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आजतक no1, ABP ने लगाई छलांग, इंडिया टीवी लुढ़का

20-07-2019 14:59:15 पब्लिश - एडमिन

  • आजतक no1, ABP ने लगाई छलांग, इंडिया टीवी लुढ़का

अट्ठाइसवें हफ्ते की टीआरपी ने तो कमाल ही दिखा दिया कई न्यूज़ चेनलो की तो लगता है बल्ले बल्ले हो गई इंडिया टीवी भी मुँह के बल जा गिरा ये तो ऐसा हो वही अगर बात करे अम्बानी के चैनल न्यूज़ 18 की तो न्यूज़ 18 दूसरे no पर आ सकता है ऐसा हम नहीं ऐसा ये आकड़...

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भारत के पत्रकारों के लिए संजीवनी का काम करेगा सरकार का यह कदम

19-07-2019 17:37:29 पब्लिश - एडमिन

जैसे ही सरकार ने पत्रकारों को शैक्षणिक योग्यता निर्धारण करेगी,और प्रेस पास जारी सरकार का जिला सूचना विभाग जारी करेगा। फौरन पत्रकार श्रम और नियोजन विभाग के उपर मुकदमा दर्ज कराकर सरकारी वेतनमान,भत्ता और आजीवन पेंशन की मांग भी उठायेंगे सरकार का यह कदम भारत के पत्रकारों के लिए संजीवनी का काम करेगा। दिल्ली। सरकार द्वारा हाल ही इस बात के संकेत मिले है कि अब पत्रकारों को शैक्षणिक योग्यता और बीजे और और डिप्लोमा अनिवार्य होगा यहाँ तक सम्पादकों और मालिकों को भी इस अहर्ताओं का पालन अनिवार्य होगा अब पत्रकार बनाने के लिए सम्पादक जिला मजिस्ट्रेट और जिला सूचना अधिकारी को प्रार्थना पत्र देंगे कि मुझे यहाँ यहाँ प्रतिनिधि पत्रकारों की जरुरत है फिर सूचना अधिकारी जाँच कर उसकी रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट को देगा फिर जिला मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद सम्पादक पत्रकार नियुक्ति कर सकेंगे इसके जिला सूचना विभाग द्वारा उक्त पत्रकार को प्रेस परिचय पत्र और स्टीकर दिये जायेंगे इसका मतलब यह हुआ अब पत्रकार किसी समाचार संस्थान का ब्यक्ति न होकर सीधे तौर पर सरकार द्वारा नियुक्त माना जायेगा और इस तरह वह सरकार से सरकारी वेतनमान, भत्ता और पेंशन का हकदार हो जायेगा अगर सरकार ने पत्रकारों से बिना श्रमिक दिये पत्रकारिता करवाया तो उसके उपर श्रम एवं नियोजन विभाग मे मुकदमा भी दर्ज होगा और पत्रकारों के मानदेय देने के लफडे से समाचार पत्र संस्थान मुक्त हो जायेंगे सरकार का यह कदम भारत के पत्रकारों के लिए संजीवनी बन जायेगा जो कि एक सुखद संयोग होगा। दिलचस्प यह भी है कि अगर कोई पत्रकार पढ लिख कर ,डिप्लोमा लेकर पत्रकारिता मे उतरेगा तो उसे नियमानुसार वेतना भत्ता पेंशन जरुर चाहिए वह मुफ्त मे काम क्यों करेगा उसके पास भी परिवार व परिजन हैं इसलिए मुफ्त पत्रकारिता का जोखिम पढा लिखा योग्य पत्रकार कदापि नही लेगा भारत के पत्रकारों को सरकार के इस कदम का जल्दी से जल्दी लागू होने का इंतजार करना चाहिए और समय मिलते ही पुरी सरकारी मशीनरी को कोर्ट मे घसीट लेना चाहिए आजाद के बाद पत्रकारों को केवल मौखिक चौथा स्तम्भ बनाकर बिना को ई सुरक्षा सुविधा दिये मुफ्त मे पत्रकारिता करवाने की गंदी प्रवृत्ति पर विराम लग जायेगा देश मे सरकार और पत्रकारों मे एक नये जंग की शुरुआत भी हो जायेगी हालांकि इस जंग मे समाचार संस्थाओं को मुश्किलों के दौर से गुजरना पडेगा और संघर्ष बढने पर देश का सूचना तंत्र भी बुरी तरह प्रभावित होगा अब तक पत्रकार हाई स्कूल, इंटरमीडिएट शिक्षा की योग्यता पर भी सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से समाचारों का संकलन करते सूचना का आदान प्रदान सरकार और आम जनता तक बिना कुछ श्रमिक फल पाये करते रहे हैं आर्थिक रुप से खस्ताहाल समाचार संस्थाओं के लिए विज्ञापन संग्रह कर महज कुछ कमीशन पर समाचार संस्थाओं को जीवित रखे हुए थे योग्य डिप्लोमा धारी पत्रकार किसी कीमत समाचार संस्थाओं के लिए विज्ञापन संग्रह नही करेगा वह साईकिल से मोटरसाइकिल से सुदूर गाँवो से समाचार संकलन भी नही करना चाहेगा क्योंकि उसकी योग्यता इतनी है कि वह अन्य किसी भी विभाग क्लास टू की सरकारी नौकरी कर शानदार जीवन जी सकता है तो वह भटकना क्यों चाहेगा कुल मिलाकर देश मे सरकार के इस कदम से विस्मय मे डालने वाले घटनाएं घटेंगी और पत्रकार और सरकार के साथ मालिकान भी आमने सामने होंगें। घनश्याम प्रसाद सागर, राष्ट्रीय अध्यक्ष,सर्वहितकारी पत्रकार महासंगठन ।। भारत।। दिल्ली   आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें ...

