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विश्व पत्रकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष पर हुए जानलेवा हमले

27-08-2019 14:54:24 पब्लिश - एडमिन

विश्व पत्रकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष पर हुए जानलेवा हमले के विरोध में दिल्ली के जंतर मंतर में विशाल धरने का आयोजन उत्तर प्रदेश के विश्व पत्रकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव शंकर त्रिपाठी के ऊपर हुए जानलेवा हमले के विरोध में विश्व पत्रकार महासंघ के...

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मोदी सरकार अब सब भ्रष्टाचारियों को जेल में डालेगी

27-08-2019 14:48:59 पब्लिश - एडमिन

येदियुरप्पा, रेड्डी बंधुओं, शिवराज, हिमंता, मुकुल राय और ‘निशंक’ पर क्यों ढीली पड़ी सीबीआई और ईडी ? नई दिल्ली। पूर्व ग्रह मंत्री पी चिदंबरम के जेल में जाने के बाद भाजपा और उसके समर्थक ऐसा हल्ला मचा रहे हैं जैसे कि मोदी सरकार अब सब भ्रष्टाचारियों को जेल में डालेगी। भाजपा के कई नेताओं के भ्रष्टाचार में लिप्त होने के बावजूद उनका कोई बाल बांका न होना इस बात का प्रमाण है कि मोदी सरकार भी दूसरी सरकारों की तरह अपने विरोधियों से निपट रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले में कथित भ्रष्टाचार के आरोप में हुई गिरफ़्तारी को इस नजरिये से भी देखा जा रहा है कि मौजूदा गृहमंत्री अमित शाह को जब सीबीआई ने शोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था तो उस समय चिंदबरम गृहमंत्री थे। यदि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल से ही देखें तो 2014 में चुनाव जीतते ही भाजपा विपक्षी नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में कार्रवाई करने में जुट गई थी।  यदि भ्रष्टाचार में के आरोपों का सामना कर रह भाजपा नेताओं को ऐसे ही खुला छोड़ दिया जाता है तो मोदी का यह ‘भ्रष्टाचार विरोधी’ अभियान मात्र अपने विरोधियों को निपटने तक सीमित होकर रह जाएगा। देश से भ्रष्टाचार को खत्म करने का दावा करने वाली भाजपा ने हाल ही केंद्र में सत्ता का दुरूपयोग करते हुए  कर्नाटक में भ्रष्टाचार का चेहरा होने के बावजूद  बी.एस. येदियुरप्पा राज्य का मुख्यमंत्री बनाया है। जगजाहिर है कि येदियुरप्पा भूमि और खननघोटाले के आरोपी हैं। उनके यहां से बरामद डायरियों में शीर्ष भाजपा नेताओं और जजों और वकीलों को भारी रकम के भुगतान का ज़िक्र होने के बाद भी उन्हें मुख्यमंत्री जैसे पद से सुशोभित किया हुआ है।  सत्ता के दुरूपयोग से से वह अधिकतर आरोपों से बरी किए जा चुके हैं। येदियुरप्पा के खिलाफ जांच कर रही यही सीबीआई मोदी सरकार के सत्ता में येदियुरप्पा के प्रति नरम पड़ गई और उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं जुटाए गए। अब भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा खिलाफ भूमि घोटाले के एक मामले में जांच के आदेश दिए जा सकते हैं।  ऐसे ही बेल्लारी के रेड्डी बंधुओं का मामला है। कर्नाटक के 2018 के चुनावों से पहले सीबीआई ने 16,500 करोड़ रुपये के खनन घोटाले में किसी तार्किक जांच के पहुंचे बिना बेल्लारी बंधुओं के खिलाफ जांच को शीघ्रता से समेट लिया। इस मामले में मोदी सरकार का रेड्डी बंधुओं को यों ही जाने देना क्या साबित कर रहा है ?  