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यूपी में पत्रकार पर जानलेवा हमला

18-01-2019 15:10:37 पब्लिश - एडमिन

सहारा समय न्यूज़ के  पत्रकार पर दबंग लोगों ने ने किया जानलेवा हमला! ये पूरा मामला हंसराजपुर पुलिस चौंकी के सामने का हैं! पीड़ित पत्रकार प्रदीप दुबे अपने साथियों के साथ आज सुबह दुल्लहपुर में मनोज सिन्हा के कार्यक्रम में न्यूज कवरेज करने जा रहे थे...

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नगर पालिका में पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित

13-01-2019 13:03:38 पब्लिश - एडमिन

रामनगर में पत्रकार प्रेस परिषद  के अध्यक्ष समीम दुर्रानी के नेतृत्व में कुँवर कपिल नेगी ( बटिस्टा) प्रदेश सचिव कांग्रेस (कमिटी) ने अपने जन्मदिन के अवसर पर जसकरण सिंह राणा के साथ     नगर पालिका में  पत्रकार  सम्मान समारोह आयोजित किया  जिसमें  पत्रकार प्रेस परिषद  के पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया सम्मान समारोह में कपिल नेगी ने कहा कि  पत्रकार प्रेस के सदस्य एकता का प्रतीक है   चाहे हिन्दू, मुस्लिम ,सिख ,ईसाई  हर किसी की भावनाओ का  ध्यान रखते हुए व  निष्पक्ष पत्रकारिता  करते हैं  पत्रकारिता के अलावा समाजिक कार्य जैसे गरीबो को  खाना,कपड़े, आदि देकर सराहनीय कार्य कर  ,सफाई  अभियान  में भी  बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते है   और कहा  कि में कांग्रेस का सिपाही   हूँ  हमेशा कांग्रेस  पार्टी के लिए ततपर  रहूंगा  आगामी चुनाव में  पूर्व विधायक रणजीत रावत   की जीत होगी  और व सीoएम की दौड़ में  सबसे आगे होंगे     पत्रकार प्रेस परिषद के  अध्यक्ष समीम दुर्रानी ने कुँवर कपिल  नेगी व संयोजक मण्डल   का आभार व्यक्त करते हुए पत्रकारो को  सम्मानित करने के   लिए शुक्रिया अदा किया और पत्रकार   प्रेस परिषद के पत्रकारो की सराहना करते हुए कहा की हमारे संगठन के पत्रकार  हमेशा निष्पक्ष , ईमानदार व एकजुटता होकर पत्रकारिता करते हैं और सदैव करते रहेंगे मुझे पत्रकार प्रेस परिषद के समस्त पत्रकारो पर गर्व है     इस  दौरान अध्यक्ष समीम दुर्रानी, घश्याम सती, रमेश चंद्र टम्टा, जलीस अहमद कासमी, समीर अशरफ , अज़ीम खान  वरिष्ठ  आर टी आई कार्यकर्ता व आर टी आई क्लब उत्तरखंड के सदस्य , मयंक मनाली, ओम प्रकाश आर्यवंशी, गणेश कुमार गगन, पंकज तिवारी, सलीम अहमद, कलीमुद्दीन, संजय मेहता, हरपाल सिंह लटवाल, विनोद कुमार, शमशाद अली, नेमपाल सिंह सैनी, लक्ष्मी दत्त मन्दोलिया ,नितेश जोशी, वीरेंद्र कुमार, इंदु  छिमवाल ,मुकेश कुमार, अल्तमश दुर्रानी  ,पुरन  शर्मा,प्रकाश भट्ट  के अलावा जसकरण सिंह राणा(पूर्व प्रधान उपाध्यक्ष श्वेश प्रकोष्ट) ,पलविंदर सिंह(नीरू), मनिंदर सिंह गिल (प्रधान  जसपुर) ,मौ०शमीर आदि मौजूद रहे |    ...