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प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष संजय आर्य की माता जी के निधन पर हरिद्वार प्रेस क्लब मे शोक सभा

19-07-2019 14:28:02 पब्लिश - एडमिन

हरिद्वार प्रेस क्लब में बृहस्पतिवार को आयोजित शोक सभा में क्लब के पूर्व अध्यक्ष संजय आर्य की माताजी श्रीमती सरोज देवी आर्य के निधन पर शोक जताया गया। उनके निधन को समाज के लिए क्षति बताते हुए वक्ताओं ने भगवान से उनकी आत्मीय शांति के लिए प्रार्थना की इसके साथ ही क्लब के महामंत्री महेश पारीक के साले महेश कुमार तथा क्लब के सदस्य शिवांग अग्रवाल की नानी मां के निधन पर भी शोक जताया गया। ऋषिकेश के वरिष्ठ पत्रकार अशोक अश्क को भी श्रद्धांजलि दी गई। बैठक में क्लब के अध्यक्ष राजेश शर्मा, महामंत्री महेश पारीक, कोषाध्यक्ष राजकुमार, पूर्व अध्यक्ष डॉ शिव शंकर जायसवाल, प्रोफेसर पी एस चौहान, अविक्षित रमन, डॉ रजनी कांत शुक्ला, दीपक नौटियाल, कुमार दुष्यंत, संदीप शर्मा, सरवन झा, मुदित अग्रवाल, रामेश्वर दयाल शर्मा, राजेंद्र नाथ गोस्वामी, बाल कृष्ण शास्त्री, अश्विनी अरोड़ा, लव शर्मा, मुकेश वर्मा, धर्मेंद्र चौधरी, आशीष मिश्रा, सुनील दत्त पांडे, रामचंद्र कनौजिया, पुरुषोत्तम शर्मा, सुदेश आर्य, सरवन आर्य, राजीव तुम्बडिया,मनोज खन्ना, राधेश्याम विद्याकुल, संजीव शर्मा, दयाशंकर वर्मा, नरेश दीवान शैली समेत बड़ी संख्या में क्लब के सदस्य मौजूद रहे।   आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें ...

