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कहासुनी

हाई प्रोफाइल और लो प्रोफाइल पत्रकार की मौत का फर्क

गौरी लंकेश की हत्या से पूरा मीडिया जगत आक्रोशित और उद्वेलित है। नि:सन्देह लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन उनकी हत्या की घोर निन्दा करती है।

 

लेकिन गौरी लंकेश की हत्या ने एक सवाल सामने खड़ा कर दिया है कि क्या यूपी के एक दबंग मंत्री के खिलाफ आवाज उठाने वाले पत्रकार जगेन्द्र का खून पानी थामध्य प्रदेश के सन्दीप कोठारी की जला कर जगघन्य हत्या कम दर्दनाक थीओडिसा के स्थानीय टीवी चैनल के लिए स्ट्रिंगर तरुण कुमारहिंदी दैनिक देशबंधु के पत्रकार साई रेड्डीमहाराष्ट्र के पत्रकार और लेखक नरेंद्र दाभोलकररीवा में मीडिया राज के रिपोर्टर राजेश मिश्राडेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाख आवाज बुलंद करने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति इन सबकी मौत इतनी सस्ती क्यों थीक्यों रामचन्द्र छत्रपति की एक भी खबर बड़े चैनल की हैडलाइन नहीं बनी थीवो दिल्ली के बड़ॆ अस्पताल में 20 दिन तक मौत से जूझते रहे और उनका बयान तक दर्ज नहीं किया गया था।

क्या गौरी लंकेश की मौत पर इतना शोर इसलिये है क्योंकि गौरी लंकेश एक हाई प्रोफाइल पत्रकार थीं?

गौरी लंकेश की हत्या के दूसरे दिन ही बिहार में एक और पत्रकार को गोली मारी गईक्या कोई बड़ा जर्नलिस्ट फिर दिल्ली प्रेस क्लब पर अपना समय देने जाएगादरअसल आज पत्रकारिता में भी जातिवाद हैऊंच नीचबड़ा छोटा है। जब क्षेत्रीय पत्रकारों और अखबारों के खिलाफ कुछ भी होता है तब बड़ा और पावरफुल मीडिया खामोश होता है। टीवी मीडिया खासतौर से।

लेकिन लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन खामोश नहीं है। लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन (लीपा) इस विषय पर ना सिर्फ आवाज उठा रही है बल्कि जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एक्ट के लिये सिफारिशें भी सरकार को दे चुकी है।

ये वो कदम है जिसकी हम सरकार से अपेक्षा करते हैं लेकिन हमारे लिये इतना ही काफी नहीं है। इसलिये लीपा ने पत्रकार जगेन्द्र की हत्या के बाद वर्ष 2015 में अपनी ओर से एक बहुत शक्तिशाली पहल भी की थी। वो थी जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन टीम। हम सभी साथियो से आवाहन करते हैं कि रीजनल मीडिया की ताकत का परिचय दें और जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन टीम का हिस्सा बनें। लीपा का शुरू से ही मानना रहा है कि जब तक सरकार रीजनल मीडिया के लिये कुछ नहीं कर रही तब तक हम अपना विकल्प तैयार रखें। जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन टीम ऐसा ही एक विकल्प है। लीपा ने रीजनल मीडिया की आर्थिक सुरक्षा के लिये भी सरकार को अपनी संस्तुतियां सौंपी हैं। लेकिन जब तक सरकार उस पर ठोस रूप से काम नही करती तब तक लीपा मिशन वेबसाइट और प्रोजेक्ट शक्ति के रूप में आर्थिक सुरक्षा के विकल्प पर काम कर रही है।

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डीएवीपी ने जारी की दूसरी लिस्ट, जल्द शुरू होगा रेट रिन्यूअल

रीपैनल्ड पेपर्स की डीएवीपी ने की दूसरी लिस्ट जारी, जल्द शुरू होगा रेट रिन्यूअल

·         रीपैनल्ड पेपर्स की दूसरी लिस्ट में हैं 137 अखबार

·         जल्द आयेगी अगली लिस्ट

·         जल्द शुरू होगा रेट रिन्यूल

·         नये आवेदनो पर विचार के लिये पीएसी का हुआ गठन

डीएवीपी ने 137 नये अखबारों की सूची जारी की है जिन्होंने अपना सर्कुलेशन 45 हजार से कम करने के बाद सभी जरूरी दस्तावेज डीएवीपी में जमा करवा दिये थे। सूत्रो के मुताबिक अभी अन्य अखबारों की सूची भी जारी की जाएगी। उनकी स्क्रूटनी का काम अभी जारी है।

डीएवीपी के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक जल्द ही रेट रिन्यूअल की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। उनके मुताबिक एनआईसी विभाग में दिक्कतो के कारण रेट रिन्यूअल का काम ...................................................पूरी खबर पढ़ॅने के लिये यहाँ क्लिक करें

DAVP issued Second list of Re-panel Newspapers, Renewal will start soon

DAVP has issued the second list of the newspapers those reduced their circulation figure and they had completed the documentation regarding this. In this list 137 papers has been included. DAVP said that another list will be issued soon as the process is on different level of scrutiny.