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समाचार पत्रों की फिर से होगी जांच

12-01-2019 17:30:44 पब्लिश - एडमिन

पत्रकारों और समाचारपत्र कर्मियों के लिये गठित जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश को माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद भी  अमल में नहीं लाया जासका है। महाराष्टÑ के कामगार आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित त्रिपक्षीय समिति की बैठक में इस पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुये कामगार आयुक्त राजीव जाधव ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश को अमल में लाया गया या नहीं इसकी जांच के लिये १५ दिनों के अंदर  ६ पथक बनाया जाए। साथ ही यह पथक सभी वर्तमान समाचार पत्रों की फिर से जांच करेंगे और फिल्ड आॅफिसर पूरी जांच रिर्पोट कामगार आयुक्त को देंगे। महाराष्टÑ में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश को किसी भी समाचार पत्र प्रतिष्ठान द्वारा सही तरीके से लागू नहीं किया गया है। पत्रकारों और मीडियाकर्मियों पर विविध प्रकार के दवाब डाले जारहे हैं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी मीडियाकर्मी और पत्रकार जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश के अनुसार अपना बकाया वेतन और एरियर ना मांगे इसके लिये उन्हे डराया जारहा है। इस बारे में एनयूजे की महाराष्टÑ अध्यक्ष शीतल करदेकर ने कामगार आयुक्त का ध्यान दिलाया और कहा कि बार बार सर्वोच्च न्यायालय और श्रम मंत्रालय को फर्जी रिर्पोट कामगार विभाग द्वारा भेजी जारही है इसके लिये सभी वर्तमान समाचार पत्रों की फिर से और स्पष्ट जांच करायी जाए। जिसका बीयूजे के इंदर कुमार जैन ने भी समर्थन किया। इस बैठक में ध्यान दिलाया गया कि समाचार पत्र प्रतिष्ठानों द्वारा जानबुझकर अपने प्रतिष्ठानों की गलत बैलेंसिट देकर ग्रेडेशन पर मतभेद पैदा किया जारहा है। सबसे ज्यादा मतभेद समाचार पत्र प्रतिष्ठानों के ग्रेडेशन को लेकर होता है। इसके लिये जरुरी है कि वर्तमान सभी समाचार पत्रों की बैलेंसिट आयकर विभाग से मंगायी जाए या दिल्ली स्थित डीएवीपी,कंपनी रजिस्ट्रार कार्यालय से  मंगवाया जाए। जिससे समाचार पत्रों का ग्रेडेशन तय हो। यह मुद्दा भी शीतल करदेकर ने उठाया । आठ महीने बाद मजीठिया वेतन आयोग को अमल में लाने के लिये त्रिपक्षीय समिति की बैठक महाराष्टÑ के कामगार आयुक्त के मुंबई स्थित कार्यालय मेंं बुलायी गयी थी। जिसकी अध्यक्षता खुद नये कामगार आयुक्त राजीव जाधव ने किया। इस बैठक में मालिकों के प्रतिनिधि के रुप में सकाल के मेदनेकर उपस्थित थे जबकि मीडियाकर्मियों और पत्रकारों के प्रतिनिधि के रुप में एनयूजे महाराष्टÑ की शीतल करदेकर, बीयूजे के मंत्रराज पांडे, इंदर जैन आदि उपस्थित थे। कामगार आयुक्त राजीव जाधव ने सबसे पहले वर्तमान १२९ समाचार पत्रों की जिनके बारे में दावा किया गया है कि इन्होने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश को  लागू नहीं किया है उनकी जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। इसके लिये १५ दिनों में ६ जांच पथक भी बनाने का निर्देश दिया गया है। दो महीने में यह जांच पूरी करने का भी नये कामगार आयुक्त ने निर्देश दिया है। साथ ही कामगार आयुक्त ने कहा कि समाचार पत्र कर्मियों को डरने की कोई जरुरत नहीं है। नये कामगार आयुक्त ने यह भी कहा कि अगर किसी भी समाचार पत्र प्रबंधन ने अपने मीडियाकर्मियों से यह लिखवाकर लिया है कि उसे मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ नहीं चाहिये और अगर वह पात्र है तब भी उसे माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश के अनुसार मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ मिलेगा।  शशिकांत सिंह , मुंबई  ...

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बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी ने कई न्यूज़ चैनल व होटलों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करवाने का दिया धमकी

11-01-2019 15:59:01 पब्लिश - एडमिन

  •  बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी ने कई न्यूज़ चैनल व होटलों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करवाने का दिया धमकी

 बस्ती जिले में अपने खिलाफ खबर चलाने से भड़के सांसद हरीश द्विवेदी वर्तमान व्यवस्थाओं की कमी के चलते नेताओं के चोरी करने  वाले बयान पर कई न्यूज चैनलों व पोर्टलों ने चलाई थी खबर सांसद हरीश द्विवेदी ने कहा कि वीडियो में एडिटिंग कर की जा रही मेर...