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उत्तराखंड शाशन त्रिपक्षीय समिति गठित से पत्रकारों में रोष

19-07-2019 14:20:31 पब्लिश - एडमिन

उत्तराखंड राज्य में समाचार पत्रों के प्रतिष्ठानों में कार्यरत पत्रकार व गैर पत्रकार कर्मचारियों को मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों के कार्यान्वयन हेतु गठित त्रिपक्षीय अनुश्रवण समिति   की घोषणा शासन द्वारा की गई है जिसका कार्यकाल 3 वर्ष का होगा, जो समय समय पर अपनी संस्तुति शासन की भेजेगी । इस त्रिपक्षीय अनुश्रवण समिति में समाचार पत्रों के प्रतिस्थानों से अमर उजाला,के प्रबंधक राहुल चौहान व दैनिक जयंत,कोटद्वार के मालिक नागेंद्र उनियाल , पत्रकारों के प्रतिनिधि के रूप में एच एन एन के अरुण शर्मा व दैनिक जागरण के सम्पादक कुशल कोठियाल तथा गैर पत्रकार प्रतिनिधि के रूप में आर एस एस के मीडिया प्रतिनिधि हिमांशु अग्रवाल व कोटद्वार के मुकेश नेगी को नामित किया गया है । ये नामित सभी बन्धु मीडिया कर्मियों की समस्याओं से वाकिफ हैं, या उनकी समस्याओं से न्याय करने में सक्षम हैं , हमें तो नही लगता, फिर भी इनसे आशा करते हैं कि ये समिति उत्तराखंड में स्थापित समाचार पत्र प्रतिष्ठानों में कार्यरत पत्रकार व गैर पत्रकारो की सूची व उनको दिया जाने वाले   वेतनमान अन्य सुविधाओं की जानकारी मांग लें । यह भी देखें कि किन किन समाचार पत्रों में स्थायी कर्मचारियों के स्थान पर ठेकेदारी प्रथा लागू हैं । कितने कर्मचारियों को वेतन की बजाय मानदेय दिया जा रहा है । कितने कर्मचारी स्थायी व कितने अस्थायी हैं । हमारे देखते देखते मीडिया कर्मियो के लिए पालेकर अवार्ड, बच्छावत आयोग, मेहसाणा आयोग व अब मजीठिया वेज बोर्ड आया है देखते है कितना पालन होता है इस बोर्ड की सिफारिशों का । अच्छा होता इस समिति में उत्तराखंड में श्रम विभाग में पंजीकृत पत्रकार यूनियनों के प्रतिनिधियों को नामित किया जाता । वे मीडिया कर्मचारियों के साथ सही न्याय कर पाते । समाचार पत्रों के प्रतिस्ठानो में कार्यरत मालिक, प्रबन्धक, संपादक अपने अधीन कर्मचारियों के हितों से क्या सही न्याय कर पाएंगे । फिर भी हम नई मनोनीत अनुश्रवण समिति से आशा करते हैं कि वे मीडियाकर्मचारियों के हितों को प्रथमिकता देगें ।                डॉ. वी डी शर्मा ,  महासचिव, देवभूमि पत्रकार यूनियन, उतरा खंड, पंजीकृत आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें ...

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अतिक्रमण मुक्त हुआ गोखले मार्ग, धरने पर बैठा पत्रकार

19-07-2019 13:53:45 पब्लिश - एडमिन

  • अतिक्रमण मुक्त हुआ गोखले मार्ग, धरने पर बैठा पत्रकार

कोटद्वार-- पत्रकार अपनी पर आ जाये तो क्या नही कर सकता, पत्रकार को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ यू ही नही कहा जाता इसके हटने मात्र से ही गगन चुम्भी रौब भी धरासायी हो जाते है ठीक उसी प्रकार दो दिन से लगातार अतिक्रमण के खिलाफ धरने पर बैठ रहे पत्रकार प्रवीन थ...

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देशभर में पत्रकारों के लिए लागू होने जा रही है नियमावली,

