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पत्रकार व पत्रकारिता की अदम्य ताकत

मित्रों हम सभी पत्रकार महाबली मारुति नंदन हनुमान की तरह अदम्य ताकत रखते हैं हमे हनुमान जी की तरह अपनी अद्भुत शक्तियों का अनुमान तब लगता है जब हमारे कुछ तेज तर्रार वरिष्ठ साथी पत्रकार हमारी शक्तियों का सहज ही अनुमान करा देता है हमारी ताकत हमारी कलम की लिखने की पुर्ण स्वतंत्रता है जो बडे बडे बाहुबलियों, सत्ता के दलालों, जिलो  व तहसीलो पर बैठे वे बेईमान व भ्रष्टाचार मे लिप्त कुछ अधिकारी व कर्मचारी जो सीधे तौर पर  देश व प्रदेश की राजधानियों से नियन्त्रित होतें है पत्रकार के सम्मान से खेलना उन्हे कोई महत्व नही देना यहाँ तक कि पत्रकारों को बेवकूफ बनाने की भयंकर भूल करना उनकी आदतों मे शुमार है जब भी पत्रकारों का उत्पीड़न होता है उसमे स्थानीय प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका से इंकार नही किया जा सकता । हमारे संविधान ने स्पष्ट शब्दों मे भारतीय शासन ब्यवस्था के तीनो महत्वपूर्ण अंगो न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका को यह निर्देश दे रखा है कि हर कीमत पर नि:शुल्क देश और समाज के लिए काम कर रहे पत्रकारों को प्रथम वरीयता प्रथम सम्मान अवश्य किया जाये इसका प्रमाण सरकारी बसों मे अगली सीटें पत्रकारों को आरक्षित किया गया रहता है रेलवे स्टेशन के टिकट खिडकी पर विशेष लाईन पत्रकारों  के लिए आरक्षित रहता है देश की आजादी के बाद कुछ सालों तक इसका पालन होता रहा लेकिन आज जो नई पीढी सरकारी नौकर बनकर आये जो नई पीढी राजनीति मे आई वह पत्रकारों के साथ अमर्यादित हो चली है। क्योंकि पुराने लोगो को पत्रकारों की भूमिका जो आजादी की लडाई मे रही याद था चाहे गांधी जी का अहिंसक आंदोलन रहा या क्रान्तिकारियों का मिशन उन्हे पत्रकार ही अपनी लेखनी से आम जनता तक पहुचाकर आजादी की लडाई के लिए प्रोत्साहित करते रहे। इसलिए सभी पूर्व राजनेताओं ने पत्रकार व पत्रकारिता को प्रथम और लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहकर सम्मानित किया। संविधान सभा के सदस्यों ने संविधान निर्माण करते समय पत्रकार व पत्रकारिता को पुर्ण स्वतंत्रता प्रदान करते हुये कहा पत्रकार किसी का नौकर नही होगा उसे कोई वेतनमान देय नही होगा वह अपने अखबार के लिए एक नौकर न होकर अखबार का प्रतिनिधि होगा उस पर किसी का भी दबाव नही होगा वह अपने विवेक के अनुसार सत्य जरुर लिखेगा उस पर अखबार मालिकान भी दबाव नही बना सकता लेखनी जब स्वतंत्र होगी सत्य बाते आम जनता के बीच जायेगी कानून व ब्यवस्था मे सुधार होगा आम जन का न्याय का मार्ग प्रशस्त होगा इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पत्रकारों को जनप्रतिनिधियों व नौकरशाहों को हार्दिक तौर पर प्रथम सम्मान व प्रथम वरीयता देनी होगी । लेकिन आज दुर्भाग्यपूर्ण है पत्रकारों का सम्मान  प्रभावित हुआ है नेता और नौकरशाह पत्रकारों सभी आम लोगों की श्रेणी मे रखने की भारी व भयंकर भूल कर रहे हैं जो एक स्वच्छ लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। आज अगर पत्रकार अपनी शक्तियों को जागृत कर दिया  तो इतिहास बदल जायेगा आज बेईमानो व भ्रष्टाचारियों के चंगुल मे देश गुलाम बन चुका है बेईमान रुपी इन तथाकथित अंग्रेजों से एक उदीयमान भारत को आजादी दिलानी ही पडेगी पत्रकारों को अपनी मारुति नंदन हनुमान की तरह अपनी अदम्य शक्तियों को जागृत करना पडेगा। ताकि आने वाली पीढियो को एक सशक्त भारत और एक विकसित भारत का सुन्दर भारत मिल सके।*

*जय हिन्द ! जय पत्रकारिता !! जय पत्रकार !!!*

*पत्रकार घनश्याम प्रसाद " सागर " जनपद कुशीनगर 8174007782 , 9450070381*
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