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विवादों के झंझावत से गुजर कर पर्दे पर पहुंची फिल्में

08-02-2018 18:12:38 पब्लिश - एडमिन




समाज का आईना कही जाने वाली फिल्मों ने देशवासियों को एक से बढ़कर एक कालजयी फिल्मे दी हैं। स्व. बिमल राय की दो बीघा जमीन हो या मुंशी प्रेमचंद के उपन्सास पर आधारित गोदान अथवा स्व. महबूब खान की ‘मदर इंडिया’, के. आसिफ की मुगले आजम, बीआर चोपड़ा की गीत रहित फिल्म कानून, एनएन सिप्पी की शोलेसहित दर्जनों क्या सैकड़ों फिल्मे है जिन्होंने टिकट खिड़की पर बिना किसी विवाद के रिकोर्ड कायम किये किन्तु पिछले कुछ वर्षों के दौरान कुछ नया दिखाने की चाह में फिल्ममेकर ऐसी राह पर चल पड़े जिनके चलते फिल्म विवादों में फंसी। राजनीतिक पृष्ठभूमि पर गुलजार की फिल्म ‘आंधी’ को लेकर जबरदस्त आक्रोश सड़कों पर नजर आया। आरोप था कि फिल्म आंधी श्रीमती इन्दिरा गांधी के जीवन काल को तोड़ मरोड़कर बनायी गयी। गुलजार की आंधी विवादों की आंधी से दो चार होने के बावजूद काफी सफल रही थी। दीपा मेहता की ‘फायर’ को लेकर विवाद हुआ कि उसमें भारतीय संस्कृति को गलत ढंग से चित्रित किया गया है। बालीवुड के किंग खान की माई नेम इज खान, आमिर की पीके और रंग दे बंसती भी विवादों के पथ से गुजरते हुए स्क्रीन पर पहुंची। संयोग यह है कि विवादों के बावजूद इन फिल्मों में फिल्ममेकर्स की तिजोरी को भर दिया।
ळाल में प्रदर्शित संजय लीला भंसाली की चितौड़ की महारानी पदमावती पर फिल्म भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की सर्वाधिक विवादास्पद फिल्म कही जा सकती है। इस फिल्म को लेकर सड़कों पर जो उत्पात हुए उसे देखते हुए कई राज्य की सरकारों ने फिल्म के प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी होने की आशंका क ेचलते हाथ खड़े कर दिये जिस पर उन्हें सर्वोच्च न्यायालय ने फटकारा भी। राजस्थान और हरियाणा में पदमावत को लेकर ज्यादा विरोध प्रदर्शन हुए। इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाने वालों ने पदमावती का किरदार निभाने वाली दीपिका पादुकोण का नाक काटने की चेतावनी दी जिस पर काफी हो हल्ला हुआ।
आईये आज आपको बताते हैं उन फिल्मो के बारे में जिन्हें लेकर समाज आन्दोलित हुआ।
गीतकार, लेखक और फिल्ममेकर गुलजार निर्मित ‘‘आंधी’’ कांग्रेस शासन काल में प्रतिबन्धित कर दी गयी थी। कहा जाता है कि यह फिल्म तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के राजनैतिक कैरियर पर आधारित थी। इस फिल्म में आवश्यक बदलाव हुआ। आखिरकार बैन हटाया गया। इसे दूरदर्शन पर भी प्रदर्शित किया गया।
बीआर चोपड़ा द्वारा बलात्कार की पृष्ठभूमि पर बनी ‘‘इंसाफ का तराजू’’ फिल्म को लेकर भी काफी हंगामा हुआ था। इसमें राज बब्बर ने बलात्कारी की भूमिका निभायी थी। इसमें अव्यस्क किशोरी पदमिनी कोल्हापुर के साथ रेप दृश्य फिल्माये जाने के विरोध में लोग सड़कों पर उतरे थे। विवादों के समापन पर फिल्म रिलीज हुई और बेहद कामयाब रही।
दस्यु सुंदरी फूलन देवी के जीवन पर बनी द बैंडिट क्वीन को लेकर भी काफी विवाद हुआ। फिल्म में नग्न दृश्यों और गालियों के प्रयोग लोगों को लेकर जनाक्रोश भड़का किन्तु फिल्म ने कामयाबी का परचम लहराया।
वर्ष 1993 के सीरियल बम ब्लास्ट की कहानी को बयान करती फिल्म ‘‘ब्लैक फ्राईडे’’पर दो वर्ष तक बैन रहा। इस फिल्म से बम धमाकों की जांच और फैसले के प्रभावित ने की आशंका है।
 