भले ही रेड्डी बंधुओं का कुछ न हुआ हो हां उनके मामले को उजागर करने वाले वन सेवा के अधिकारी को मोदी सरकार ने इसी महीने बर्खास्त कर दिया। भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चला रही मोदी सरकार दूसरी पार्टियों से आकर मोदी और अमित शाह के सामने समर्पण कर नेताओं को पूरी तरह से संरक्षण दे रही है। पूर्वोत्तर के अमित शाह कहे जाने वाले हिमंता बिस्वा शर्मा कभी कांग्रेस पार्टी में होते थे और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप थे। किसी समय भाजपा ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा था और उनके खिलाफ एक बुकलेट तक जारी किया था। उन्हें गुवाहाटी के जलापूर्ति घोटाले का ‘मुख्य आरोपी’ बताया गया था। इस घोटाले को एक अमेरिकी निर्माण प्रबंधन कंपनी की संलिप्तता के कारण लुई बर्जर मामले के नाम से भी जाना जाता है। इस संबंध में अमेरिकी न्याय विभाग ने वहां के विदेशी भ्रष्टाचार कानून के तहत चार्जशीट भी दायर कर रखी है।  इसमें कंपनी पर एक अनाम मंत्री को रिश्वत देने का आरोप लगाया गया है। उस मंत्री की पहचान हिमंता के रूप में करने से लेकर उन्हें पार्टी में शामिल करने तक भाजपा ने एक लंबा रास्ता तय किया है। असम सरकार ने जांच को धीमा कर दिया है। ऐसा लगता है कि भाजपा भी मामले को सीबीआई को सौंपने की अपनी पुरानी मांग को भूल चुकी है। देश में हड़कंप मचा देने वाले व्यापम घोटाले में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री को 2017 सीबीआई ने क्लीन चिट दे दी थी। ऐसे में प्रश्न उठता है क्या किसी ओर सरकार में शिवराज सिंह इस तरह छूट सकते थे? यह ऐसे में हुआ जब सब जानते थे कि इस व्यापक परीक्षा घोटाले को उजागर करने वाले कई अधिकारियों और कई गवाहों यानी कि 40 से अधिक लोगों की रहस्मय परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। प. बंगाल में भाजपा वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भ्रष्टाचार के मामले में घेर रही है। जबकि तमाम आरोपों में लिप्त मुकुल रॉय को संरक्षण दे रखा है। पश्चिम बंगाल में अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए भाजपा ने घोटाले के दागी तृणमूल नेता मुकुल रॉय को गले लगा लिया। भाजपा भ्रष्टाचार को मिटाने के प्रति कितनी गंभीर है, यह इस मामले में पूरी तरह से स्पष्ट है। रॉय को भाजपा ने उस समय भाजपा में शामिल किया था जब एक स्थानीय चैनल की गुप्त रिकार्डिंग (नारद स्टिंग) में उन्हें और अन्य कई वरिष्ठ तृणमूल नेताओं को रिश्वत लेते दिखाए जाने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने उनसे पूछताछ की थी। सब जानते हैं कि मुकुल रॉय शारदा चिटफंड घोटाले में भी आरोपी हैं।  भाजपा का संरक्षण मिलते ही कानून के काम करने की गति धीमी हो गई है। रमेश पोखरियाल ‘निशंक’: जिन्हें मोदी ने शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय दिया है।  उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहने के दौरान उनका नाम दो बड़े घोटालों में आया था। एक भूमि से संबंधित और दूसरा पनबिजली परियोजनाओं से जुड़ा हुआ था। भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों के कारण उनके शासन की छवि इतनी बुरी थी कि भाजपा को उन्हें 2011 में पद छोड़ने के लिए बाध्य करना पड़ा था। क्योंकि अब उनको मोदी का संरक्षण प्राप्त है तो अब न तो सीबीआई को और न ही उत्तराखंड सरकार को पोखरियाल का भ्रष्टाचार नहीं दिखाई दे रहा है। उल्टे उन्हें मोदी सरकार के एक प्रमुख मंत्रालय की जिम्मेदारी दे दी गई है। भाजपा ने गत वर्ष महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे को पार्टी में शामिल कर उन्हें राज्यसभा का सांसद बनाया है। क्योंकि अब वह भाजपा में हैं तो सीबीआई और ईडी ने राणे के खिलाफ जांच करने या उनकी संपत्तियों पर छापे मारने का अपना रास्ता बदल लिया है। जगजाहिर है कि राणे पर धनशोधन और भूमि घोटालों के आरोप हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी छवि ‘विवादों के शीर्षस्थ परिवार’ की रही है। आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें  ...