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मजीठिया वेज बोर्ड त्रिपक्षीय समिति की बैठक ५ को

11-01-2019 15:51:39 पब्लिश - एडमिन

देशभर में सरकारी महकमा सुप्रीमकोर्ट के आदेश को कितनी गंभीरता से लेता है इसकी एक बानगी देखिये। पत्रकारों से जुड़े जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की  सिफारिश ठीक से लागू हो इसके लिये सभी सरकारों को एक त्रिपक्षीय समिति बनाने और उसकी बैठक करने का निर्देश दिया गया । कईराज्यों में तो त्रिपक्षीय समिति बनी ही नहीं और बनी तो उसका रिजल्ट ढाक के तीन पात ही साबित हुये हैं। महाराष्टÑ की त्रिपक्षीय समिति की बैठक लगभग नौ महीने बाद पांच जनवरी को दोपहर तीन बजे आयोजित की जारही है। इसके पहले इस त्रिपक्षीय समिति की बैठक १२ अप्रैल २०१८ को की गयी थी। इस बैठक में मालिक के कई प्रतिनिधि पहले दिन सेलेकर अंतिम बैठक तक नदारत दिखे लेकिन उनसे एक बार भी लेबर विभाग नेनहींपूछा कि हुजूर आप ऐसा क्यों कर रहे हैं। जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड  की सिफारिश को अमल में लाने के लिए गठित महाराष्ट्र की  त्रिपक्षीय समिती की बैठक मुंबई में कामगार आयुक्त कार्यालय के समिती कक्ष में  ५ जनवरी  को दोपहर ३ बजे   आयोजित की जा रही है । इस बैठक में पत्रकारों की तरफ से पांच प्रतिनिधि नेशनल यूनियन आॅफ जर्नलिस्ट की महाराष्ट्र महासचिव शीतल हरीश करदेकर, बृहन मुंबई यूनियन आॅफ जर्नलिस्ट के मन्त्रराज जयराज पांडे, रवींद्र राघवेंन्द्र देशमुख, इंदर जैन कन्वेनर ज्वाइन्ट एक्शन कमेटी ठाणे और किरण शेलार शामिल हैं। मालिकों की तरफ से जो पांच लोग शामिल हैं उनमें जयश्री खाडिलकर पांडे, वासुदेव मेदनकर, राजेंद्र कृष्ण रॉव सोनावड़े और बालाजी अन्नाराव मुले हैं। इस समिति में लोकमत की तरफ से दो प्रतिनिधि शामिल किये गए हैं जिनके नाम बालाजी अन्ना रॉव मुले और विवेक घोड़ वैद्य हैं जबकि रोहिणी खाडिलकर नवाकाल की हैं। इसी तरह राजेंद्र सोनावड़े दैनिक देशदूत नासिक से हैं। इसमे कई सदस्य बैठक में लगातार नदारत रहते हैं। बैठक की अध्यक्षता कामगार आयुक्त महाराष्ट्र  करेंगे।        शशिकांत सिंह, मुंबई  ...

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अंशकालिक संवाददाताओं को भी मिलेगा मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ

11-01-2019 15:44:17 पब्लिश - एडमिन

  • अंशकालिक संवाददाताओं को भी मिलेगा मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ

देश भर के समाचार पत्रों में कार्यरत उन अंशकालिक संवाददाताओं के लियेजो समाचार पत्रोंमें समाचार भेजने के बदले नाम मात्र भुगतान पाते थ के लिये एक अच्छी खबर आयी है। अब  अंशकालिक संवादताताओं को भी समाचार पत्र कर्मचारी मानते हुये जस्टिस मजीठिया वेज बो...

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मजीठिया मामले में देशभर के मीडियाकर्मियो ने राहुलगांधी को भेजा मेल

11-01-2019 15:37:52 पब्लिश - एडमिन

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश  सभी समाचार पत्रों में लागू कराया जाए। इस मांग को लेकर देश भर के मीडियाकमिर्मयों ने एक मूहीम चलाया और अखिलभारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी को अलग अलग मेल भेजकर अपनी समस्या से उन्हे अवगत कराया। देशभर के सैकड़ों मीििडयाकर्मियों ने आज १० जनवरी को यह मूहीम चलाया और राहुल गांधी को तथा उनके मीडिया सलाहकार को यह मेल भेजा। इस दौरान राहुल गांधी से मांग की गयी कि कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को मजीठिया वेतनमान लागू कराने के लिए निर्देशित करें। तथा   केंद्र की एनडीए सरकार पर दबाव बनाकर देश के सभी अखबार और न्यूज एजेंसियों में वेतनमान लागू कराया जाए। मीडियाकर्मियों नेउनसे यह भी मांग की कि संसद के अगले सत्र में कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे को हजारों श्रमजीवी पत्रकारों और गैर पत्रकारों की ओर से आप स्वयं उठाएं। साथ ही  साल २०१९ में होने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के घोषणापत्र में मजीठिया वेतनमान की अनुशंसाएं लागू कराने का मुद्दा भी शामिल किया जाए | शशिकांत सिंह , मुंबई    ...

