आधारकार्ड की सुरक्षा की पोल खोलने वाली पत्रकार रचना पर मुकदमा

08-01-2018 18:25:20 पब्लिश - एडमिन


चंडीगढ़। केन्द्र सरकार के आधार सम्बन्धी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित होने के दावे को गलत साबित करने वाली दैनिक ट्रिब्यून’ की पत्रकार रचना खैरा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किये जाने से मीडिया जगत स्तब्ध है। पत्रकारों ने सरकारी की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस काम के लिए रचना को शाबासी दी जानी चाहिए थी उसके लिए उसे दंडित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है।
गौरतलब है कि दैनिक ट्रिब्यून की पत्रकार रचना खैरा ने आधार कार्ड में दर्ज आम आदमी की जानकारी महज पांच सौ रूपये में बिकने सम्बन्धी खबर लिखी थी जो ट्रिब्यून में प्रमुखत से छपी। रचना ने जुटाई गई जानकारी के आधार पर लिखी खबर में खुलासा किया कि उसने व्हाटसअप द्वारा एक व्यक्ति से ऐसा साफ्टवेयर प्राप्त किया जिसके जरिये मात्र पांच सौ रूपये में किसी भी व्यक्ति के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। रचना के अनुसार उन्होने साफ्टवेयर के एवज एजेंट को पांच सौ रूपये का भुगतान पेटीएम से किया। रचना की खबर के मुताबिक मात्र दस मिनट के भीतर एजेंट ने उन्हें एक लॉगिन आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया जिसके जरिये पोर्टल पर किसी भी आधारकार्ड धारक की गोपनीय जानकारियां प्राप्त की जा सकती थी। इन जानकारियों में कार्ड धारक का नाम, पता, मोबाइल नम्बर आदि सब कुछ शामिल हैं। रचना की खबर में इस बात का खुलासा किया गया है कि एजेंट ने तीन सौ रूपये में ऐसा साफ्टवेयर उपलब्ध कराया जिससे किसी भी आधारकार्ड धारक की गोपनीय जानकारियों का प्रिंट लिया जा सकता है। रचना ने अपनी खबर में दावा किया है कि आधार कार्ड की जानकारी लीक करने वाले इस गिरोह में लगभग एक लाख लोग ऐसे शामिल हैं जिन्हें इलेक्ट्रोनिक्स और तकनीकी मंत्रालय ने कामन सर्विस सेंटर स्कीम के तहत आधार कार्ड बनाने का काम सौंपा था। गत वर्ष नवम्बर में सरकार ने डाटा लीक होने के खतरे की संभावना के चलते सर्विस संेटर से काम वापस ले लिया था। रचना ने दावा किया है कि पैसे के लोभ में विलेज लेवल एंटरप्राईजेज ने आधारकार्ड धारकों की जानकारी का दुरूपयोग किया है। रचना की यह खबर छपते ही हडकम्प मच गया। 
हैरत इस बात पर है कि इस सनसनीखेेज खुलासे के लिए रचना की प्रशंसा होने के बजाय उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है जबकि गोपनीय जानकारी लीक करने वाले आरोपियों की धरपकड़ को कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। मीडिया जगत का कहना है कि सरकार जानकारी पूरी तरह सुरक्षित होने की बात कहकर महज लीपापोती कर रही है। आरोपियों को पकडने के बजाय उल्टे खुलासा करने वाली पत्रकारसे पूछा जा रहा है कि उसने कितने लोगों के फिंगरप्रिंट या अन्य जानकारी देखे। अगर नहीं देखे तो डाटा सुरक्षित मान लिया जायेगा। गौरतलब है कि आधार कार्ड में दर्ज तमाम जानकारियां पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा करते हुए केन्द्र सरकार तमाम सरकारी योजनाओं को आधारकार्ड से लिंक कराने पर बल दे रही हैं। रसोई गैस कनेक्शन, बैंक खाता और मोबाइल नम्बर को आधार से लिंक कराने का जोरशोर से प्रचार प्रसार किया जा रहा है। आधारकार्ड को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में वाद विचाराधीन हैं। उल्लेखनीय है कि पहले आधार कार्ड को स्वेच्छा पर रखा गया था मगर अब अनिवार्य कर दिया गया है। इसी को लेकर कुछ लोगों ने आधार कार्ड में दी जाने वाली जानकारियों को निजता के अधिकार के उल्लंघन बताते हुए न्यायालय में जनहित याचिका दायर की है जिस पर अन्तिम निर्णय आना बाकी है।
बहरहाल रचना खैरा की दैनिक ‘ट्रिब्यून’ में प्रकाशित खबर से आधार कार्ड में दर्ज जानकारियों के पूरी तरह सुरक्षित होने के दावे पर सवाल खड़े हो गये हैं। मीडिया जगत की मांग की है कि सरकार को उन लोगों की धरपकड़ की कोशिश करनी चाहिए जो पैसे के लोभ में जानकारी बेचने का काम कर रहे हैं न कि ऐसी पत्रकार पर मुकदमा दर्ज करना चाहिए जिसने आम आदमी की सुरक्षा से जुड़े अहम मामले की खामियों का भंडाफोड़ किया है।
 

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