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इज्जत के खातिर कत्ल

27-08-2019 14:41:21 पब्लिश - एडमिन

  • इज्जत के खातिर कत्ल

क्या यह 'ऑनर किलिंग' नहीं है ? 5 अगस्त 2019 को राजस्थान की असेम्बली ने ऑनर किलिंग जैसे जघन्य अपराधों की रोकथाम के लिये कानून पास किया और उसके अगले ही दिन 6 अगस्त 2019 की रात में इस प्रेमी युगल को मौत के घाट उतार कर शव इस तरह लटका दिए गए। शवो...

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सहारा-ग्रुप की सभी कंपनियों पर बैठाई जाये सीबीआई और ईडी की जांच 

21-08-2019 16:29:47 पब्लिश - एडमिन

"सहारा Q-शॉप" साबित होगा देश का सबसे बड़ा घोटालाबी सहारा-सेबी प्रकरण गर्माने पर सहारा क्यू शॉप में कन्वर्ट कर दिया था सहारा का पैसा सहारा-ग्रुप की सभी कंपनियों पर बैठाई जाये सीबीआई और ईडी की जांच  नई दिल्ली। वैसे तो सहारा की बुनियाद ही गड़बड़झाले पर रखी गई है पर गत दिनों जब सहारा के मुखिया सुब्रत राय पर शिकंजा कैसा गया तो सहारा में सहारा Q-शॉप एक ऐसी कंपनी बनी जिसमें निवेशकों का पैसा कन्वर्ट कर दिया गया। निवेशकों को छह साल में दोगुना पैसा देने का मोटा लालच देकर चुप करा दिया गया। जब इस पैसे को लौटाने का नंबर आया तो सहारा-सेबी मुकदमे का हवाला देते हुए यह कहकर उन्हें टरका दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने सहारा की कंपनियों में पैसा निकालने पर प्रतिबंध लगा रखा है। ऐसा माना जा रहा है कि क्यू शॉप के माध्यम से करीब 75 हजार करोड़ का घोटाला सहारा प्रबंधन ने किया है। यदि सहारा पर सीबीआई और ईडी जांच बैठ जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। सहारा में मामला भुगतान-विलम्ब या दिवालियापन का नहीं है बल्कि सहारा में कर्मचारियों, एजेंटों और निवेशकों को एक सोची समझी साजिश के तहत बेवकूफ बनाया जा रहा है। मामले की जांच तो हुई नहीं मामला कोर्ट-कचहरी में घूमता रहा। होना यह चाहिए था कि मामले की जांच किसी विश्वसनीय एजेंसी से करानी चाहिए थी। तब पता चलता कि कितने लोग प्रभावित हुए, कितने रूपये की धोखाघड़ी की गयी और क्या-क्या साजिशें रची गईं। मामले  ने जोर यहां आकर मारा जब दो वर्ष पहले सहारा Q-शॉप की भी भुगतान तिथि आ गयी और कम्पनी के माध्यम से भी निवेशकों का भुगतान नहीं हुआ। लोगों ने जब पैसे की मांग की तो उनसे कहा गया कि पैसे मिलेंगे क्योंकि मामला कोर्ट में चल रहा है। उनको बोला गया कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी कम्पनियों के अकाउंट सीज कर दिए हैं, जिसके कारण भुगतान नहीं हो रहा है। फिर एक धोखाघड़ी के तहत निवेशकों के साथ सहारा प्रबंधन ने षड्यंत्र रच डाला। सहारा Q-शॉप में जो जमाकर्ताओं के पैसे थे, उसे फिर एक नयी कम्पनी खोलकर उसमें "कन्वर्ट" कर दिया गया। अब फिर निवेशकों को यह कहकर टरकाया जा रहा है कि  पैसा दो साल में मिलेगा। अब स्थिति यह है कि सहारा Q-शॉप खुद को दिवालिया घोषित करने में लग गयी है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि सहारा Q-शॉप" में पैसा है ही कहाँ जो उसे दिवालिया घोषित किया जायेगा। मतलब निवेशकों का पैसा हड़पने का पूरा षड्यंत्र सहारा प्रबंधन ने रच दिया है। यदि सहारा के इस खेल को कोर्ट ने पहले ही समझ लिया होता और किसी एजेंसी से इसकी जांच करा ली होती तो आज निवेशकों और कर्मचारियों का पैसा सुरक्षित होता। यह मामला करीब "एक लाख करोड़" का होगा। आजकल सहारा प्रबंधन के खिलाफ सड़कों पर उतरे सहारा एजेंटों की मानें तो सहारा का "कन्वर्जन सिस्टम" एक सिस्टम नहीं है बल्कि एक साजिश के तहत की गई धोखाघड़ी है। ज्ञात हो कि गत साल सरकार ने बताया था कि सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआइओ) सहारा ग्रुप की कंपनी सहारा क्यू शॉप यूनिक प्रोडक्ट्स रेंज लि. की जांच कर रहा है। यह जाँच कंपनी के खिलाफ 744 शिकायतें मिलने के बाद शुरू की गई थी। जगजाहिर है कि सहारा ग्रुप पहले से कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी की जांच का सामना कर रहा है। सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लि. (एसआइआरईसीएल) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लि. (एसएचआइसीएल) द्वारा जनता से पैसा जुटाने के मामलों में जांच की जा रही है। दरअसल सहारा क्यू के खिलाफ शिकायतें मिलने के बारे में लोक सभा में यह मुद्दा उठा था, तब तत्कालीन वित्त राज्य मंत्री पोन राधाकृष्णन ने यह जानकारी दी। उन्होंने लिखित जवाब में बताया था कि मुंबई रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के एमसीए21 आंकड़ों के मुताबिक इस कंपनी के खिलाफ कुल 744 शिकायतें मिलीं। शिकायतों और कंपनी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच करने के लिए आरओसी ने विस्तृत जांच करने की सिफारिश की। इसके बाद कंपनी मामलों के मंत्रालय ने 31 अक्टूबर 2018 को एसएफआइओ द्वारा मामले की जांच कराने का आदेश जारी किया था पर आज की स्थिति यह है कि निवेशक और एजेंट पैसों के लिए सड़कों पर हैं।   आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें        ...

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सर्वहितकारी पत्रकार महासंगठन का स्थापना दिवस 5 सितम्बर को

21-08-2019 16:21:52 पब्लिश - एडमिन

  • सर्वहितकारी पत्रकार महासंगठन का स्थापना दिवस 5 सितम्बर को

सर्वहितकारी पत्रकार महासंगठन का स्थापना दिवस 5 सितम्बर को भारतवर्ष के पत्रकारों के 72 सालों से उत्पीड़न, हत्या और फर्जी मुकदमों मे फंसाकर उत्पीडन करने और आज तक पत्रकारों को संवैधानिक रुप से वंचित रखने केवल मौखिक तौर पर चौथा स्तम्भ कहकर उनका सामाजिक उ...