19-07-2019 13:48:33 पब्लिश - एडमिन

देशभर में पत्रकारों के लिए लागू होने जा रही है नियमावली, प्रेस कार्ड जारी करने से लेकर पंजीकरण और शैक्षणिक योग्यता का होगा निर्धारण* *नईदिल्ली 13 जुलाई* ।पत्रकारिता जगत में असामाजिक तत्वों के प्रवेश से चिंतित केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा समाचार पत्रों के पंजीकरण, समाचार पत्र/पत्रिका व टीवी चैनल तथा न्यूज एजेंसी द्वारा जारी प्रेस कार्ड के लिए नियमावली तैयार की जा रही है तथा मौजूदा नियमावाली में संशोधन किए जाने पर गंभीरता से मंथन चल रहा है। *मिली जानकारी के अनुसार* देशभर में बढ़ रहे अखबारी आंकड़े और पत्रकारों की बढ़ रही संख्यां से पाठकों की जागरूकता में वृद्धि हुई है। वहीं कुछ ऐसे चेहरों ने भी पत्रकारिता जगत में दस्तक दे दी है, जिसके कारण पत्रकारिता पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गए है। *पत्रकारिता क्षेत्र में होगी शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य-* बता दें कि समाचार पत्र, पत्रिका के पंजीकरण के बाद प्रकाशक व संपादक एक-दो अंक प्रकाशित कर अनगिनत लोगों को प्रेस कार्ड जारी कर देते है, जिनका पत्रकारिता से कोई लेना देना नहीं होता। ऐसे चेहरों की बदौलत पत्रकारिता पर जरूर उंगलियां उठती है। *हर गावं शहर मे कुछ* तथाकथित पत्रकार या समाचार पत्र मालिको ने कुछ लोगो को पैसे लेकर प्रेस कार्ड जारी कर रखे है जो पुलिस एवं टोलटेक्स नाको पर धोंस जमाते हैं. एेसे तथाकथित पत्रकारो से असली पत्रकार भी परेशान हो रहे है । पुलिस, प्रशासन एवं टोलटेक्स नाके वाले असली नकली मे फर्क नही कर पाते है। अब इस नियम के लागू होने पर तथाकथित फर्जी पत्रकारो से पुलिस प्रशासन पुछताछ कर उन सरगनाओ तक पहुचं सकेगी जिन्होने पैसे लेकर प्रेसकार्ड जारी कर रखे हैं.। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय* समाचार पत्र, पत्रिका के पंजीकरण के लिए आवेदक की शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता में डिग्री की शर्त को अनिवार्य करने जा रहा है। *समाचार पत्रों का प्रकाशन बंद कर सकती है केंद्र सरकार-* दैनिक समाचार पत्रों, न्यूज एजेंसियों व टीवी चैनल के रिपोर्टर के लिए संबंधित जिला मैजिस्ट्रेट की स्वीकृति उसकी पुलिस वैरीफिकेशन होने उपरांत जिला सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा प्रेस कार्ड तथा प्रैस स्टीकर जारी किए जाने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अन्य समाचार पत्र, पत्रिकाओं के प्रकाशक व संपादक का प्रैस कार्ड सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी किया जाएगा। सरकारी तंत्र द्वारा जारी प्रेस कार्ड व प्रेस स्टीकर ही मान्य होंगे। केंद्र सरकार द्वारा* उन समाचार पत्र व पत्रिकाओं का प्रकाशन बंद किया जा सकता है जिन्होंने पिछले तीन वर्ष से अपनी वार्षिक रिपोर्ट जमा नहीं करवाई। *प्रेस कार्ड बेचने वालों पर दर्ज होगा अपराधिक मामला*- चर्चा तो यह भी है कि किसी भी क्षेत्र से अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने वाला दैनिक समाचार पत्र, न्यूज चैनल, न्यूज एजेंसीज को प्रतिनिधि नियुक्त करने के लिए जिला मैजिस्ट्रेट को आवेदन करना होगा, जो जिला सूचना व संपर्क अधिकारी की तस्दीक उपरांत स्वीकृति प्रदान करेंगे। *जिला सूचना व संपर्क अधिकारी* अपनी रिपोर्ट में दर्शाएंगे कि अमूक दैनिक समाचार पत्र, न्यूज चैनल, न्यूज एजेंसीज को इस क्षेत्र से प्रतिनिधि की जरूरत है। *संशोधित नियमावाली* के चलते प्रैस कार्ड की खरीद-फरोख्त तथा प्रेस लिखे वाहनों पर सरकारी तंत्र की नजर रहेगी। तथ्य पाए जाने उपरांत अपराधिक मामला कार्ड धारक, कार्ड जारी करने वाले हस्ताक्षर तथा प्रैस लिखे वाहन के मालिक पर दर्ज होगा। जाहिर है केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की इस संभावित योजना पर अमल होने से पत्रकारिता का मानचित्र बदल जाएगा। *क्या कहती है पुलिस*– हम खुद प्रेस कार्ड वालो से परेशान है कैसे पता किया जाये की कौन सही पत्रकार है और कौन फर्जी इसके लिये जैसे ही आदेश आते है प्रेस लिखे सभी वाहनों की जाँच की जायेगी और जो भी सूचना जनसम्पर्क विभाग की लिस्ट मै नही होगा उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें ...