 

Another news is coming from DAVP is soon the renewal process will.........................Click here to read the whole news 


 

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भड़ास४मीडिया के संपादक यशवंत पर हमला आई गंभीर चोट

भड़ास4मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह पर चार सितंबर की रात करीब साढ़े दस बजे प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के गेट पर जानलेवा हमला हो गया. यशवंत को बुरी तरह से मारा-पीटा गया और गालियां दी गई. भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह ने अपनी फेसबुक वाल पर घटना की जानकारी देते हुए लिखा, ''अटैक हो गया गुरु। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के गेट पर। बहुत मारा पीटा मुझे। पार्ट ऑफ जॉब ही है। भूपेंद्र सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी की कारस्तानी है। जाने किस खबर की बात करके पीटा उसने।'' इस हमले में यशवंत का चश्मा टूट गया और नाक, कान, गर्दन, होंठ पर चोट आई है.

यशवंत ने बताया कि भूपेंद्र सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी प्रेस क्लब के अंदर तो काफी अच्छे मिले. तारीफ की. लेकिन वे पूरी योजना से थे. बाहर गेट पर इंतजार कर रहे थे. जब यशवंत बाहर निकले तो भूपेंद्र सिंह भुप्पी ने हाथ मिलाने के बहाने पास बुलाया और हमला कर दिया. इस दौरान अनुराग त्रिपाठी मोबाइल से वीडियो बनाने लगा. वहां मौके पर वरिष्ठ पत्रकार रुबी अरुण भी मौजूद थीं जो हमलावर को बार बार रोक रही थीं लेकिन भुप्पी और अनुराग दोनों लगातार कह रहे थे कि 'इसे मार खाने दो, बहुत खबरें छापता है'. इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से यशवंत हक्के बक्के थे और लगातार भुप्पी से कह रहे थे कि आखिर गुस्सा किस बात पर है, प्रेस क्लब के अंदर तो तुम ठीक थे, बाहर अचानक क्या हो गया?

भुप्पी हमले के दौरान कुछ बरस पुरानी छपी भड़ास की खबरों का जिक्र कर रहा था. ज्ञात हो कि भूपेंद्र सिंह भुप्पी रहने वाला गाजीपुर का है लेकिन चंडीगढ़ में केपीएस गिल की खानदान की एक लड़की से शादी करने के बाद अब नोएडा और चंडीगढ़ सेटल हो गया है. आजतक के लिए पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के ब्यूरो चीफ के बतौर एक जमाने में काम करता था पर किन्हीं कारस्तानियों के कारण उसे निकाल दिया गया. फिर उसने महुआ न्यूज चैनल ज्वाइन किया जहां वह फिर अपनी कारस्तानियों के कारण असफल साबित हुआ और अब मीडिया से ही बाहर हो चुका है. उन दिनों इसी से संबंधित खबरें भड़ास पर छपा करती थीं.

अनुराग त्रिपाठी भी महुआ में भुप्पी के साथ था और आजकल खुद को तहलका / न्यूज लांड्री के साथ कार्यरत बताता है. यशवंत ने प्रेस क्लब आफ इंडिया के प्रबंधन को हमले के बाबत लिखित शिकायत दे दी है. साथ ही एक लिखित कंप्लेन पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दी है. यशवंत ने पहले एफआईआर न करने का निर्णय लिया था लेकिन अपने देश भर के हजारों साथियों समर्थकों के अनुरोध पर थाने में लिखित कंप्लेन देने का फैसला कर लिया.

यशवंत का कहना है कि दो पत्रकारों का किसी खबर को लेकर एक पत्रकार पर हमला करना पत्रकारिता के आजकल के निम्नतम स्तर को दर्शाता है. जब हम पत्रकार खुद ही मानसिक लेवल पर सामंती / आपराधिक सोच रखते हैं तो कैसे इस लोकतांत्रिक देश में मीडिया की निष्पक्षता की बात सोच सकते हैं. कलम का जवाब कलम ही हो सकता है, हथियार या हमला नहीं. यशवंत ने भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी को बेहद कमजोर आदमी करार देते हुए कहा कि ये माफी के योग्य हैं, इन्हें खुद नहीं पता कि ये क्या कर बैठे हैं. ये लोग सामने कुछ कहते-बोलते हैं और पीठ पीछे छुरा घोंपने को तैयार रहते हैं. ऐसे दोहरे व्यक्तित्व और आपराधिक मानसिकता के लोग अगर मीडिया में हैं तो यह मीडिया की दयनीयता / दरिद्रता को ही दिखाता है. एक आदमी जो अकेले और निहत्था है, उस पर अचानक से घेर कर हमला कर देना कहां की बहादुरी है. उम्मीद करते हैं कि भुप्पी और अनुराग में अगर थोड़ी भी पत्रकारीय सोच-समझ होगी अकल आएगी और अपने किए पर पश्चाताप करेंगे. 