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विश्व में सबसे अधिक आधुनिक गुलाम वाले भारत की आजादी का जश्न

21-08-2019 16:02:34 पब्लिश - एडमिन

  • विश्व में सबसे अधिक आधुनिक गुलाम वाले भारत की आजादी का जश्न

विश्व में सबसे अधिक आधुनिक गुलाम वाले भारत की आजादी का जश्न नई दिल्ली। १५ अगस्त 1947 से हम हर साल बड़ी धूमधाम से स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री का सरकार की उपलब्धियों पर आधारित भाषण सुनते हैं और फिर अपने काम में लग जात...

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आजादी के विरोधी और अंग्रेजी हुकूमत के पैरोकार देशभक्त नहीं गद्दार

21-08-2019 15:44:01 पब्लिश - एडमिन

आजादी के विरोधी और अंग्रेजी हुकूमत के पैरोकार देशभक्त नहीं गद्दार हैं नई दिल्ली। आज की तारीख में उन क्रांतकारियों की आत्मा रो रही होगी, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। कांग्रेस की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले उन समाजवादियों की आत्मा भी आहत होगी, जिन्होंने देश में स्वराज का सपना देखा था। आज की तारीख में जब खुशहाली के रास्ते जाना चाहिए था ऐसे में भावनात्मक मुद्दे समाज पर हावी हैं। जो लोग आजादी की लड़ाई और आजादी के विरोधी, जिन्हें अंग्रेजी हुकूमत भाती थी वे आज न केवल आजाद भारत की सत्ता पर काबिज हैं बल्कि देश के संसाधनों के मजे भी लूट रहे हैं। आजादी के लिए सब कुछ लुटा दिये क्रांतिकारियों कर परिजन फतेहाल में गुरबत की जिंदगी काट रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस पर इन दिखावे के राष्ट्रवादियों का ढकोसला देखने को मिलेगा। देखना कैसे देश के सबसे बड़े देशभक्त होने का दावा किया जाएगा। 370 धारा खत्म करने के बाद इस स्वतंत्रता दिवस पर कैसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी को देश के सबसे बड़े नायक के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। आजादी की लड़ाई केे इतिहास का अध्ययन करें तो यह वह शख्स था जो अंग्रेजी हुकूमत में विश्वास रखता था और आजादी की लड़ाई खिलाफत करता था। बंगाल में संविद सरकार में उप मुख्यमंत्री रहते हुए जो पत्र इस व्यक्ति ने अंग्रेज गवर्नर को लिखा था। उसके आधार पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को देशभक्त कतई नहीं माना जा सकता है। मोदी सरकार के धारा 370 हटाने के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस पत्र को पढ़ने से स्पष्ट हो रहा है कि मुखर्जी न केवल आजादी की लड़ाई के विरोधी लग रहे हैं बल्कि अंग्रेजी हुकूमत के पैरोकार भी साबित हो रहे हैं। 26 जुलाई 1942 को लिखे मुखर्जी के उस पत्र के आधार पर अंग्रेजों के रहमोकरम पर मुस्लिम लीग और हिंदू महासभा ने मिलकर बंगाल में संविद सरकार बनाई थी। उस समय हिंदू महासभा के अध्यक्ष सावरकर और मुस्लिम लीग के मो. अली जिन्ना थे। 1942 को जब भारत छोड़ो आंदोलन छोड़ो आंदोलन छेड़ा गया तो बंगाल में  संविद सरकार के मुख्यमंत्री फजल उल हक और उप मुख्यमंत्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे। महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू और सरकार बल्लभभाई पटेल जैसे बड़े नेताओं को तो अंग्रेजो ने गिरफ्तार कर लिया था। उस समय के युवा समजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण की अगुआई में समाजवादी भूमिगत रहकर आंदोलन की अगुआई कर रहे थे। तब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने यह पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने अंग्रेज गवर्नर से कहा था कि किसी भी सूरत में इस आंदोलन को कुचलना है। उस समय मुखर्जी ने अंग्रेजी हुकूमत की पैरवी करते हुए अंग्रेजों को भारत के लिए अच्छा बताया था। वह उस समय आजादी की लड़ाई की जरूरत नहीं समझते थे। उन्होंने कसम खा ली थी कि किसी भी सूरत में वह आंदोलन में बंगाल में घुसने नहीं देंगे। मतलब