जिन फिल्मों को कुछ ज्यादा ही विरोध हुआ उनमें रामलाल नाहटा की बहुचर्चित फिल्म‘‘किस्सा कुर्सी का’’ भी है। आरोप लगा था कि यह फिल्म पूर्व पीएम स्व. श्रीमती इन्दिरा गांधी और उनके पुत्र संजय गाधी के राजनीतिक तौर तरीकों पर कटाक्ष करती है। मशहूर अदाकार शबाना आजमी और मंझे हुए चरित्र अभिनेता उत्पल दत्त ने फिल्म में अहम भूमिका निभायी थी।
गुजरात में 2002 में हुए वीभत्स साम्प्रदायिक दंगों की पृष्ठभूमि पर बनी नंदिता दास की फिल्म ‘‘फिराक’’ को लेकर भी विरोध प्रदर्शन हुए। हालांकि इस फिल्म को कई पुरुस्कार मिले। फिल्म को गुजरात में प्रदर्शित नहीं होने दिया गया था।
दीपा मेहता की फिल्म ‘‘फायर’’ में शबाना आजमी और नंदिता दास के दरम्यान फिल्माये गये समलैंगिकता के सीन का ेलेकर जमकर बवाल हुआ। महाराष्ट्र में शिवसेना और बजरंग दल जैसे संगठनों ने फिल्म के विषय को लेकर विरोध प्रदर्शन किये थे।दीपा मेहता की आश्रम में रहने वाली विधवाओं के जीवन पर आधारित ‘‘वाटर’’ को हिन्दू भावनाओं पर कुठाराघात करार देते हुए विरोध हुआ। प्रदर्शनकारियों ने फिल्म के पोस्टरों पर कालिख पोतने से लेकर जलाने तक की घटनाओं को अन्जाम दिया। फिल्म के निर्माण के दौरान भी बाधा पहुंचाई गई थी।
मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण अभिनीत ‘‘आरक्षण’’ फिल्म को लेकर भी हंगामा हुआ। जातिगत आरक्षण की समस्या पर बनी फिल्म आरक्षण को लेकर हुए हंगामे को देखते हुए उत्तर प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश और पंजाब में फिल्म का प्रदर्शन प्रतिबन्धित कर दिया गया था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय  के आदेश के बाद फिल्म को रिलीज किया गया।
वर्तमान में भाजपा सांसद परेश रावल की केन्द्रीय भूमिका पर आधारित बहुचर्चित फिल्म ‘‘ओह माई गाड’’ को लेकर भी लोगों की नाराजगी सामने आई।  धार्मिक मान्यताओं पर कटाक्ष करती इस फिल्म का हिन्दूवादी संगठनों ने विरोध किया कि इससे हिन्दुओं की भावनाएं आहत होती है। भारत की तर्ज पर संयुक्त अरब अमीरात में फिल्म बैन की गई।
पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की हत्या पर बनी फिल्म ‘‘मद्रास कैफे’’ को लेकर भी विवाद हुआ था। श्रीलंका मंे भारत के हस्तक्षेप की पृष्ठभुमि पर बनी इस फिल्म का सभी तमिल संगठनों ने विरोध किया था। जान अब्राहम ने फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई थी।
अन्ध विश्वास से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और रस्मो के विषय पर आधारित आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘‘पीके’’ भी बेहद विवादास्पद फिल्म करार दी गयी। बाद में फिल्म ने रिकार्ड कमाई कर सफल्ता के नये कीर्तिमान स्थापित किये।
किंग खान शाहरूख खान अभिनीत ‘‘माई नेम इज खान’’ भी शाहरूख खान के आईपीएल टूर्नामेंट में पाकिस्तानी क्रिकेटरों के खेलने की वकालत करने सम्बन्घित बयान के चलते विवादों में फंसी। शाहरूख के बयान को देशविरोधी बताते हुए शिवसेना सहित कई अन्य संगठनों ने फिल्म के प्रदर्शन में बाधाएं खडी की लेकिन फिल्म का विवादों में फंसना ही उसकी सफलता का रास्ता सरल कर गया।
 