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पत्रकार पर हमले के आरोपी शराफत अली के साथ बाराबंकी पुलिस की शराफत क्यों

10-01-2019 17:57:18 पब्लिश - एडमिन

  • पत्रकार पर हमले के आरोपी शराफत अली के साथ बाराबंकी पुलिस की शराफत क्यों

गुरुवार रात को जिले व क्षेत्र के पत्रकार कोठी थाना पहुंचे, आरोपी शराफत की गिरफ्तारी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर 24 घंटे में आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जाता है,तो आगे धरना प्रदर्शन रोड जाम तथा जरूरत पड़ी तो मु...

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पत्रकार की परिभाषा एवं पत्रकारिता के मापदंड

10-01-2019 16:22:18 पब्लिश - एडमिन

प्रदेश में वर्तमान में पत्रकारिता संक्रमण के दौर से गुजर रही है। पत्रकारिता के मापदंड खत्म हो चुके हैं, लोग अमर्यादित पत्रकारिता कर रहे है साथ ही देशहित समाजहित सर्वोपरि की अवधारणा खत्म होकर अब जेबहित की पत्रकारिता हो चली है। साथ ही संगठनात्मक संरक्षण में पलते ब्लेकमेलर भी पत्रकार कहलाने लगे हैं। बिना किसी मापदण्ड के चल रहे इस धंधे में (जी हाँ इसे अब धंधा ही कहना पड़ेगा) उतरना हर किसी के लिए आसान हो गया है। वहीं राजनीतिक संरक्षण में पत्रकारिता करने वालों की वजह से असल पत्रकार कहीं खो गया है। अब समय आ गया है कि हमे पत्रकारिता को बचाने के लिए मुहिम चलाना होगी। पत्रकारिता में हनन होते मूल्यों को पुनः संजोना होगा। व्यवसायीकरण के दौर में आज प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सब सिर्फ व्यवसाय आधारित पत्रकारिता कर रहे हैं, बावजूद इसके प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया ने चाहे अपना वजूद बरकरार रखने के लिए ही पर कुछ मूल्यों का निर्धारण किया हुआ था। किंतु अब पत्रकारिता के नाम पर छलावा करने के लिए इलेक्ट्रानिक मीडिया का स्थान  यूट्यूब चैनल और प्रिंट मीडिया का स्थान वेबसाइट्स ने ले लिया है। बिना किसी सरकारी निगरानी समिति के चल रहे यूट्यूब चेनल्स ओर उनमे चल रही मूल्यहीन पत्रकारिता की बानगी बनी खबरों के कारण पत्रकारों की अहमियत कम होती जा रही है। अब समय आ गया है पत्रकारिता के मापदंड तय होना चाहिए , पत्रकारों की एक भीड़ सी हो गयी है, जिसमे पत्रकार खो गया है। सरकार ने जनसम्पर्क विभाग तो बनाया लेकिन पत्रकारों के लिए कोई मापदण्ड तय नही किए, पत्रकार किसे माना जाए ? क्या हाथ मे माइक आईडी ही पत्रकारिता का तमगा बन गया है?  आज की तारीख में पत्रकारों के लिए एक छोटी सी परीक्षा अनिवार्य हो गयी है। एक जमाना था जब हम किसी अखबार संस्थान में जाते थे तो वो यह देखते थे कि खबरें लिखना भी आता है या नही, खबर की परिपक्वता, उस खबर का क्या असर होगा?, समाज पर क्या असर पड़ेगा ?, इन सब बातों का अनुभव व्यक्ति में है या नही?  इसके बाद एक विषय दिया जाता था जिस पर खबर बनाई जाती थी और वो खबर उनके मापदण्ड में खरी उतरी या नहीं?  यह देखा जाता था। परन्तु वर्तमान दौर में यह देखा जाने लगा है कि यह व्यक्ति महीने में कितने कमाकर संस्थान को दे सकता है? यह देखा जा रहा है। वो पैसा कहां से ला रहा? उसका तरीका क्या है ?  समाज मे उसके इन तरीकों से क्या असर पड़ रहा है कोई नही देख रहा। अब तय होना चाहिए कि खबरें किस परिमाप में लिखी जाए? या फिर सरकार पत्रकारों का एक निश्चित मापदण्ड तय करे कि बिना किसी दस्तावेज के लिखित परीक्षा आयोजित हो और निर्धारित अहर्ताओं को पूर्ण करने वाले को ही योग्यताओं के आधार पर पत्रकार माना जाए। आज सिर्फ हाथ मे डंडा पकड़ कर ब्लैकमेलिंग करने वाले संगठनों के संरक्षण में पत्रकार सुरक्षा कानून की बात करते हैं। जबकि असली पत्रकार किसी सुरक्षा का मोहताज नही है।* बावजूद इसके सरकार पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करती है तो उसे पत्रकार किसे माना जाए यह मापदण्ड भी तय करने होंगे अन्यथा आगामी समय में पत्रकारिता का दुरुपयोग ओर ज्यादा बढ़ जाएगा। ...