श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत छोड़ो आंदोलन में अंग्रेजों का साथ दे रहे थे। यदि वह देशभक्त होते तो सरकार से इस्तीफा देकर आंदोलन में कूद पड़ते। वह किसी पार्टी और नेता का आंदोलन नहीं बल्कि जनता का आंदोलन था। इस पत्र के पढ़ने से जनसंघ, आरएसएस और भाजपा का चेहरा पूरी तरह से बेनकाब हो जाता है। मौजूदा हालात में इन संगठनों के जितने भी नेता हंै ये सब श्यामा मुखर्जी को अपना आदर्श मानते हैं। धारा 370 हटाने के बाद तो श्याम प्रसाद मुखर्जी को देश का सबसे बड़ा नायक साबित किया जा रहा है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि यदि ये लोग मुस्लिमों को नकार कर देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के पक्ष में रहे हैं तो फिर मुस्लिम लीग से मिलकर बंगाल में संविद सरकार क्यों बनाई थी ? यदि बंटवारे का जिम्मेदार महात्मा गांधी और नेहरू को मानते हैं तो फिर जिन्ना से दोस्ती कैसी ? चाहे जनसंघ हो, आरएसएस हो या फिर भाजपा इन संगठनों के क्रियाकलापों और गतिविधियों से यह तो स्पष्ट हो चुका है कि ये लोग अंग्रेजों को देश का हितैषी औेर मुगलों को घातक मानते रहे हैं। अक्सर इन लोगों को यह कहते सुना जाता है कि अंग्रेजों ने तो भारत में आकर देश पर अहसान ही किया है। अंग्रेजों  ने ही देश की सत्ता से मुगलों को बेदखल किया है। आज की परिस्थितियों में भी हिंदू सेना को महाराना विक्टोरिया को श्रद्धांजलि देते हुए देखा गया। ऐसे में प्रश्न उठता है कि श्यामा प्रसाद को अपना आदर्श मानने वाले आज सत्ता में बैठे ये राष्ट्रवाद के राग अलापने वाले लोग कैसे देशभक्त हो सकते हैं ? जिनके आदर्श अंग्रेजी हुकूमत के पक्षधर थे। आजादी की लड़ाई के प्रबल विरोधी थे तो उनके अनुयायी देशभक्त कैसे हो सकते हैं ? वैसे इन लोगों के क्रियाकलापों भी कहीं से देशभक्त नहीं दिखाई देती है। ये सब लोग हिंदू राष्ट्र बनाने के पक्षधर रहे हैं। जबकि जमीनी हकीकत यह भी है कि  देश संविधान के होते हुए देश को हिंदू राष्ट्र नहीं बनाया जा सकता है। यह सुप्रीम कोर्ट का भी कथन है कि संविधान के मूल को नहीं छेड़ा जा सकता है। यह भी जमीनी हकीकत यह है कि आज यदि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं तो इस संविधान आजादी की वजह से। आज यदि पाकिस्तान को ललकार रहे हैं तो इस आजादी और संविधान की वजह से ही। विश्व का भ्रमण कर रहे हैं तो हिंदुत्व की वजह से नहीं बल्कि आजाद भारत के इस संविधान के रहमोकरम पर। ऐसे में प्रश्न उठता है कि  इन लोगों से संविधान की गरिमा को बचाये रखने की उम्मीद कैसे की जा सकती है ? कैसे धर्मनिपरपेक्ष ढांचे को बचाये रखने की उम्मीद कर सकते हैं ?  ये वे लोग हैं जिनके आदर्श अंग्रेजी हुकूमत के कंधे से कंधा मिलकर चलते रहे । इनमें अधिकतर वे लोग हैं, जिन्होंने उन क्रांतिकारियों की मुखबिरी की थी जो देश की आजादी की लड़ाई के लिए अपनी जान हथेली पर लेकर अंग्रेजों से लोहा ले रहे थे।  आजादी की लड़ाई में एक भी जगह ऐसा पढ़ने को नहीं मिलता है कि इन लोगों ने खुलकर अंग्रेजों से बगावत की हो। यदि लड़ाई लड़ी भी तो बाद में टूट गये। यहां तक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, सावरकर के अंग्रेजी यातनाओं के सामने टूटने की बातें सामने आती हैं। सावरकर ने तो बाकायदा महारानी विक्टोरिया को पत्र लिखा था कि ये जो युवा आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं ये भटके गये हैं। हम लोग इन्हें समझाकर रास्ते पर ले आएंगे। आजाद भारत में 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई तो समाजवादियों के साथ ही बड़े स्तर पर संघी भी  जेलों में डाल दिये गये थे। तब जो आंदोलनकारी इंदिरा गांधी से माफी मांग ले रहे थे, उन्हें  छोड़ दिया जा रहा था। तब भी अधिकतर संघी इंदिरा गांधी से माफी मांगकर जेल से बाहर आ गये थे। हां लाल कृष्ण आडवाणी ने इंदिरा गांधी से माफी नहीं मांगी थी। अटल बिहारी वाजपेयी ने तो इंदिरा गांधी को दुर्गा