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श्रम विभाग उत्तराखन्ड ने पत्रकारों व गैर पत्रकारों को मजेठिया वेतनमान दिलाने को एक कमेटी का गठन किया

19-07-2019 13:41:48 पब्लिश - एडमिन

  • श्रम विभाग उत्तराखन्ड ने पत्रकारों व गैर पत्रकारों को मजेठिया वेतनमान दिलाने को  एक कमेटी का गठन किया

श्रम विभाग उत्तराखन्ड ने पत्रकारों व गैर पत्रकारों को मजेठिया वेतनमान दिलाने को  एक कमेटी का गठन किया है। कमेटी के गठन की पहल ठीक है  लेकिन सवाल यह है कि जिन लोगों को  इस कमेटी में रखा गया है क्या उन्हें मजेठिया व पत्रकारों की समस्याओ...

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दो पत्रकारों के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज

18-07-2019 23:41:01 पब्लिश - एडमिन

नगर पालिका परिषद हाथरस के चेयरमैन ने दो पत्रकारों के खिलाफ कोतवाली में कराया मुकदमा दर्ज। पुलिस जांच में जुटी, पूछताछ के लिए पत्रकार कैलाश पौनियां को बुलाया कोतवाली, पत्रकारों ने पुलिस को नहीं दिए सबूत, बोले सक्षम न्यायालय में देंगे सबूत।  हाथरस। पत्रकार कैलाश पौनियां पिछले कई दिनों से नगर पालिका परिषद हाथरस के भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट लिख रहे हैं,  पत्रकार कैलाश पौनियां द्वारा सोशल मीडिया पर की जा रही टिप्पड़ियां और पोस्ट जिले में चर्चाओं का विषय बनी हुई हैं। पौनियां की टिप्पणी सोशल मीडिया पर हलचल मचा रही हैं। उन्होंने दिनांक 23 जून 2019 को फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुपों पर शीर्षक-"' चेयरमैन के मंसूबों पर सांसद ने फेरा पानी, सांसद का प्रतिनिधि बताकर अधिकारियों पर रौब झाड़ना कर दिया शुरू""" से पोस्ट वायरल की। जिस पोस्ट से नाराज होकर हाथरस नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष आशीष शर्मा ने कोतवाली सदर हाथरस के प्रभारी निरीक्षक को विगत दिन प्रवेश राणा को प्रार्थना पत्र दिया था। कोतवाली सदर की पुलिस ने आज दोपहर को पत्रकार कैलाश पौनियां को फोन करके एसआई अनिल कुमार ने कोतवाली पूछताछ के लिए बुलाया ।  जहां कोतवाली में एसडीएम और सीओ मौजूद थे । सीओ सिटी और कोतवाल ने कैलाश पौनियां से पूछताछ की । ज्ञात हुआ है कि चेयरमैन हाथरस ने पत्रकार कैलाश पौनियां और आशीष सेंगर के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने के लिए कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है । पत्रकार कैलाश पौनियां से जब जानकारी की गई तो उन्होंने बताया कि आज कोतवाली सदर पुलिस ने मुझे कोतवाली फोन करके बुलाया था। उन्होंने बताया कि कोतवाल और सीओ ने शिष्टाचार और शालीनता के साथ व्यवहार किया और पूछताछ की, पुलिस ने सबूत मांगे पुलिस को हमने सबूत नहीं दिए क्योंकि सबूत सक्षम न्यायालय में दिये जायेंगे। पौनियां का कहना है की कि यह कदम चेयरमैन का आवाज को दबाने के लिए था । यह मीडिया की स्वतंत्रता पर खतरा है। चेयरमैन सच्चाई बर्दास्त नहीं कर पा रहे हैं । सच्चाई को दबाने का यह उनका कुत्सित प्रयास है। पत्रकार कैलाश पुनिया की रिपोर्ट  आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें ...

