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खिलजी की खलनायकी पर जर्नलिस्ट श्वेता की मुहर

20-01-2018 19:29:31 पब्लिश - एडमिन


राजस्थान के गौरवशाली इतिहास के स्वर्णिम अध्याय का पर्याय माने जाने वाले चित्तौड़ गढ़ की रानी पदामावती के नाम पर बनी संयज लीला भंसाली की बहुचर्चित फिल्म ‘पदमावती’ के विरोध में मशहूर महिला पत्रकार श्वेता सिंह ने माउंट आबू के प्राचीन मंदिर में स्थापित मूर्तियों की नाक अलाउद्दीन खिलजी द्वारा तोड़े जाने के ऐतिहासिक तथ्य को उजागर कर अलाउददीन खिलजी के खलनायक होने की पुष्टि कर दी है। माउंट आबू पहुंची आज तक की मशहूर पत्रकार श्वेता सिंह ने अपने टविटर हैंडल पर दिलवाड़ा के प्रसिद्ध जैन मंदिर में अलाउददीन खिलजी की करतूतों ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ अपने प्रशंसकों के सामने रखा तो सैकड़ों लोग में गुस्से की लहर व्याप्त हो गयही। पदमावती के विरोध के चलते ही पहले से ही गर्म माहौल में श्वेता के टविट ने माहौल में और ज्यादा गर्मी पैदा कर दी है।

shweta singh
Sweta Singh Aajtak

श्वेता के टवीट पर पांच हजार से अधिक बार रि-टवीट किया जा चुका है जबकि तकरीबन 12 हजार लाईक्स आ चुके है। कमेंटस की तादाद नौ सौ है। किसी कार्यवश राजस्थान के मशहूर पर्यटन स्थल माउंट आबू पहुंची ‘आज तक’ की मशहूर एंकर श्वेता सिंह ने दिलवाड़ा मंदिर की अदभुत संुदरता से अभिभूत होकर लिखा कि यहां पर करीब सौ मूर्तियों की नाक कटी हुई है। पूछताछ में पता चला कि यह दुष्कृत्य भी चित्तौड़ पर हमला करने वाले खिलजी ने किया था। श्वेता ने ऐतिहासिक तथ्यों को सामने रखते हुए टवीटर पर लिखा कि अलाउददीन खिलजी ने चित्तौड़ पर 1303 में आक्रमण किया था। उसके आठ सााल बाद खिलजी ने 1311 में चित्तौड़ से लगभग ढाई सौ किमी दूर माउंट आबू क्षेत्र पर हमला किया था। मूर्तियां खण्डित की, द्वार तोड़े और जमकर लूटपाट की थी। इतिहास बताता है कि दुनिया के अजूबों में शामिल ताजमहल से पांच सौ साल पूर्व निर्मित दिलवाड़ा के जैन मंदिर की लागत ताजमहल पर हुई राशि से दोगुनी है। मंदिर के प्रत्येक पत्थर पर हुई दिलकश नक्काशी कामगारों की मेहनत को दर्शाती है।

खिलजी के हमले के एक दशक बाद मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था। छह सौ साल बाद यानि 1906 में पाटन निवासी लल्लूभाई जयचन्द ने काफी मरम्मत करायी थी। वर्ष 1950 में आनंद जी कल्याण जी ने इसे आधुनिक रूप देने के सहायता प्रदान की। विश्वभर के इतिहासकार और आर्किटेक्ट इस ऐतिहासिक मंदिर को देखने आते है। मंदिर के जीर्णाेद्धार और आधुनिक स्वरूप देने के बावजूद मंदिर की मूर्तियों के संग की गयी खिलजी की करतूत से छेड़छाड़ नहीं की गयी अर्थात मूर्तियां की नाक वैसी की वैसी ही है। इतिहास गवाह है कि हमलावर मंदिरों को लूटने के बाद ऐसा ही करते थे। श्वेता के टवीट पर कमेंटस करके लोग उन्हें मंदिरों के बारे में भी जानकारी देते हुए चैनल पर शो बनाने का अनुरोध कर रहे हैं।

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vijay made a post.
20-01-2018 19:38:11

good

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20-01-2018 19:58:19

बहुत बढ़िया आर्टिकल छापा हैं भाई ने !