीटर यूजर (प्दकपंम्गचपदमक) ने तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा कि-‘‘यह बेहद शर्म की बात है क्योंकि रिपब्लिक पत्रकारिता के नैतिक मापदंडों को नहीं मानता है, भाजपा के फंड से चल रहा ये चैनल उसके विरोधियों के पीछे पड़ता है।’

उन्होंने अतीत की घटना का उल्लेख करते हुए शशि थरूर और मेवाणी के पीछे रिपब्लिक टीवी के पत्रकार लगे हुए है। जवाब में राहुल पंडिता ने लिखा कि थरूर ने चैनल से बात न करना तय किया था लेकिन किसी रिपोर्टर को पीसी से बाहर निकलने को नहीं कहा था। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए लिखा कि मनीष सिसौदिया ने लोकसभा चुनावों के दौरान  बनारस में सुदर्शन टीवी को इन्टरव्यू देने से साफ मना कर दिया था लेकिन उन्होंने चैनल रिपोर्टर को भगाया नहीं था बल्कि चाय आफर की थी। मनीष सिसौदिया की तारीफ पर इस चर्चा में एएनआई की एडिटर स्मिता प्रकाश भी सम्मिलित हो गयी। 
खास बात यह है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल की उस समय एएनआई से तनातनी चल रही थी। केजरीवाल ने भी जिग्नेश मेवाणी की तर्ज पर एएनआई संवादाता को प्रेस कान्फ्रेेंस से बाहर कर दिया था। इस पर राहुल पंडिता ने जवाब दिया कि ष्। उपेजंामए पद उल अपमूण् ज्वजंससल नदंबबमचजंइसमण्ष्।
बहरहाल अस टवीट जंग में पत्रकारों और नेताओं के बीच का फर्क टवीटर यूजर के वाकयुद्ध से साफ नजर आया। केजरीवाल और सिसौदिया के पत्रकारों से किये गये व्यवहार में इस अन्तर की वजह यह हो सकती है कि सिसौदिया खुद भी जर्नलिस्ट रहे हैं जबकि केजरीवाल नौकरशाही से राजनीति में आये हैं। सिसौदिया पत्रकारिता क्षेत्र की मजबूरियों को समझते हैं।

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dharmendra jatav mp made a post.
22-01-2018 22:25:16

jai bhim jagdish mevani ji