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बांबे हाईकोर्ट ने दिया मजीठिया वेज बोर्ड मामले में महाराष्टÑ सरकार को फिर से अखबारों की जांच करने का आदेश

18-07-2019 23:28:42 पब्लिश - एडमिन

बांबे हाईकोर्ट ने दिया मजीठिया वेज बोर्ड मामले में महाराष्टÑ सरकार को फिर से  अखबारों की जांच करने का आदेश ६ सप्ताह में सौंपनी होगी क्रिय.ान्यवन रिर्पोट महाराष्टÑ के समाचार पत्र कर्मियों के लिये एक बड़ी खबर आरही है। बांबे हाईकोर्ट  ने महाराष्टÑके लेबर कमिश्नर को स्पष्ट आदेश दिया है कि जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ज मामले मेंफिर से राज्य के सभी समाचार पत्रों और न्यूज एजेंसियों की जांच की जाये और  पूरी रिर्पोट सौंपी जाए।  उधर बांबे हाईकोर्टको आज महाराष्ट्र के श्रम आयुक्त द्वारा सूचित किया गया कि वह राज्य में समाचार पत्र और समाचार एजेंसी प्रतिष्ठानों में मजीठिया वेज बोर्ड अवार्ड के कार्यान्वयन का एक नया सर्वेक्षण करेगा। बृहन्मुंबई यूनियन आॅफ जर्नलिस्ट (बीयूजे) द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच जस्टिस अकिल कुरैशी और जस्टिस एस.एस. कथावला ने कहा कि सर्वेक्षण छह सप्ताह के भीतर पूरा किया जाना चाहिए और एक हलफनामे के साथ रिपोर्ट अदालत को सौंपी जानी चाहिए। इसके अलावा सरकारी वकील ने अदालत को सूचित किया कि श्रम विभाग ने राज्य भर के सभी समाचार पत्रों और समाचार एजेंसी कार्यालयों का निरीक्षण करने के लिए पांच दस्तों का गठन किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई बृहन्मुंबई यूनियन आॅफ जर्नलिस्ट्स (बीयूजे) के लिए पेश हुए। बीयूजे केअध्यक्ष एम.जे. पांडे ने इस खबर की पुष्टि करते हुये कहा कि राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले की फिर से जांच के लिये उन्होने पांच स्क्वायड बनाया है और यह सभी समाचार पत्र और न्यूज एजेंसियों की जांच करेंगी। इस जांच में स्थायी और ठेका कर्मचारियों को भी जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ और एरियर मिला है या नहीं इसकी भी जांच का आदेश  दिया गया है।  शशिकांत सिंह  पत्रकार और मजीठिया क्रांतिकारी  ९३२२४११३३५ आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें ...

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सरकार के नये कोड बिल में समाचार चैनलों के रिर्पोटर और कैमरामैन भी होंगे कवर