का अवतार तक कह दिया था। मौजूदा हालात में भी आरएसएस और भाजपा नेताओं के आचरण से कहीं से नहीं लगता है कि ये लोग देशभक्त हैं। मात्र भारत माता की जय बोल देने से कोई देशभक्त नहीं हो जाता है। देशभक्ति के लिए देश के लिए कुर्बानी देनी पड़ती है। जनता के लिए संघर्ष करना पड़ता है। देश के लिए मरना-मिटना पड़ता है। ये जितने भी लोग आज की तारीख में सत्ता पर काबिज हैं ये किसी बड़े आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल नहीं रहे। भले ही सत्ता में बैठे लोग राष्ट्रवाद का ढकोसला पीटते घूम रहे हों पर आप सर्वे कर लीजिए इन लोगों में से बहुत कम के बच्चे आपको सेना में दिखाई देंगे। बहुत कम खेती करते देखे जाएंगे। अधिकतर या तो बड़े पदों पर सुशोभित हैं या फिर व्यापार कर देश के संसाधनों का मजा लूट रहे हैं। कारपोरेट घरानों को देश के संधाधनों का जमकर दोहन करा रहे हैं। जिन किसानों और मजदूरों के बेटे सरहदों की रक्षा कर रहे हैं। रात दिन मेहनत कर लोगों के लिए अन्न उपजा रहे हैं, उन लोगों को तो ये लोग दोयम दर्जे का समझते हैं। देश में जितने भी काम हो रहे हैं बस संपत्त लोगों के लिए हो रहे हंै। देश में पूरी तरह से कारपोरेट कल्चर समाहित कर दिया गया है। सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों पर आये दिन बलात्कार, यौन शोषण के आरोप लग रहे हैं। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने पर बस एक बात ही रटी रटाई बोली जा रही है कि अब ये लोग कश्मीर से दुल्हन ला सकेंगे। मतलब  आज की तारीख में भी भगत सिंह के उस कथन को चरितार्थ कर रहे हैं जिसमें उन्होंने आरएसएस को मानसिक रोगियों का संगठन करार दिया था। इन लोगों के संगठन और क्रियाकलापों से तो यही लगता है कि ये लोग देश नहीं बल्कि हिंदू धर्म के लिए काम करते रहे हैं। मुस्लिमों के खिलाफ आग उगलते रहे हैं। हां सत्ता के लिए मुस्लिम इनके हो जाते हैं। जैसे हिंदू महासभा ने मुस्लिम लीग से मिलकर आजादी से पहले बंगाल में संविद सरकार बनाई थी उसी ही तरह आज की तारीख में भाजपा भी तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं के वोट हासिल करने के लिए हर हथकंडा अपना रही है। मुस्लिमों को गले लगा रही है, भले ही वह दिखावा हो। यह बात तो स्पष्ट है कि अब तक के जनसंघ, आरएसएस, हिंदू महासभा और भाजपा के आंदोलनों, नीतियों, क्रियाकलापों में हिंदुत्व का बोलबाला दिखाई दिया है। देशभक्त का तो बस दिखावा ही रहा है। इन सगठनों का न केवल एजेंडे में हिंदुत्व रहा है बल्कि राजनीतिक रूप से स्थापित पार्टी भाजपा का घोषणापत्र भी हिंदुत्व पर आधारित होता है। योध्या में राम मंदिर निर्माण, धारा 370, राम की प्रतिमा, कृष्ण की प्रतिमा, हिंदू त्योहारों को बढ़ावा देना। यह सब राष्ट्रवाद नहीं बल्कि हिंदूवाद है। भगवा रंग राष्ट्रवाद का प्रतीक नहीं बल्कि हिंदुत्व का प्रतीक रहा है। राष्ट्रवादी होने के लिए हर वर्ग, हर जाति  और हर धर्म को साथ लेकर देश का विकास करना होता है। मॉब लिंचिंग,  बलात्कार, बेरोजगारी, किसान आत्महत्या, निजी संस्थाओं में शोषण और दमन जैसे मुद्दे पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न कोई ट्वीट करते हैं और ही कभी इन मुद्दों पर जबान खोलते हैं। लोकतंत्र की रक्षा के लिए बनाये गये सभी तंत्रों को बंधुआ बनाकर राष्ट्रवादी नहीं बना जा सकता है। सरकार के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को किसी भी सूरत में दबाने को लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता है। सत्ता में बैठे भ्रष्ट नेताओं को संरक्षण देने और विपक्ष के भ्रष्ट नेताओं को सरकार में ले लेने से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती है। संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल देश और समाज के लिए न कर पार्टी और सत्ता के लिए करने को राष्ट्रवाद नहीं कह सकते हैं।  आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें ...