सुपर स्टार आमिर खान के नर्मदा बांध की उंचाई बढ़ाने को लेकर दिये गये बयान के चलते फिल्म ‘‘फना’’ बेवजह विवादों में पड़ी। फिल्म को गुजरात में प्रतिबन्धित कर दिया गया। विरोध के चलते आमिर खान द्वारा प्रचारित वस्तुओं के बहिष्कार का रास्ता भी अपनाया गया।
अपनी मासूमियत और खूबसूरती को लेकर बालीवुड की मशहूर नायिका कैटरीना कैफ अभिनीत ‘‘बूम’’ कैटरीना और गुलशन ग्रोवर के दरम्यान गये एक  चुम्बन दृश्य को लेकर ‘‘बूूम’’ फिल्म का विरोध हुआ। हंगामें के बाद हालांकि उक्त सीन को फिल्म से हटा दिया गया लेकिन फिल्म को साफ्ट पोर्न फिल्म करार  दिये जाने के चलते विवाद खड़ा हुआ।
कश्मीर में भारतीय सैनिकों की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लगाने वाली फिल्म ‘‘हैदर’’ को लेकर भी हंगामे हुए। शाहिद कपूर, तब्बू और श्रद्धा कपूर की भूमिकाओं से सुसज्जित फिल्म को संवेदनशील मानते हुए पाकिस्तान, अरब देशों में बैन कर दिया गया था। अरब सेंसरशिप बोर्ड ने फिल्म को आपत्तिजनक कहा था।
अपनी बेपनाह खूबसूरती को लेकर अपने समय में खासी चर्चित रही स्लिक स्मिता के जीवन पर आधारित ‘‘द डर्टी पिक्चर’’ अपने पोस्टर और स्मिता के भाई द्वारा फिल्म निर्देशक को भेजे गये कानूनी नोटिस के चलते विवादों में फंसी।
गुजरात के दंगों पर ही आधारित फिल्म ‘‘परजानिया’’ में वैसे गुजरात का फिल्माकंन नहीं था लेकिन एक सामजिक संगठन के अभियान के बाद फिल्म को गुजरात के कुछ ही हिस्सों में रिलीज किया जा सका था।
‘‘एक छोटी सी लव स्टोरी’’ की नायिका मनीषा कोईराला ने ही फिल्म को रोकने की मांग करते हुए कोर्ट में अपील दायर कर फिल्म को विवादित बना दिया था। मनीषा ने आरोप लगाया था कि फिल्म में उन्हें गलत ढंग से दिखाया गया जबकि वह उस सीन में ही नहीं है।
‘‘रंग दे बसंती’’ के विरोध के कारणों में न धर्म था न संस्कृति किन्तु फिल्म में घोड़े का इस्तेमाल ही इसके विरोध का कारण बन गया था। पशु और पर्यावरण को समर्पित भाजपा सांसद और केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी ने फिल्म में घोड़े के इस्तेमाल पर एतराज जताया था। फिल्म में पशु सरंक्षण और उनके अधिकारों की पैरवी की गई थी।
विवादित फिल्म ‘‘आरक्षण’’ का निर्माण करने वाले प्रकाश झा की फिल्म ‘‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’’ को फिल्म सेंसर बोर्ड ने प्रमाणित करने से इन्कार कर दिया था। सेंसर बोर्ड ने फिल्म को महिला प्रधान करार देते हुए इसे वास्तविकता से परे बताया था। फिल्म सेंसर बोर्ड के अनुसार इसमें फिल्माये गये यौन सीन और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करने के साथ साथ पोर्नोग्राफी है जो समाज के विशेष वर्ग के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
पंजाब में चुनौती बन चुकी नशे की लत पर बनी फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’को लेकर संेसर बोर्ड और निर्माता के बीच विवाद गहराया गया था। बोर्ड ने फिल्म में 89 कट सुझाये थे जिन्हें निर्माताओं ने नहीं माना। नतीजन फिल्म का प्रदर्शन का मामला हाईकोर्ट पहुंचा जहां से महज एक कट के बाद फिल्म को रिलीज करने को हरी झंडी दी थी।


 
 

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