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जान की धमकी मिली फिर भी अपनी ड्यूटी पर डटी रही महिला पत्रकार

10-01-2019 16:16:13 पब्लिश - एडमिन

2 जनवरी को मुझसे कहा गया था कि मैं बीजेपी के नेताओं से बिंदू अम्मीनी और कनकदुर्गा के सबरीमाला में घुसने वाले मुद्दे पर रिऐक्शन लेकर आऊं. मैं सेक्रेटेरिएट के सामने कई हफ्तों से भूख हड़ताल पर बैठे बीजेपी नेताओं से बात करने लगी. बात करने के बाद मैं ऑफिस जाने के लिए निकली. उसी वक्त लोगों का एक समूह सेक्रेटरिएट की ओर मार्च करता हुआ निकला. उन्होंने लेफ्ट पॉलिटिकल पार्टियों के लगाए होर्डिंग और बैनर फाड़ दिए और पत्रकारों पर हमला शुरू कर दिया. जब मैंने इस हमले को शूट करना शुरू किया, तो भीड़ ने मुझे धमकी दी. भीड़ ने मुझे जान से मारने की धमकी दी. मैंने धमकी को अनसुना कर दिया, लेकिन मुझे झटका तब लगा, जब मेरी पीठ पर एक लात पड़ी. मेरे प्रोफेशनल करियर का ये सबसे बुरा वक्त था. जब मेरा कैमरा स्विच ऑफ हो गया तो मुझसे वो तस्वीरें और वीडियो छूट गए, जिस दौरान भीड़ ने मेरे ऊपर हमला किया था. दो घंटे बाद ये सब खत्म हुआ तो मैं चाहती थी कि डॉक्टर के दिखाने से पहले मैं सभी फोटो और वीडियो ऑफिस में जमा कर दूं. मेरे लिए ड्यूटी पहले थी. मैं खुश हूं कि ऐसी स्थिति में भी मैं अपना काम कर रही हूं.' शाजिला सीपीएम के न्यूज़ चैनल कैराली टीवी में काम करती हैं. सात साल तक कैराली टीवी में डेस्क पर काम करने के बाद 2013 में शाजिला कैमरापर्सन बनी थीं. इसके बाद उन्होंने कई विधानसभा चुनाव कवर किए, केरल की बाढ़ कवर की और कई राजनैतिक हिंसाओं में रिपोर्टिंग की. लेकिन शाजिला कहती हैं कि वो 2 जनवरी, 2018 को हुई घटना को कभी भूल नहीं पाएंगी. उनका कहना है कि नेताओं को मीडिया की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए. पत्रकारों का काम ही परिस्थितियों की यथास्थिति जानकारी लोगों तक पहुंचाना होता है. कहीं पर कुछ भी हो पत्रकार अपने काम के प्रति संजीदगी दिखाता नज़र आता है फिर भी उसे बार-बार टारगेट किया जाता है. झारखंड में हुए नक्सली हमले के दौरान भी दूरदर्शन के कैमरापर्सन की मौत हो गई थी. उन्होंने भी हिम्मत दिखाते हुए आखिरी समय तक अपना काम पूरी ईमानदारी के साथ किया था. अपनी मां के लिए रिकॉर्ड किया उनका वीडियो तब वायरल हुआ था. कैमरापर्सन शाजिला की फोटो भी आज वायरल हो रही है. उन्होंने भी हार नहीं मानी और खुद पर हमला होने के बाद भी अपना काम करती रहीं | ...

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मजीठिया

कंगना राणावत की फिल्म मणिकर्णिका की शुटिंग फेडरेशन और मजदूर यूनियन ने रोकी

कहासुनी

भाजपा विधायकों ने हीं लिखवाए पत्रकारों पर फर्जी मुकदमे