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उर्दू पत्रकारीता में जी सलाम और ETV उर्दू को नए आयाम देने वाले ख़ुर्शीद रब्बानी ने तहज़ीब टीवी के साथ नई पारी की शुरूवात की

21-08-2019 15:36:15 पब्लिश - एडमिन

उर्दू पत्रकारीता में जी सलाम और ETV उर्दू को नए आयाम देने वाले ख़ुर्शीद रब्बानी ने तहज़ीब टीवी के साथ नई पारी की शुरूवात की नई दिल्ली:- 17 वर्षों से उर्दू मिड़िया के जाने-माने पत्रकार खुर्शीद रब्बानी ने एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर तहज़ीब टीवी इंडिया ज्वाइन किया. पत्रकारिता में विगत 17 सालों तक न्यूज़18 उर्दू (ईटीवी उर्दू) में विभिन्न पदों पर रहते हुए खुर्शीद रब्बानी ने 'अधूरे ख्वाब', 'ख़ास मुलाक़ात' और 'हमारे मिसाइल' जैसे चर्चित और आम आदमी से जुड़े मुद्दों को टीवी कार्यक्रमों द्वारा बखूबी पेश किया, ईटीवी में रहते हुए उन्होंने चैनल हेड ईटीवी हैड़ के ओएसडी के तौर पर भी काम किया साथ ही वे 2008-09 में ईटीवी न्यूज़ नेटवर्क के कंट्रोल रूम (ब्रेकिंग न्यूज़ डेस्क) के 7 राज्यों के नोडल ऑफिसर भी रहे, अप्रैल 2017 में ईटीवी उर्दू से एड़िटर के पद से इस्तीफा देकर वे ज़ी मीडिया से जुड़े और ज़ी ग्रुप के उर्दू चैनल ज़ी सलाम में बतौर एडिटर इनपुट ज़िम्मेदारी संभाली और टीम के साथ मिल कर ज़ी सलाम को अक़्लियतों की आवाज़ बनाया और चैनल को बुलंदियों पर पहुंचाया। ज़ी मीडिया में रहते हुए उन्होंने ज़ी हिंदुस्तान, ज़ी सलाम और ज़ी हिंदी रीजनल चैनल्स के लिए 'हमारी आवाज़' नाम का चर्चित कार्यक्रम बतौर प्रोड्यूसर और एंकर पेश किया इसके अलावा उन्होंने ज़ी सलाम में 'बेबाक बात', 'आप के मसाइल' और 'ग्राउंड ज़ीरो' जैसे कई चर्चित और टीआरपी बटोरने वाले कार्यक्रमों की एंकरिंग भी की। हाल ही में ईरान यात्रा से लौटने के बाद ज़ी मीडिया से इस्तीफा दे कर ख़ुर्शीद रब्बानी अब तहज़ीब टीवी इंडिया के साथ जुड़ गए हैं, ख़ुर्शीद रब्बानी ने चैनल में अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बताया कि टीम के साथ मिल कर चैनल को मुल्क की अवाम और देश के अक़्लियतों की आवाज़ बनाएंगे। आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें ...

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लखनऊ जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने कराया पत्रकारों का दस लाख रुपए का बीमा

09-08-2019 17:37:40 पब्लिश - एडमिन

एलजेए बना अपने दम पर 10 लाख का बीमा कराने वाला पहला पत्रकार संगठन  लखनऊ। पत्रकारों के हित के लिए काम करने का दम तो बहुत लोग भरते हैं, पत्रकारों के साथ कोई अनहोनी होने पर बयानों की बाढ़ सी आ जाती है परन्तु वह सब कागजी होकर ही रह जाती है। कुछ चुनिंदा मामलों में पीड़ित "बड़े" पत्रकारों को ही राहत मिल पाती है | पत्रकारिता जैसे पवित्र पेशे में इसे मिशन मानकर काम करने वालों की आज भी कमी नहीं हैं। काफी कठिन परिस्थितियों में माफियाओं, पुलिस व भ्रष्ट नेताओं की दुश्मनी मोल लेकर भी शहर से लेकर दूर-दराज गांव तक के लोग/युवा पत्रकारिता के माध्यम से पीड़ितों को न्याय दिलाने उनकी आवाज सरकार तक पहुंचाने में जुटे हुए हैं | पत्रकारों के इसी श्रम, लगन व जोश को देखते हुए उनके उत्साह को बनाए रखने के लिए "लखनऊ जर्नलिस्ट एसोसिएशन" ने अपने पत्रकार भाइयों, संगठन से जुड़े सदस्यों के लिए कई महीने के अथक परिश्रम, यूनाइटेड इंडिया एश्योरेंस कंपनी में लगातार भाग दौड़ करके उनका 10 लाख रुपए का एक्सीडेंटल बीमा कराने में सफलता हासिल की है। इसके साथ ही राजधानी लखनऊ ही नहीं पूरे उत्तर प्रदेश का "लखनऊ जर्नलिस्ट एसोसिएशन" एकमात्र ऐसा संगठन बन गया है जिसने बिना किसी सरकारी सहायता के अपने सदस्यों का दस लाख रुपए का बीमा करवाया है। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की ओर से मंडलीय प्रबंधक हर्ष कुमार शुक्ला, प्रशासनिक अधिकारी संजय कुमार एवं प्रशासनिक अधिकारी (लेखा) आदर्श श्रीवास्तव ने एलजेए अध्यक्ष आलोक कुमार त्रिपाठी को बीमा पॉलिसी का बांड सौंपा गया। लखनऊ जर्नलिस्ट एसोसिएशन" इसके लिए यूनाइटेड इंडिया एश्योरेंस बीमा कंपनी का एवं अपने अध्यक्ष आलोक कुमार त्रिपाठी व महामंत्री रुपेंद्र उपाध्याय का विशेष रुप से आभार व्यक्त करता है। एलजेए के उपाध्यक्ष विजय आनंद वर्मा के अनुसार इस बड़े काम के पहले चरण में अभी 50 पत्रकारों का बीमा कराकर शुरुआत की गई है, दूसरे चरण की भी शुरुआत कर दी गई है जो इसी सप्ताह पूरी करा दी जायेगी। जो भी पत्रकार साथी बीमा योजना का लाभ उठाना चाहते हैं वो अध्यक्ष आलोक कुमार त्रिपाठी से 9454638777 एवं  7985698909 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें      ...