18-07-2019 23:24:07 पब्लिश - एडमिन

हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड बिल २०१९  पर सुप्रीमकोर्ट के जाने माने एडवोकेट उमेश शर्मा की राय, सरकार के नये कोड बिल में समाचार चैनलों के रिर्पोटर और कैमरामैन भी होंगे कवर, बिना वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट से छेड़छाड़ किये मीडियाकर्मियों को अतिरिक्त लाभ  केंद्रीय कैबिनेट ने हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड बिल २०१९ को मंजूरी दे दी।  इस बिल में पत्रकारों के लिये बने श्रमजीवी पत्रकार और अन्‍य समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा शर्तें और अन्‍य प्रावधान) अधिनियम १९५५ के साथ साथ श्रमजीवी पत्रकार (निर्धारित वेतन दर) अधिनियम १९५८ को भी शामिल किया गया है। इसपर कई लोगों ने संदेह जताया है कि वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट के इस बिल में शामिल होने पर पत्रकारों के अधिकार सुरक्षित नहीं रहेंगे। इस पर हमनेपत्रकारों के अधिकार की लड़ाई लड़ने वाले  सुप्रीमकोर्ट के जाने माने एडवोकेट उमेश शर्मा जी से बात की और उनसे निवेदन किया कि सरकार के हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड बिल २०१९ के ड्राफ्ट का  अध्ययन कर देशभर के पत्रकारों का मार्गदर्शन करें कि इससे पत्रकारों के अधिकार कितने सुरक्षित रहेंगे और इस बिल से पत्रकारोंको कितना फायदा, कितना नुकसान है। एडवोकेट उमेश शर्मा जी ने बिल के ड्राफ्ट का अध्ययन किया और अपनी राय रखी। उन्होने कहा कि इस बिल में   पत्रकारों के लिये बने श्रमजीवी पत्रकार और अन्‍य समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा शर्तें और अन्‍य प्रावधान) अधिनियम १९५५ के साथ साथ श्रमजीवी पत्रकार (निर्धारित वेतन दर) अधिनियम १९५८ शामिल किया जारहा है जिससे किसी प्रकार के डरने की कोई जरुरत मीडियाकर्मियोंको नहीं है। कुछ चीजों को भी नये बिल में शामिल किया जारहा है जिसमें आडियो विडियो भी शामिल किया गया है जिससे सिनेमा कामगारों के साथ साथ न्यूज चैनलों में काम करने वालेकैमरामैन और रिर्पोटरों की ड्युटी टाईम  भी तय होगी तथा एक तरीके से सरकार उन्हे भी इस बिल में कवर कर रही है जो अब तक वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट में अछुते थे। जिससे उन्हे कई लाभ मिलेंगे। उमेश शर्माने कहा कि अबतक वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट मेंड्युटी के दौरान दुर्घटना होने पर घायल होने या मीडियाकर्मियों के मृत्यु होने की दषा में उनके परिजन को मुआवजा का कोई प्रावधान नहीं था लेकिन  हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड बिल २०१९ में उसे भी शामिल किया गया है। उन्होने कहा कि इस बिल मे कुछ चीजों को और शामिल किया गया है जिसमें यह कानून बन जाने के बाद कंपनियों को अपने कर्मचारियों का सालाना हेल्थ चेकअप करना अनिवार्य होगा। यही नहीं कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए कैंटीन व उनके बच्चों के लिए झूलाघर (क्रेच) की सुविधा देनी होगी। इस  बिल में देश की सभी कंपनियों के कर्मचारियों को अब अपॉइंटमेंट लेटर देना जरूरी किया गया है।  साथ ही उन्हे वेतन देने का एक निश्चित दिन तय करना पड़ेगा।  महिलाओं के लिए वर्किंग आवर ६ बजे सुबह से ७ बजे शाम के बीच ही रहेगा। ७ बजे शाम के बाद अगर वर्किंग आवर तय किया जाता है तो सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। ये सब नया प्वाईंट है और बिना वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट से छेड़छाड़ किये मीडियाकर्मियोंको  ये सुविधायें दी जारही हैं जो अच्छी बात है। यह पूछे जाने पर कि इस बिल से समाचार पत्र कर्मियों को कितना फायदा होगा  या इससे समाचार पत्र कर्मियों को नुकसान होगा। इस पर उमेश शर्मा ने कहा कि पहले ऐसा कोई प्रोविजन नहीं था अब अगर इसे सरकार ला रही है तो यह बुरा नहीं है। मीडिया कर्मियों को इसमें अतिरिक्त लाभ ही मिलेगा। यह पूछे जाने पर कि बिल में अखबार मालिकों को सजा दिये जाने के प्रावधान में रियायत तो नहीं दिया जारहा है एडवोकेट उमेश शर्मा ने कहा कि हर कानून में सजा का प्रावधान है। उन्होने कहा कि वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट को इसमें एड किया गया है उसमेंसे कोई भी धारा चाहे वह १७ हो या कुछ और उसे हटाया या अलग नहीं किया जारहा है तो उसमें डरने की कोई बात नहींमुझे समझ मेंआरही है। यह पूछे जाने पर कि क्या इस कोड के जरिये सरकार पूर्व के सभी कानूनों को शिथिल कर कंपनियों के हित में नया कोड ला रही है ताकि इंवेस्टमेंट बढ़े और कंपनियों को ज्यादा फायदा हो? इस पर उमेश शर्मा ने कहा कि कोई कानून शिथिल नहीं हो रहा है। इसकेसमानानंतर क्या कोई कानूनी प्रावधान एक्ट में था. यह जो प्रावधान आये हैं वह पहली बार एक्ट में जोड़े गये हैं।  शशिकांत सिंह  पत्रकार और मजीठिया क्रांतिकारी  ९३२२४११३३५ आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें   ...

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