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वरिष्ठ महिला पत्रकार को घर में घुसकर मारी गोलियां, मौके पर ही मौत

वरिष्ठ महिला  पत्रकार गौरी लंकेश की बंगलुरु में गोली मारकर हत्या कर दी गई ! "पत्रकारों में भारी आक्रोश फैल रहा है"
बताया जा रहा है कि चार से पांच अज्ञात हमलवरों ने राज राजेश्वरी इलाके में स्थित गौरी के घर में घुसकर उन पर काफी करीब से फायरिंग की, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई!
गौरी लंकेश जो की अपने घर वापस जा रही थी की वो अपने घर के बाहर पहुंची और उन्होंने गाडी से उतारकर अपने घर का गेट खोला ही था की अज्ञात 4 से 5 हमलावरों ने उनपर फायरिंग कर दी करीब 5 राउंड फायर किये गए जिससे मौके पर ही महिला पत्रकार गौरी की मौके पर ही मौत हो गयी !
गौरी लंकेश साप्ताहिक मैग्जीन ‘लंकेश पत्रिके’ की संपादक थीं और इसके साथ ही वो अखबारों में कॉलम भी लिखती थीं टीवी न्यूज चैनल डिबेट्स में भी वो एक्टिविस्ट के तौर पर शामिल होती थीं, लंकेश के दक्षिणपंथी संगठनों से वैचारिक मतभेद थे ! वहीं इस हमले के बाद गौरी लंकेश के भाई ने साजिश माना है. लंकेश के भाई इंद्रजीत ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि इस केस की जांच सीबीआई से करवाई जाना चाहिए ...I
इस घटना पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दुख जताया | सिद्धारमैया ने ट्वीट कर बताया कि उन्होंने इस संबंध में डीजीपी से बात की है सिद्धारमैया ने घटना की गहन जांच के आदेश दिए हैं !
वहीं सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर काफी गुस्सा नजर आ रहा है , कई नेताओं ने ट्वीट कर हमले की आलोचना की है ! स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव ने इस घटना को पनसारे और कलबुर्गी से जोड़कर देखा| वहीं गीतकार जावेद अख्तर ने भी नाराजगी जताई।
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने  इस हृदयविदारक घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है.जोबट प्रेस क्लब के समस्त पत्रकारों ने भी घटना की निंदा की है ।


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राम रहीम के बाद अब बालकृष्ण हो सकते हैं सीबीआई का अगला शिकार

राम रहीम के बाद अब सीबीआई का अगला शिकार बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण हो सकते हैं। आचार्य बालकृष्ण के पासपोर्ट मामले की जांच कर रही सीबीआई की एक टीम सोमवार को हरिद्वार नगर निगम में मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी और एक लिपिक से आचार्य बालकृष्ण के जन्म प्रमाण पत्र मामले में गहन पूछताछ की। प्रमाण पत्र से जुड़े दस्तावेज भी टीम ने खंगाले।

आचार्य बालकृष्ण ने 1997 में हरिद्वार नगर निगम से जन्म प्रमाण पत्र बनवाया था। प्रमाण पत्र बनवाने में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने के आरोप में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की जांच सीबीआई कर रही है। वर्ष 2011 में पहली बार सीबीआई की टीम ने हरिद्वार नगर निगम पहुंचकर गहन तफ्तीश की थी। लेकिन आचार्य बालकृष्ण के जन्म प्रमाण पत्र से सम्बंधित दस्तावेज की पूरी फाइल ही गायब पाई गई थी।

इसके बाद सीबीआई की टीम ने तत्कालीन निगम अधिकारियों और करीब छह लिपिकों से भी पूछताछ की थी। लेकिन उसके बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। अब छह वर्ष बाद सोमवार को अचानक सीबीआई के दो अधिकारी नगर निगम हरिद्वार पहुंचे। सीबीआई ने करीब एक घंटे तक दोनों से उक्त प्रकरण में पूछताछ की।

कुछ दस्तावेजों की जानकारी भी जुटाई। पड़ताल पूरी करने के बाद टीम वापस लौट गई। मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि सोमवार को सीबीआई टीम के दो सदस्य नगर निगम पहुंचे थे। उन्होंने आचार्य बालकृष्ण के जन्मप्रमाण पत्र सम्बंधित पत्रावली की जानकारी मांगी थी। उक्त पत्रावली नहीं मिली है।