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पुलिस के सामने कैमरामैन को बुरी तरह पीटा

09-08-2019 14:20:18 पब्लिश - एडमिन

गुरुग्राम - कार चालक पति पत्नी की दबंगई, ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने पर रोकने पर पुलिसकर्मी पर चढ़ाई कार, बाल बाल बचा ट्रैफिक पुलिसकर्मी, मौके पर पहुंचे मीडिया कर्मी का कैमरा तोड़ा, पति पत्नी ने कैमरामैन के साथ की मारपीट, पुलिस के सामने कैमरामैन को बुरी तरह पीटा, मारपीट की घटना मोबाइल कैमरे में कैद, सोहना रोड़ पर वाटिका चौक की घटना साइबर सिटी गुरुग्राम में आज सुबह करीब 10:00 बजे सोहना रोड पर रेड लाइट जंप करके भाग रही एक कार को रोकना पुलिसकर्मी को भारी पड़ गया कार में सवार पति पत्नी ने पहले तो ट्रैफिक पुलिसकर्मी पर कार चढ़ाने की कोशिश की और बाद में मीडिया कर्मियों के साथ मारपीट करते हुए उनके कैमरे को तोड़ दिया पुलिस ने आरोपी पति पत्नी को हिरासत में ले लिया है । दिल्ली के पास साइबर सिटी गुरुग्राम में सड़क पर गाड़ी चलाते समय क्यों गुस्से में रहते हैं लोग यह तस्वीरें देखिए और अंदाजा लगाइए कि क्या ऐसे गुस्से वाले लोग सड़क पर गाड़ी चलाते समय किसी बड़े हादसे को दावत तो नहीं दे रहे हैं दरअसल तस्वीरें हैं गुरुग्राम के सोहना रोड पर वाटिका चौक की जब सुबह तकरीबन 10:00 बजे यह हौंडा सिटी कार रेड सिगनल जंप कर गई तभी सामने खड़े ट्रैफिक पुलिसकर्मी सुनील कुमार ने गाड़ी को रोकने का इशारा किया गाड़ी रुक गयी।  कार को ड्राइवर चला रहा था और आकर में पीछे पति पत्नी बैठे थे । जब ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने सिग्नल जम्प करने पर चालान करने की बात कही तो कार में पीछे बैठी महिला ने कार के ड्राइवर को हटाकर खुद ड्राइविंग सीट पर आ गयी और ट्रैफिक पुलिसकर्मी पर कार चढ़ाने की कोशिश की इतने में बाकी पुलिसकर्मियों ने कार के सामने अपनी राइटर लगा दी जिसकी वजह से कार रुक गई उसके बाद गाड़ी के कागजात मांगने पर महिला तुरंत ड्राइवर सीट पर आ गई और पुलिस के साथ बदतमीजी करने लगे । वाटिका चौक पर यह घटना होते ही भारी पुलिस बल मौके पर आ गया इतने में मीडिया को खबर लगी तो एक निजी न्यूज़ चैनल के टीम भी मौके पर पहुंच गई जब कैमरा मैंने पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग करनी चाही तो आरोपी पति का पारा और चढ़ गया उन्होंने निजी टीवी चैनल के कैमरामैन पर हमला कर दिया और उसे पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में ही बुरी तरह मारने पीटने लगे इतना ही नहीं आरोपी पति पत्नी ने कैमरामैन का कैमरा भी तोड़ दिया जैसे-तैसे मामले को शांत कराया गया और आरोपी पति पत्नी को हिरासत में लिया गया । आरोपी पति पत्नी की दबंगई की पूरी घटना मोबाइल कैमरे में कैद हो गयी । अब पीड़ित पुलिस कर्मी और पत्रकार की शिकायत पर दोनों आरोपियों के खिलाफ सेक्टर 50 थाने में केस दर्ज किया जा रहा है । मनु मेहता , गुडगाँव आक्रोष4मीडिया भारत का नंबर 1 पोर्टल हैं जो की पत्रकारों व मीडिया जगत से सम्बंधित खबरें छापता है ! आक्रोष4मीडिया को सभी पत्रकार भाइयों की राय और सुझाव की जरूरत है ,सभी पत्रकार भाई शिकायत, अपनी राय ,सुझाव मीडिया जगत से जुड़ी सभी खबरें aakrosh4media2016@gmail.com व वव्हाट्सएप्प पर भेजें 9897606998... |संपर्क करें 9411111862 .खबरों के लिए हमारे फेसबुक आई.डी https://www.facebook.com/aakroshformedia/ पर ज़रूर देखें  ...

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श्रद्धांजलि

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श्रम विभाग उत्तराखन्ड ने पत्रकारों व गैर पत्रकारों को मजेठिया वेतनमान दिलाने को  एक कमेटी का गठन किया

मीडिया पे फैसले

शहर दर शहर

पत्रकार की हत्या व् रेप की सजा काट रहे राम रहीम की पत्नी ने लगाई पैरोल याचिका

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